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Sarvapitra Amavasya 2026: श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि इस दिन पितृ विदा लेकर पितृलोक चले जाते हैं. इस दिन उन पितृ का श्राद्ध कर्म किया जाता है जिनकी मृत्यु कब हुई ये ज्ञात न हो. इस तिथि के बाद पितृ का आशीर्वाद और कृपा पाने के लिए अगले साल के पितृ पक्ष का इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या के मौके पर अगर कुछ विशेष उपाय कर पितृ को प्रसन्न कर दें तो उनको शांति मिल सकती है, पितृदोष से मुक्ति मिल सकती है और उनका आशीर्वाद पूरे घर पर बना रह सकता है. सर्वपितृ अमावस्या पर किन 7 उपायों को करें आइए जानें.
सर्वपितृ अमावस्या पर किसी गरीब या योग्य ब्राह्मण को अपने घर पर आदर सहित बुलाएं और फिर उन्हें सात्विक भोजन कराएं. इसके बाद दान-दक्षिणा दें. इस तिथि पर अगर इस उपाय को कर लें तो पितर तक यह भोजन पहुंचता है. जिसे पाकर पितर संतुष्ट होते हैं और पितृ दोष से मुक्त करते हैं.
ज्योतिषियों के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या पर अगर पितरों को प्रसन्न करना है तो गाय को हरी पालक खिलाएं. हरी घास का चारा करवाने से भी पितृ का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस तिथि पर या पूरे पितृ पक्ष में गाय को रोटी या गुड़ खिलाकर भी पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं.
शास्त्रों के अनुसार, अगर सर्वपितृ अमावस्या पर कौए, कुत्ते और चींटियों को भोजन दें तो यह सीधा पितरों को पहुंचता है. इन जीवों को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है।
सर्वपितृ अमावस्या पर शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में अगर तिल के तेल का दीया जलाएं तो पितरों को मोक्ष का रास्ता दिखता है जिस पर आगे बड़ते हैं वैकुंठ धाम को प्राप्त करते हैं. ऐसे लोगों के परिवार और जीवन से पितृ दोष पूरी तरह दूर हो जाता है.
सर्वपितृ अमावस्या पर अगर पीपल के पेड़ में जल दें तो पितरों को तृप्ति मिलती है क्योंकि धार्मिक मान्यता है कि पीपल के पेड़ में पितर वास करते हैं. जल चढ़ाने के बात पेड़ की 7 परिक्रमा करें तो प्रभावशाली परिणाम प्राप्त होंगे.
सर्वपितृ अमावस्या पर अगर अन्न, वस्त्र और धन का गुप्त दान करें यानी ऐसा दान जिसके बारे में देने और लेने वाले के अलावा कोई और न जान सके. इस एक उपाय को करने से पितर प्रसन्न होकर अपनी कृपा आप पर और पूरे परिवार पर बनाए रखते हैं.
सर्वपितृ अमावस्या पर अगर श्रीमद्भागवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें तो पितरों की आत्मा शांत होकर मोक्ष के रास्ते पर आगे बढ़ती जाती है. इससे पितृ दोष भी दूर होता है.
(डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. बताए गए उपायों के प्रभाव और परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आस्था, स्थान तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें और किसी भी प्रकार के निश्चित परिणाम या लाभ का दावा न मानें.)