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नाराज हो सकते हैं पितर... पितृ पक्ष के 16 दिनों में दूर रखें घर का कलेश, जानिए क्या खाएं और क्या न खाएं?

पितृ पक्ष के दौरान मन और शरीर को शांत रखने के लिए तर्पण और श्राद्ध के दिनों में तामसिक भोजन, तीखे-मसालेदार खाने और घर के कलह-क्लेश से दूर रहने की सलाह दी जाती है.

नाराज हो सकते हैं पितर... पितृ पक्ष के 16 दिनों में दूर रखें घर का कलेश, जानिए क्या खाएं और क्या न खाएं?

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के 16 दिनों को बहुत पवित्र माना जाता है. ये पूरा वक्त पूर्वजों यानी पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए होता है.

इन दिनों में किया जाने वाला तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म पितरों को खुश करता है, ऐसी मान्यता है. पर शास्त्रों में इन पवित्र दिनों के लिए कुछ सख्त नियम भी बताए गए हैं.

खासकर खाने-पीने, रहन-सहन और बर्ताव को लेकर खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इन दिनों की छोटी सी गलती भी पितरों को नाराज कर सकती है.

पितृ पक्ष में भूलकर भी न करें तामसिक भोजन का सेवन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के पूरे 16 दिनों तक खान-पान में पूरी शुद्धता और पवित्रता रखनी चाहिए. इन दिनों घर में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा या किसी भी तरह के तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है.

शास्त्रों के अनुसार तामसिक भोजन मन में नकारात्मक विचार और आलस्य पैदा करता है. जब आप अपने पूर्वजों को याद कर रहे हों, तब भोजन का सात्विक होना बहुत जरूरी है.

घर में बनने वाले सामान्य खाने में भी ज्यादा तीखे और मसालेदार चीजों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.

श्राद्ध और तर्पण के समय सात्विक भोजन ही है उत्तम

पितृ पक्ष में जब भी आप तर्पण या ब्राह्मण भोजन कराते हैं, तो उस समय पूरी तरह से सात्विक और हल्का भोजन बनाना चाहिए.

भोजन ऐसा होना चाहिए जिसे खाकर मन शांत और पवित्र रहे. ऐसा माना जाता है कि जो सात्विक खाना हम बनाते हैं, उसी का एक अंश हमारे पूर्वज भी स्वीकार करते हैं.

अगर भोजन बनाने में शुद्धता का ध्यान न रखा जाए, तो तर्पण का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. इसलिए इस दौरान सादा दाल, चावल, सब्जी और पूरी जैसी सात्विक चीजें ही बनानी और खानी चाहिए.

घर के कलेश और मानसिक अशांति से दूर रहने की दी जाती है सलाह

पितृ पक्ष केवल खाने-पीने से जुड़े परहेज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यवहार की परीक्षा का समय भी होता है. इन दिनों घर के अंदर किसी भी तरह का वाद-विवाद, झगड़ा या क्लेश नहीं होना चाहिए.

शास्त्रों में माना गया है कि जिस घर में हर समय कलह और अशांति रहती है, वहां से पितर बिना आशीर्वाद दिए ही लौट जाते हैं.

अपने शब्दों पर कंट्रोल रखना और परिवार के सभी सदस्यों के साथ प्रेम से रहना पितृ पक्ष का एक बहुत महत्वपूर्ण नियम माना जाता है.

मन और शरीर की शांति से ही मिलता है तर्पण का पूरा फल

शास्त्रों में बताया गया है कि पितृ पक्ष के दौरान व्यक्ति का मन और शरीर दोनों पूरी तरह शांत रहने चाहिए. अगर आपका मन किसी के प्रति द्वेष, गुस्से या नफरत से भरा हुआ है, तो आपका किया गया श्राद्ध स्वीकार नहीं होता.

श्राद्ध कर्म करते समय ध्यान हमेशा अपने पूर्वजों के प्रति आदर और कृतज्ञता पर होना चाहिए. जब मन में शांति और श्रद्धा भाव होता है, तभी तर्पण का सच्चा लाभ मिलता है और पूर्वज प्रसन्न होकर परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

बुजुर्गों और जरूरतमंदों का अनादर करने से बचें

पितृ पक्ष में अपने से बड़ों, बुजुर्गों और घर आए किसी भी जरूरतमंद का अनादर करना सबसे बड़ा पाप माना गया है. ऐसी मान्यता है कि हमारे पितर किसी भी रूप में हमारे द्वार पर आ सकते हैं.

इसलिए इस दौरान द्वार पर आए किसी गरीब या भूखे व्यक्ति को खाली हाथ न लौटाएं. पशु-पक्षियों जैसे गाय, कुत्ते और कौवे को भी भोजन का हिस्सा जरूर दें.

हर इंसान के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना ही पितृ पक्ष की पूजा को सफल और सार्थक बनाता है.

डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख सनातन धर्म की पौराणिक मान्यताओं, धर्मशास्त्रों और लोक परंपराओं पर आधारित एक विवरणात्मक रिपोर्ट है. इसका उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक और सांस्कृतिक नियमों की प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना है.

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About the Author

Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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