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Shardiya Navratri 2026 Maa Brahmacharini Puja Vidhi Muhurat: 11 अक्टूबर से शुरू हुए मां शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे रूप माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी. ध्यान दें आश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि 11 अक्टूबर 2026 को रात के 9:32 बजे शुरू होगी और 12 अक्टूबर 2026 की रात 10:14 बजे तिथि का समापन होगा. द्वितीया तिथि 12 अक्टूबर 2026 को मान्य होगा. नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें और माता को प्रसन्न करने के लिए कौन सा भोग चढ़ाएं और माता की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
मां ब्रह्मचारिणी माता पार्वती के तपस्वी स्वरूप को दर्शाती है जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और नंगे पैर चलती हैं. माता के दाहिने हाथ में जप माला है और बाएं हाथ में माता ने कमंडल धारण किया है. माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों को धैर्य, संयम और ज्ञान का आशीर्वाद किया जाता है. इसके साथ ही जो लोग वैराग्य के रास्ते पर चलना चाहते हैं तो उनके लिए भी मां दुर्गा के इस रूप की उपासना करना अति शुभ माना जाता है.
माता ब्रह्मचारिणी को भोग में शक्कर, चीनी, मिश्री और पंचामृत अति प्रिय है.
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:50 बजे से लेकर सुबह 05:38 बजे तक.
प्रातः सन्ध्या- सुबह 05:31 बजे लेकर सुबह 06:43 बजे तक.
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:50 बजे से लेकर दोपहर 12:36 बजे तक.
अमृत काल- दोपहर 02:33 बजे से लेकर शाम 04:14 बजे तक.
ब्रह्मचारिणी माता की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर साफ कपड़े पहनें.
हो सके तो पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें.
अब पूजा स्थल को साफ करें और धूप-दीप जलाएं. माता की पूजा शुरू करें.
माता को सफेद फूल चढ़ाएं. चंदन, रोली और अक्षत माता को अर्पित करें.
पूजा के दौरान माता के मंत्र का 108 बार जाप करें- 'ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः'.
इसके बाद माता की कथा का पाठ करें और आरती कर पूजा संपन्न करें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)