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क्यों देवी ने अपने ही सिर को धड़ से कर दिया अलग, मां छिन्नमस्ता के उग्र शक्ति के पीछे का क्या है रहस्य?

Devi Chhinnamasta Mystery: मां छिन्नमस्ता के स्व-शीश काटने की क्या पौराणिक कथा है और उनके उग्र स्वरूप का आध्यात्मिक अर्थ क्या है? बलिदान-त्याग के गहरे रहस्य को आइए इस लेख में विस्तार से जानेंगे.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 15, 2026, 01:52 PM IST | Updated: Oct 15, 2026, 01:55 PM IST
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हिंदू धर्म और शाक्‍त परंपरा में एक ऐसी देवी का जिक्र आता है जो शक्ति के दस तांत्रिक और दिव्‍य रूपों में से एक हैं. शास्‍त्रों में बताए गए दस महाविद्याओं में से छठी महाविद्या यानी मां छिन्‍नमस्‍ता का नाम आते ही उनका अलग और अद्भुत स्‍वरूप का ध्यान आ जाता है. एक ऐसी देवी जिन्होंने अपनों के लिए अपना ही बलिदान दे दिया. इन देवी का नाम है मां छिन्‍नमस्‍ता जिनका नाम ही इनके स्वरूप का कुछ प्रतिशत वर्णन कर देता है. आइए इस लेख में जानें कि माता के स्वरूप का आध्यात्मिक संदेश और महत्व क्या है, मां छिन्‍नमस्‍ता कौन हैं और इनकी कथा क्या है.

कौन हैं देवी छिन्‍नमस्‍ता माता?

धार्मिक ग्रंथों में प्रचंड चंडिका के रूप में देवी छिन्नमस्ता को बताया गया है. छिन्नमस्ता यानी ऐसी देवी जिनका सिर धड़ से कट कर अलग हो गया हो. छिन्नमस्ता यानी 'सिर को काट लेना'. मां छिन्नमस्ता की पौराणिक मूर्तियों में दिखता है कि माता ने अपने ही सिर को अपनी ही खड्ग से काटा है और अपने ही हाथ में कटे सिर को धारण किया है. वहीं धड़ से रक्त की तीन धाराएं भी निकल रही हैं. रक्त की एक धारा देवी की सखी जया के मुख में जा रही है और दूसरी विजया के मुख में और तीसरी धारा माता के मुख में जा रही है. देवी छिन्‍नमस्‍ता का यह स्वरूप आत्‍मबलिदान को दर्शाता है. माता को कामदेव और रति के ऊपर खड़ा दिया जाता है जो संभोग अवस्था में हैं. यह दृश्य नये जीवन के आगमन को दिखाता है साथ ही मृत्‍यु की भी एक झलक इस तस्वीर में दिखती है. यानी सृजन ओर विनाश हमेशा साथ-साथ चलते हैं. ध्यान दें कामदेव और रति कामवासना, प्रेम और आकर्षण के प्रतीक है जो सांसारिक इच्छाओं से भरे हुए हैं और माता का उनके ऊपर खड़े रहना काम वासना, अहंकार और सांसारिक मोह पर पूर्ण विजय प्राप्ति को दिखाता है.

देवी छिन्‍नमस्‍ता की कथा क्या है?

देवी छिन्नमस्ता का मुख्य वर्णन शाक्त ग्रंथों में मिलता है जिसके अनुसार कथा इस तरह है कि एक दिन अपनी दो सहेलियों के साथ देवी पार्वती मंदाकिनी नदी में स्नान के लिए गईं. स्नान करते हुए दोनों सहेलियों को तेज भूख लग गई तो उन्होंने देवी पार्वती से इस बारे में बताया. लेकिन देवी ने उनकी बातों पर अधिक ध्यान नहीं दिया. जिस पर सहेलियां देवी से रूठ गईं और कहा 'तुम्हें तो पूरा जगत देवी मानता है, मां समझता है और मां तो बच्चों को भूखा पाकर अपना खून तक बहा सकती है लेकिन तुम हमारी बातों पर ध्यान तक नहीं दे रही हो. फिर क्या था सहेलियों की इस बात पर देवी पार्वती क्रोध से भर गईं. उसी समय अपने खड्ग से अपना सिर काट डाला और उससे रक्तधार निकली उसका पान अपनी सहेलियों को कराकर उनकी भूख शांत की. देवी ने अपना बलिदान देकर अपनी सहेलियों की भूख शांत की. मां के इसी रूप को छिन्नमस्ता माता कहा गया.

मां छिन्नमस्ता की साधना

मां छिन्नमस्ता की साधना अत्यंत गूढ़ होती है. माता की जटिल साधना उच्च स्तर की मानसिक और आध्यात्मिक क्षमता वाले तांत्रिक, योगी और संन्यासी ही करते हैं. माता उग्र शक्ति से भरी हुई है जिसके कारण सामान्य लोगों में उनकी साधना करने की क्षमता नहीं होती है. फिर भी श्रद्धालु अगर माता की सामान्य उपासना करें तो जीवन की बाधाओं, शत्रुओं के भय और रोगों से मुक्ति पा सकते हैं.

मां छिन्नमस्ता के स्वरूप का आध्यात्मिक संदेश

आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो मां छिन्नमस्ता की उपासना साधक को उसके अहंकार, मोह और सांसारिक बंधनों से बाहर निकालती है और  शिवत्व की ओर आगे बढ़ाती है. माता की साधना आत्म-नियंत्रण और त्याग का संदेश देता है. माता की सहचरी डाकिनी रज गुण को दर्शाती है और वर्णिनी तम गुणों का प्रतिनिधित्व करती हैं. माता प्रकृति रूप हैं और उनकी सहचरिया प्रकृति का संतुलन बनाए रखती हैं.

(Disclaimer- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं, स्थानीय परंपराओं और उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल सूचना देना है, किसी मान्यता या दावे की पुष्टि करना नहीं.) 

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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