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कन्हैयालाल हत्याकांड में आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. हाईकोर्ट ने मामले में आठ आरोपियों की अपीलें खारिज कर दी हैं. इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट की ओर से 12 जनवरी और 13 फरवरी 2024 को आरोप तय करने के दिए गए आदेश भी बरकरार रहेंगे. अब आठों आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 16, 18 और 20 के तहत आरोप कायम रहेंगे. सीजे संजय के. अग्रवाल की खंडपीठ ने यह आदेश दिए. अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर किसी व्यक्ति के दोषी या निर्दोष होने का फैसला नहीं किया जा सकता. साथ ही, साजिश का प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं होना आरोपियों को आरोपमुक्त करने का आधार नहीं बन सकता.
किन आठ आरोपियों की अपीलें खारिज हुईं?
हाईकोर्ट ने जिन आठ आरोपियों की अपीलें खारिज की हैं, उनमें मो. रियाज अत्तारी, मोहम्मद गौस, मोहसीन खान, आसिफ हुसैन और मो. मोहसिन शामिल हैं. इनके अलावा वसीम अली, मोहम्मद जावेद खान और मुस्लिम खान की अपीलें भी खारिज कर दी गई हैं. आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के लिए दिए गए आदेशों को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने इन अपीलों पर सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के आदेशों को बरकरार रखा है. इसका मतलब है कि आठों आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 16, 18 और 20 के तहत मुकदमे में आरोप कायम रहेंगे.
अदालत ने साजिश को लेकर क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि आरोप तय करने के स्तर पर अदालत यह फैसला नहीं करती कि आरोपी दोषी है या निर्दोष. इस स्तर पर मामले में सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों को देखा जाता है. अदालत ने यह भी कहा कि किसी साजिश का प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिलना आरोपियों को आरोपमुक्त करने का आधार नहीं हो सकता. कई बार साजिश से जुड़े तथ्यों को अलग-अलग देखने के बजाय सभी परिस्थितियों के सामूहिक प्रभाव से समझा जा सकता है. यानी किसी साजिश का पता सिर्फ सीधे तौर पर मिले सबूतों से ही नहीं, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों को जोड़कर भी लगाया जा सकता है.
क्या था कन्हैयालाल हत्याकांड का मामला?
यह मामला कन्हैयालाल की हत्या से जुड़ा है. इस मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ UAPA की अलग-अलग धाराओं में आरोप तय किए गए थे. ट्रायल कोर्ट ने 12 जनवरी और 13 फरवरी 2024 को आरोप तय करने के आदेश दिए थे. इन आदेशों को आरोपियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. अब हाईकोर्ट ने उनकी अपीलें खारिज कर दी हैं और ट्रायल कोर्ट के आदेश बरकरार रखे हैं. इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि आठों आरोपियों को दोषी करार दे दिया गया है. हाईकोर्ट ने फिलहाल सिर्फ आरोप तय करने के आदेशों को बरकरार रखा है. दोष और निर्दोष होने का फैसला मुकदमे की सुनवाई के दौरान होगा.