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भारत के 5 सबसे अनोखे और प्रसिद्ध गणेश मंदिर: जानिए किसने बनवाया और क्या हैं इनके अनसुने रहस्य?

इस खबर में भारत के 5 सबसे सिद्ध और प्रसिद्ध गणेश मंदिरों के बारे में डिटेल से जानेंगे. साथ ही इनका इतिहास, किसने इनका निर्माण कराया और क्यों इन मंदिरों में बाप्पा की पूजा और दर्शन का खास महत्व माना जाता है उसके बारे में भी बताएंगे.

भारत के 5 सबसे अनोखे और प्रसिद्ध गणेश मंदिर: जानिए किसने बनवाया और क्या हैं इनके अनसुने रहस्य?

गणेश चतुर्थी के पावन तयोहार 14 सितंबर को है इस दिन देश भर में गणपति बाप्पा की पूजा-अर्चना बहुत ही धूमधाम से की जाती है. भारत में भगवान गणेश के कई ऐतिहासिक और चमत्कारिक मंदिर स्थित हैं, जिनकी आस्था देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फैली हुई है. 

आइए भारत के ऐसे ही 5 सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक गणेश मंदिरों के बारे में डिटेल से जानते हैं.  

श्री सिद्धिविनायक मंदिर(मुंबई, महाराष्ट्र)

मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर भारत के सबसे अमीर और फेमस मंदिरों में से एक माना जाता है. यहां देश-विदेश के आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ बड़ी-बड़ी हस्तियां और बॉलीवुड के स्टार्स भी बाप्पा का आशीर्वाद लेने आते हैं.  

कब बना था ये मंदिर: सिद्धिविनायक मंदिर 19 नवंबर 1801  को बनकर तैयार हुआ था.

किसने बनवाया था ये मंदिर: इस मंदिर का निर्माण ठेकेदार लक्ष्मण विठू पाटिल और देउबाई पाटिल ने करवाया था. देउबाई की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने इस इच्छा से मंदिर का निर्माण कराया कि बाप्पा बाकी निःसंतान महिलाओं की गोद भर देंगे.

क्या है मंदिर की खासियत?

यहां स्थापित गणेश जी की मूर्ति की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है, जिसे बहुत सिद्ध और चमत्कारिक माना जाता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, इसीलिए इन्हें नवसाचा गणपति (मन्नत पूरी करने वाले गणेश) भी कहा जाता है.    

श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर (पुणे, महाराष्ट्र)

पुणे में स्थित दगडूशेठ हलवाई मंदिर की भव्यता और बाप्पा का दिव्य स्वरूप हर किसी का मन मोह लेता है. यहां का गणेशोत्सव पूरे महाराष्ट्र में आकर्षण का केंद्र रहता है.  

कब बना था ये मंदिर: ये मंदिर 1893 में बनकर तैयार हुई थी.

किसने बनवाया था ये मंदिर: इस मंदिर को पुणे के प्रसिद्ध मिठाई व्यापारी दगडूशेठ हलवाई और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने बनवाया था.  

क्या है मंदिर की खासियत?

प्लेग महामारी के दौरान अपने इकलौते बेटे को खोने के बाद दगडूशेठ दंपत्ति ने अपने गुरु के सुझाव पर इस मूर्ति की स्थापना की थी.

लोकमान्य तिलक ने यहीं से सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत कर स्वतंत्रता संग्राम के लिए लोगों को एकजुट किया था. यहां बाप्पा की लगभग 7.5 फीट ऊंची प्रतिमा को किलो सोने और रत्नों के आभूषणों से सजाया जाता है.

खजराना गणेश मंदिर (इंदौर, मध्य प्रदेश)  

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित खजराना गणेश मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है.  

कब बना था ये मंदिर: इस मंदिर की बात करें तो ये 1735  में बनकर तैयार हुआ था.

किसने बनवाया था ये मंदिर: इस मंदिर का निर्माण मराठा साम्राज्य की महान महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था.  

क्या है मंदिर की खासियत?

औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए इसे एक कुएं में छिपा दिया गया था. बाद में पंडित मंगल भट्ट को सपना आया, जिसके बाद अहिल्याबाई ने मूर्ति को कुएं से निकालकर मंदिर स्थापित कराया था.

मान्यता है कि मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाने से मन्नतें पूरी होती हैं और काम सफल होने पर श्रद्धालु सीधा स्वास्तिक बनाने दोबारा आते हैं.  

कणिपाकम् विनायक मंदिर (चित्तूर, आंध्र प्रदेश)  

दक्षिण भारत में स्थित कणिपाकम् मंदिर अपने अनूठे और चमत्कारिक इतिहास के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है.  

कब बना था ये मंदिर: इस मंदिर को 11वीं शताब्दी में बनवाया गया था.

किसने बनवाया था ये मंदिर: इसका निर्माण चोल राजा कुलोथुंगा चोल प्रथम ने करवाया था, जिसके बाद विजयनगर के राजाओं ने इसका विस्तार किया.

क्या है इस मंदिर की खासियत?

यह एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट हुई) मूर्ति है. सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस मंदिर में स्थापित गणेश जी की मूर्ति का आकार लगातार बढ़ रहा है.

यहां बाप्पा के माथे पर तीन रंग- सफेद, पीला और लाल दिखाई देते हैं. इस मंदिर को सत्य और न्याय का प्रतीक भी माना जाता है.  

त्रिनेत्र गणेश मंदिर (रणथंभौर, राजस्थान)  

राजस्थान के सवाई माधोपुर में स्थित रणथंभौर किले के अंदर यह ऐतिहासिक मंदिर 1000 साल से भी अधिक पुराना है.  

कब बना था ये मंदिर: इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी के आसपास हुआ था. कुछ इतिहासकारों के अनुसार इसे रणथंभौर के किला निर्माण के साथ बनाया गया था.

किसने बनवाया था ये मंदिर: इस मंदिर का निर्माण राजा हम्मीरदेव चौहान ने कराया था.  

क्या है इस मंदिर की खासियत?

ये दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान गणेश की तीन आंखों वाली मूर्ति स्थापित है. यहां बाप्पा अपने पूरे परिवार (पत्नी रिद्धि-सिद्धि और पुत्र शुभ-लाभ) के साथ विराजमान हैं.

इस मंदिर की सबसे अनोखी बात ये है कि देश भर से लोग अपने घर के शादी-विवाह और शुभ कार्यों का पहला निमंत्रण कार्ड डाकके जरिए रणथंभौर वाले गणेश जी के नाम से भेजते हैं.  

डिस्क्लेमर (Disclaimer):यह लेख पौराणिक मान्यताओं, ऐतिहासिक अभिलेखों और स्थानीय धार्मिक परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से अवगत कराना है.

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Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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