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धनतेरस का पर्व आज 6 नवंबर 2026 को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है. बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है. आज बुधादित्य योग का शुभ संयोग बन रहा है, दूसरी ओर अशुभ विष्कुंभ योग बन रहा है, जो कि पूरे दिन रहेगा. ऐसे में लोग चिंता में हैं कि धनतेरस की पूजा कब और कैसे करें कि इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके. मां लक्ष्मी और कुबेर धन का आशीर्वाद दें और भगवान धन्वंतरि आरोग्य दें.
विष्कुम्भ का मतलब है जहर से भरा घड़ा. ज्योतिष में इस योग को बेहद अशुभ माना गया है और इस योग के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. जबकि धनतेरस के दिन लोग सुख-समृद्धिदायक चीजें खरीदते हैं, नए काम की शुरुआत और निवेश करते हैं, ऐसे में इस अशुभ योग से बचते हुए धनतेरस की पूजा कैसे करें.
इसका जबाव है वृष लग्न. जी हां वृष लग्न स्थिर लग्न होता है, जिसे शुभ कार्यों के लिए बहुत अतिउत्तम माना गया है. वृष लग्न में किए गए स्थिरता देते हैं, लंबे समय तक चलते हैं. बता दें कि आज धनतेरस पर विष्कुम्भ सुबह 05:09 बजे शुरू हो चुका है और अगले दिन 7 नवंबर की सुबह 04:09 बजे तक रहेगा.
ज्योतिषाचार्य राज मिश्रा के अनुसार, शाम को पूजा के लिए 06:01 बजे से 07:56 बजे तक का समय अति शुभ है. इस समय वृष लग्न रहेगा. जो लोग शाम को पूजा न कर पाएं वे रात में धनतेरस पूजा 09:10 बजे से 10:20 बजे तक भी कर सकते हैं.

ज्योतिषविदों का कहना है कि प्रदोष काल में दोष नहीं होता है. इसलिए शाम के समय खरीदारी की जा सकती है और पूजा-पाठ किया जा सकता है. आज प्रदोष काल: शाम 05 बजकर 49 मिनट से रात 08 बजकर 23 मिनट तक है.
दरअसल, विष्कुंभ योग शुरू होने के बाद तीन घड़ी तक इसका प्रभाव अधिक रहता है. इसके बाद वो हल्का पड़ जाता है. चूंकि यह अशुभ योग 6 नवंबर को सुबह 05.09 बजे आरंभ हो हुआ था. इसलिए दिन गुजरने के साथ इसका प्रभाव कम होता जाएगा.
वहीं राहुकाल का झंझट भी शाम को नहीं रहेगा, क्योंकि सुबह 10:47 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 12:10 बजे समाप्त हो चुका है. यानी कि आप शाम को बेहिचक होकर खरीदारी भी कर सकते हैं और धनतेरस की पूजा भी कर सकते हैं.
यदि फिर भी आपके मन में विष्कुम्भ योग को लेकर डर की भावना है तो शाम को भगवान शिव के मंत्रों का जाप कर लें.
(Disclaimer- यह जानकारी पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं, पंचांग और ग्रह-गोचर की व्याख्याओं पर आधारित है. इसमें बताए गए मुहूर्त, योग और राहुकाल का समय स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें, न कि किसी निश्चित परिणाम या भविष्यवाणी के दावे के रूप में. पूजा-पाठ के लिए अपने स्थानीय पुरोहित या पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें.)