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दिल्ली के न्यायिक अधिकारी अमन शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है. देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले को सुना और न्यायिक अधिकारी की मौत से जुड़े घटनाक्रम को संज्ञान में लेते हुए नोटिस भी जारी किए हैं. साथ ही इस पूरे मामले की जांच चाणक्य थाने की क्राइम ब्रांच की जांच रिपोर्ट को भी तलब किया. साथ ही एक सरकारी वकील भी अपॉइंट किया है.
जानकारी के अनुसार, इस मामले की सुनवाई के लिए आज सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया. इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल रहे.
गौरतलब है कि 30 वर्षीय न्यायिक अधिकारी अमन शर्मा की इस साल 2 मई को दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था. हालांकि, इस घटना को लेकर उठे सवालों और परिस्थितियों के मद्देनजर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. शीर्ष अदालत की ओर से स्वतः संज्ञान लिया जाना इस प्रकरण की गंभीरता को दर्शाता है.
न्यायिक अधिकारी अमन शर्मा मूल रूप से राजस्थान के अलवर जिले के खैरथल-तिजारा के मुंडाना गांव के रहने वाले थे. अमन शर्मा की मौत के मामले में उनके परिजनों ने पत्नी और ससुराल पक्ष के कुछ सदस्यों पर मानसिक प्रताड़ना और घरेलू विवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे. अमन के पिता एडवोकेट प्रेम कुमार शर्मा की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग एन्क्लेव थाने में मामला दर्ज किया था.
परिजनों का आरोप था कि अमन पिछले कुछ समय से पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव से गुजर रहे थे. उनके पिता की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 61 (2) (आपराधिक साजिश) के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी.
परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि अमन ने अपनी मौत से पहले पिता को फोन कर अपनी परेशानी जाहिर की थी और बताया था कि वह काफी समय से मानसिक रूप से परेशान हैं. हालांकि, ये सभी आरोप शिकायत और परिजनों के बयानों पर आधारित हैं. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद इस मामले की न्यायिक पड़ताल पर सबकी निगाहें टिकी हैं.
अमन शर्मा ने पुणे स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद 19 जून 2021 को उन्होंने दिल्ली न्यायिक सेवा में अपना कार्यभार संभाला. अपने न्यायिक सेवाकाल के दौरान उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) और सिविल जज के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं. इस दौरान उनके न्यायिक क्षेत्राधिकार में कई आपराधिक और दीवानी मामलों की सुनवाई शामिल रही.
अक्टूबर 2025 से अमन शर्मा उत्तर-पूर्वी दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) में सचिव के पद पर कार्यरत थे. वे कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में अपनी सेवाएं दे रहे थे. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का सचिव पद न्यायिक और विधिक सहायता व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला पद माना जाता है.