रणजी का 'अमर' रिकॉर्ड: 443 रनों का तूफान , टूटने ही वाला था ब्रैडमन का महारिकॉर्ड, मैदान छोड़कर भाग गई टीम!
रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन में मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने 400 रनों की मैराथन पारी खेलकर इतिहास रच दिया. वो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 रन बनाने वाले दूसरे भारतीय बने. उनसे पहले 1948 में बाबासाहेब निंबालकर ने 443 रनों की नाबाद पारी खेली थी.
रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन में सोमवार (19 अक्टूबर) को मिजोरम के एक बल्लेबाज ने ऐतिहासिक कारनामा किया. नागालैंड के खिलाफ मैच में चिन्मय सुतार ने 400 रनों की मैराथन पारी खेलकर स्पेशल क्लब में एंट्री मार ली. 78 साल बाद ऐसा हुआ, जब किसी बल्लेबाज ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 रनों के पहाड़ को छुआ. उनसे पहले 1948 में महाराष्ट्र के बाबासाहेब निंबालकर ने काठियावाड़ के खिलाफ 443 रन बनाया था. चिन्मय सुतार ने 400 रन बनाकर 78 सालों का इंतजार तो खत्म कर दिया, लेकिन बाबासाहेब का रिकॉर्ड अभी भी अटूट है.
बाबासाहेब निंबालकर की 443 रनों की मैराथन पारी तो खास थी ही, लेकिन उस मैच से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी है, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे और ये सोचेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है? जी हां, महाराष्ट्र के बल्लेबाज ने विरोधी टीम की हवा निकाल दी थी. उनमें बिल्कुल दम नहीं बचा और 443 रन बनने के बाद काठियावाड़ की टीम ने मैदान पर उतरने से ही मना कर दिया था.
टूटते-टूटते रह गया ब्रैडमैन का महारिकॉर्ड
निंबालकर ने दिसंबर 1948 को पुणे के मैदान में महाराष्ट्र की तरफ से खेलते हुए काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे. उस पारी में उन्होंने 49 चौके और एक छक्का जड़ा था. तब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर करने का रिकॉर्ड दर्ज था. ब्रैडमैन ने 1930 में न्यू साउथवेल्स की तरफ खेलते हुए क्वींसलैंड के खिलाफ नाबाद 452 रन बनाए थे.
विरोधी टीम ने मैदान पर आने से किया इनकार
बाबासाहेब निंबालकर इस रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब आ गए थे. तीसरे दिन वो 443 रन बनाकर नाबाद थे और ब्रैडमैन के तत्कालीन फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड को तोड़ने से सिर्फ 9 रन दूर थे. लंच ब्रेक के बाद जब महाराष्ट्र के कप्तान ने पारी घोषित करने से मना किया तो काठियावाड़ के खिलाड़ियों ने हाथ खड़े कर दिए. महाराष्ट्र के कप्तान राजा गोखले ने अंपायर और विरोधी टीम के कप्तान से से कुछ और ओवर खेलने की अपील भी की, ताकि निंबालकर 452 रनों का आंकड़ा पार सके, लेकिन काठियावाड़ की टीम ने मैदान पर उतरने से साफ इनकार कर दिया. महाराष्ट्र की टीम मैच तो जीत गई, लेकिन निंबालकर की मेहनत पर पनि फिर गया. वो डॉन ब्रैडमैन के रिकॉर्ड के बेहद पास आकर भी दूर रह गए.
फर्स्ट क्लास मैचों में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर के मामले में निंबालकर चौथे स्थान पर हैं. वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान और महान बल्लेबाज ब्रायन लारा 501 रनों की नाबाद पारी के साथ शीर्ष पर हैं. उन्होंने पाकिस्तान के हनीफ मोहम्मद के 499 रनों के रिकॉर्ड को तोड़ा था. हनीफ ने 8 जनवरी 1959 को कराची की ओर से बहावलपुर के खिलाफ बनाया था. उनके बाद ब्रैडमैन और निंबालकर का नंबर आता है.
कौन हैं चिन्मय सुतार?
बाबासाहेब निंबालकर की ये दिलचस्प कहानी इसलिए ताजा हुई है, क्योंकि 48 साल बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 रनों का विशाल आंकड़ा छुआ है. मुंबई से मिजोरम शिफ्ट हुए चिन्मय सुतार ने नागालैंड के खिलाफ नाबाद 400 रन बनाकर इतिहास रच दिया. सुतार पृथ्वी शॉ के 379 और संजय मांजरेकर के 377 को पीछे छोड़ते हुए सर्वकालिक सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गए. टूर्नामेंट में सर्वोच्च स्कोर का रिकॉर्ड अभी भी बाबासाहेब निंबालकर के नाम दर्ज है.
बता दें कि 29 वर्षीय चिन्मय सुतार मुंबई का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और 2019 में बांग्लादेश में हुए ACC इमर्जिंग टीम्स एशिया कप के लिए भारत की अंडर-23 इमर्जिंग टीम का हिस्सा थे. इस साल की शुरुआत में, उन्होंने मुंबई T20 लीग में हिस्सा लिया और टूर्नामेंट में 200 से ज्यादा रन बनाए.
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे बड़े स्कोर:
1) भाऊसाहेब बाबासाहेब निंबालकर: 1948 में महाराष्ट्र की ओर से काठियावाड़ के खिलाफ 443 रन (नाबाद)
2) चिन्मय सुतार: 2026 में मिजोरम की ओर से नागालैंड के खिलाफ 400 रन (नाबाद)
3) पृथ्वी शॉ: 2023 में मुंबई की तरफ से असम के खिलाफ 379 रन
4) संजय मांजरेकर: 1991 में बॉम्बे की ओर से हैदराबाद के खिलाफ 377 रन
5) मारुति श्रीधर: 1994 में हैदराबाद की ओर से आंध्र के खिलाफ 366 रन