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ग्लॉस्टरशायर के इंग्लिश तेज गेंदबाज क्रेग माइल्स ने अपनी मानसिक सेहत को ध्यान में रखते हुए क्रिकेट से अचानक संन्यास का ऐलान कर दिया है. 32 साल के क्रेग माइल्स ने आखिरी बार जून में 'वाइटैलिटी ब्लास्ट' में प्रोफेशनल क्रिकेट खेला था. क्रेग माइल्स ने अपने 15 साल के डोमेस्टिक करियर में सभी फॉर्मेट को मिलाकर कुल 512 विकेट झटके हैं. क्रेग माइल्स के मुताबिक वह अपनी मेंटल हेल्थ के चलते प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास ले रहे है. हालांकि यह फैसला लेना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था, लेकिन हाल के समय में खेल को लेकर उन्होंने जो परेशानियां झेली हैं, उन्हें देखते हुए क्रेग माइल्स ने अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता देने के लिए यह फैसला किया है.
क्रेग माइल्स ने कहा कि अपनी मानसिक सेहत को बचाने के लिए उन्हें खेल से दूर होने की जरूरत है. क्रेग माइल्स ने आखिरी बार जून में 'वाइटैलिटी ब्लास्ट' में खेला था. क्रेग माइल्स ने डोमेस्टिक क्रिकेट के सभी फॉर्मेट्स में 512 विकेट लेकर अपने 15 साल के करियर का समापन किया. ग्लूसेस्टरशायर द्वारा जारी एक बयान में, क्रेग माइल्स ने बताया कि हाल के समय में क्रिकेट के साथ उनकी परेशानियां इतनी बढ़ गई थीं कि उन्हें संभालना मुश्किल हो गया था.
क्रेग माइल्स ने लिखा, 'दुख के साथ-साथ बहुत गर्व के साथ, मैं प्रोफेशनल क्रिकेट से अपने संन्यास की घोषणा कर रहा हूं. हाल ही में जिन चुनौतियों का मैंने सामना किया है, वैसी चुनौतियां मैंने अपने करियर के दूसरे दौर में भी देखी हैं, हालांकि इस बार जितनी तीव्रता से महसूस हुईं, उतनी पहले कभी नहीं हुईं. खुद से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखना और हमेशा उन मानकों तक पहुंचने की कोशिश करना, अक्सर इन मुश्किल दौरों की वजह रहा है. कभी-कभी, इन चीजों ने मेरी क्षमताओं और प्रदर्शन के बारे में मेरी सोच को प्रभावित किया है. इसके बाद मन में उठने वाले सवाल और खुद पर शक करने की आदत एक नकारात्मक सोच को और मजबूत करती है.'
क्रेग माइल्स ने कहा, 'जब क्रिकेट की नाकामी दिमाग में जुड़ने लगती है तो खेल के प्रति नजरिया बहुत कठोर और अंततः लंबे समय तक खेलना मुश्किल हो जाता है. क्रेग माइल्स ने कहा कि खेल में कई सफल दौर देखने के बावजूद, अब उन्हें नहीं लगता कि वे खुद से तय किए गए स्टैंडर्ड को बनाए रखने में सक्षम हैं. क्रेग माइल्स ने कहा, 'दुर्भाग्य से, अब मुझे लगता है कि मुझमें उस तरह से आगे बढ़ने की क्षमता नहीं है, जिससे मैं ट्रेनिंग कर सकूं, खेल सकूं और ऐसा प्रदर्शन कर सकूं, जिसे मैं खुद स्वीकार कर सकूं. अब मैं इन उपलब्धियों की पहले से कहीं ज्यादा कद्र कर सकता हूं और शायद पहली बार, खुद को वह सम्मान दे सकता हूं जिसका मैं हकदार हूं.'