)
बागेश्वर धाम के कथा व्यास पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में अब ब्रजमंडल के साधु-संत और धर्माचार्य पूरी एकजुटता के साथ मैदान में उतर आए हैं. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की हालिया बयानबाजी से आक्रोशित संतों ने विरोध किया.
उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है. संतों ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि सनातन और कथा-भागवत के खिलाफ अब किसी भी तरह की बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
'धर्म से दूर रखें ओछी राजनीति'
काशी विद्वत परिषद और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद समेत तमाम प्रमुख धार्मिक संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि सनातन धर्म, कथा-भागवत और ऋषियों की परंपरा के खिलाफ किसी भी तरह की बयानबाजी अब कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. संतों ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मानसिकता को धर्म से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए. जो लोग पहले राम जन्मभूमि और कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दों पर चुप्पी साधे रहे थे, वे आज अचानक धर्म और सनातन की बात कर रहे हैं, जो कि उचित नहीं है.
'आगामी चुनावों में भुगतना पड़ेगा खामियाजा'
संतों ने चेतावनी दी कि सनातन और धार्मिक आयोजनों का विरोध करने वालों को आगामी चुनावों में इसका भारी राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री या अन्य धर्माचार्यों को कथा करने से रोकने की चुनौतियों पर तीखा रोष व्यक्त करते हुए संतों ने कहा कि भारत राम-कृष्ण और ऋषियों का देश है और यहां किसी में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह किसी को कथा, भागवत या सत्संग करने से रोक सके.
'सनातन के खिलाफ अवहेलना सहन नहीं'
उन्होंने कहा कि काशी विद्वत परिषद और अखाड़ा परिषद समेत तमाम संत-धर्माचार्य एकजुट हो चुके हैं. अब पूरे देश में यह आवाज उठाई जाएगी कि सनातन के खिलाफ किसी भी प्रकार की अवहेलना सहन नहीं की जाएगी. इस पर सख्त एक्शन लिया जाएगा. अंत में संतों ने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति कृष्ण जन्मभूमि, सनातन धर्म और ऋषि-संत मुनियों के हितों की बात करेगा, केवल वही उनका अपना माना जाएगा.