Apple ने अपना पहला फोल्डेबल iPhone Duo 9 सितंबर को सालाना इवेंट में लॉन्च कर दिया है. अमेरिका में इसकी शुरुआती कीमत 1,999 डॉलर यानी लगभग ₹1.90 लाख है. वहीं बात करें भारत में इसकी कीमत, तो इस फोन की शुरुआती कीमत भारत में करीब ₹2,99,900 है. यानी भारत में फोल्डेबल आईफोन खरीदने वाले कस्टमर्स को यही फोन खरीदने के लिए अमेरिका के मुकाबले लगभग ₹1.09 लाख ज्यादा खर्च करने होंगे.
फोल्डेबल iPhone की इतनी ज्यादा कीमत और अमेरिका और भारत की कीमत में बड़ा अंतर देखकर भारतीय Apple यूजर्स के बीच चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर कंपनी भारत में अपने फोन की कीमत इतनी ज्यादा कैसे तय करती है. क्या इसकी वजह सिर्फ टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी है या Apple की प्राइसिंग स्ट्रेटजी भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है? आइए जानते हैं सभी सवालों के जवाब...
ऐसे में आपके मन में भी यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर Apple अपने प्रोडक्ट्स की कीमत कैसे तय करता है? इसका जवाब है कि ऐप्पल सिर्फ उन्हें बनाने में आने वाली लागत के हिसाब से आईफोन की कीमत तय नहीं करता. कंपनी कीमत तय करते समय कई चीजों को ध्यान में रखती है. इसमें ब्रांड की वैल्यू, किसी देश का मार्केट, ग्राहकों की खरीदने की क्षमता और उस प्रोडक्ट की डिमांड जैसे फैक्टर शामिल होते हैं.
Apple खुद को एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में मार्केट में पेश करता है. इसलिए कंपनी के iPhone, Mac और दूसरे डिवाइस आमतौर पर अपने सेगमेंट के कई दूसरे प्रोडक्ट्स के मुकाबले महंगे होते हैं. कीमत भी इसी प्रीमियम पोजिशनिंग को ध्यान में रखकर कंपनी तय करती है.
भारत में iPhone की कीमत ज्यादा होने के पीछे कई कारण हैं. इनमें सबसे बड़ा कारण टैक्स है. भारत में आयात किए जाने वाले प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी के साथ GST भी लागू होता है. इन टैक्स के कारण से अमेरिका जैसे मार्केट की तुलना में भारत में डिवाइस की कीमत काफी ज्यादा बढ़ जाती है. इसके साथ ही डॉलर और रुपये के बीच अंतर भी कीमत पर असर डालती है. जब रुपये की तुलना में डॉलर मजबूत होता है, तो अमेरिका से जुड़े प्रोडक्ट्स की कीमत भारतीय मार्केट में बढ़ सकती है.
हालांकि, भारत में iPhone महंगा होने की पूरी वजह सिर्फ टैक्स नहीं है. Apple की अपनी प्राइसिंग स्ट्रेटजी भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है. कंपनी भारत को एक बड़े और तेजी से बढ़ते स्मार्टफोन मार्केट के रूप में देखती है, लेकिन यहां iPhone को बड़े पैमाने पर सस्ते फोन के मुकाबले बेचने के बजाय प्रीमियम सेगमेंट में रखा जाता है.
यही कारण है कि भारत में Apple के नए और प्रीमियम मॉडल की कीमत काफी ज्यादा रखी जाती है. कंपनी अपने ब्रांड की प्रीमियम इमेज को बनाए रखते हुए ज्यादा मार्जिन पर भी फोकस करती है.
इसलिए iPhone Duo की भारत और अमेरिका की कीमत में अंतर को सिर्फ टैक्स का नतीजा मानना सही नहीं होगा. टैक्स, करेंसी एक्सचेंज रेट, मार्केट की स्थिति और Apple की प्रीमियम ब्रांडिंग ये सभी मिलकर अलग-अलग देशों में iPhone की कीमत तय करने में भूमिका निभाते हैं.