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Sun Vs Lunar Calendar: हर साल क्यों बदलती है दिवाली-छठ की तारीख, पर मकर संक्रांति रहती है फिक्स? जान लो सूर्य-चंद्रमा का ये गणित

आपने कभी सोचा है कि दिवाली-छठ, होली समेत सारे हिंदू व्रत-त्‍योहार की तारीख हर साल बदल जाती है, लेकिन मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को ही पड़ती है. ऐसा क्‍यों होता है? आइए समझते हैं इसका पूरा गणित.

Sun Vs Lunar Calendar: हर साल क्यों बदलती है दिवाली-छठ की तारीख, पर मकर संक्रांति रहती है फिक्स? जान लो सूर्य-चंद्रमा का ये गणित
Image Credit: सूर्य-चंद्र कैलेंडर में अंतर और उनके जरिए तिथियों की गणना. (Photo: AI)

हर साल हमें हर व्रत-त्‍योहार की तारीख देखने के लिए कैलेंडर या हिंदू पंचांग देखना पड़ता है क्‍योंकि हर साल सभी व्रत-त्‍योहार की तारीख बदल जाती है. इसलिए हर साल होली-दिवाली, छठ, रक्षाबंधन से लेकर महीने की तिथियां तक अलग-अलग तारीखों पर पड़ती हैं. लेकिन हिंदू धर्म से जुड़े ही मकर संक्रांति जैसे चुनिंदा पर्व हर साल फिक्‍स तारीख पर आते हैं. मकर संक्रांति अंग्रेजी कैलेंडर की 14 जनवरी को ही मनाया जाता है. अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्‍यों कि सारे व्रत-त्‍योहार हिंदू कैलेंडर (चैत्र-वैशाख महीने) से चलते हैं और मकर संक्रांति अंग्रेजी कैलेंडर से. लेकिन ऐसा नहीं है मकर संक्रांति भी हिंदू कैलेंडर से ही चलती है लेकिन सौर कैलेंडर से.

दरअसल, इसके पीछे असली वजह है सूर्य और चंद्र की स्थिति. मकर संक्रांति भी हिंदू कैलेंडर के अनुसार ही मनाया जाता है लेकिन उसकी तारीख की गणना सूर्य की स्थिति से होती है और बाकी व्रत त्‍योहारों की चंद्रमा की स्थिति से. इसलिए हिंदू धर्म में चंद्र वर्ष और सौर वर्ष होते हैं.

सूर्य कैलेंडर क्‍या है?

पृथ्‍वी को सूर्य का एक चक्‍कर लगाने में 1 साल यानी कि करीब 365 दिन और 6 घंटे लगते हैं. ज्‍योतिष के अनुसार सूर्य हर महीने राशि बदलते हैं इसलिए 12 राशि में एक-एक महीने रहते हुए 1 साल में 1 राशि चक्र पूरा करते हैं. सूर्य हर महीने के मध्‍य में 14 से 17 तारीख के बीच राशि परिवर्तन करते हैं.

चंद्र कैलेंडर क्‍या है?

चंद्रमा सवा दो दिन में राशि बदलता है और एक महीने में 12 राशियों का चक्कर पूरा करता है. दो अमावस्या के बीच का समय 29.5 दिन होता है, इसे ही चंद्र मास कहते हैं.

इस तरह 354 दिन के चंद्र वर्ष और 365 दिन के सौर वर्ष के बीच हर साल 11 दिन का गैप आता है. जिसे पूरा करने के लिए हर 3 साल में अधिकमास आता है.

तिथियों की गणना कैसे?

हिंदू कैलेंडर के हर महीने में 2 पक्ष होते हैं. 15 दिन का कृष्‍ण पक्ष और 15 दिन का शुक्‍ल पक्ष होता है. कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से चतुर्दशी तक 14 दिन के बाद आखिरी दिन अमावस्‍या और शुक्‍ल पक्ष में प्रतिपदा से चतुर्दशी तक 14 तिथि के बाद आखिरी दिन पूर्णिमा होता है. इन पक्षों और तिथियों के आधार पर ही हर हिंदू धर्म के प्रत्‍येक व्रत-त्‍योहार की तारीख निकलती है.

11 दिनों का अंतर बदल देता है तारीखें

अब चूंकि सूर्य और चंद्र वर्ष में 11 दिन का अंतर होता है, इसलिए हर साल सूर्य वर्ष आगे निकल जाता है और चंद्र वर्ष 11 दिन पीछे रह जाता है. फिर तीसरे साल में अधिकमास के 30 दिन से 33 दिन का अंतर समायोजित होता है. यही वजह है कि हर व्रत-त्‍योहार किसी साल 10-15 पहले पड़ जाता है या बाद में आता है. इसलिए दिवाली कभी अक्‍टूबर में तो कभी नवंबर में आती है.

सौर वर्ष वाले त्‍योहार

वहीं मकर संक्रांति, विश्‍वकर्मा जयंती, खरमास, मलमास की गणना सौर वर्ष से होती है, जिसकी तारीख फिक्‍स रहती हैं.  

मकर संक्रांति: हर साल सूर्य 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उसी दिन मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है. हां यदि सूर्य 14 जनवरी की शाम को मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का स्‍नान-दान अगली सुबह 15 जनवरी को किया जाता है और फिर इसी दिन पर्व मनाते हैं.  

विश्‍वकर्मा जयंती: सूर्य 17 सितंबर को कन्‍या राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन विश्‍वकर्मा जयंती मनाई जाती है. इसलिए इसकी तारीख भी तय होती है.

खरमास/मलमास: सूर्य जब गुरु की राशियों धनु और मीन में रहते हैं तो उन महीनों को खरमास या मलमास कहते हैं. इन मास में कोई भी शुभ कार्य नहीं होते हैं. हर साल सूर्य 15 दिसंबर को धनु राशि में और 15 मार्च को मीन में जाते हैं. इसलिए इन दोनों महीनों की तारीख भी तय रहती है.

(Disclaimer- यह जानकारी हिंदू पंचांग और वैदिक काल-गणना पर आधारित है. तिथियों की सटीक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें.)

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About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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