राजस्थान पंचायत चुनाव: जाति और गोत्र तक पहुंची चुनावी जंग, किसका बिगड़ेगा समीकरण?
राजस्थान में पंचायती राज चुनावों के बीच गांवों में जातिवाद का मुद्दा हावी होता नजर आ रहा है. पंच-सरपंच से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों तक मतदाता जाति के आधार पर उम्मीदवारों के समर्थन में लामबंद हो रहे हैं. बड़ी जातियों के बीच टिकट और वोटों की खींचतान से छोटे समुदायों के प्रत्याशी भी चुनावी समीकरण बिगाड़ रहे हैं.
पंचायत राज चुनाव में जातिवाद की लहर खूब चल रही है. पंच-सरपंचों से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद में जातियां अपने स्वजाति उम्मीदवारों के पीछे लामबंद हो रही हैं, जिन गांवों में जिस जाति का बोलबाला है, उसके उम्मीदवारों की तादाद भी ज्यादा है. ऐसे में कम संख्या वाली जातियों के प्रत्याशियों ने कई जगह बड़ी जातियों वाले प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं.
गांवों में पंच-सरपंच चुनाव का शोर
गांवों में पंच-सरपंच के चुनाव का हर तरफ शोर है. उम्मीदवारों का रोड शो गांव की गलियों से लेकर ढाणियों की पगडंडियों तक पहुंच रहा है. उम्मीदवार शक्ति प्रदर्शन कर खुद को जीत की रेस में बनाए रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं. जयपुर के मुंडिया रामसर गांव में एक प्रत्याशी का रोड शो निकल रहा है, डीजे की धुन है, तो दूसरी तरफ युवाओं के थिरकते कदम लाउडस्पीकर के शोर के बीच असली मुद्दे गौण हैं. जातिवाद ही असली मुद्दा है गांव में जाट, यादव, ब्राह्रम्ण, चारण उम्मीदवार मैदान में हैं. जाट प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा है, इसलिए दूसरी जातियों के मतदाता यहां किंगमेकर की भूमिका में है.
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विकास के मुद्दे पीछे, जातिगत पहचान पर जोर
वोट से पहले मतदाता उम्मीदवार की जात ही पूछ रहे हैं. गांव में विकास का मुद्दा गायब .है मतदाताओं में जाति प्रेम हर जगह नजर आ रहा है. कई जगह उम्मीदवार का दूसरी जातियों से जुड़ाव और मजबूत नेटवर्क जाति बंधन भी तोड़ रहा है, जिन जातियों का गांवों में दबदबा है, उसके प्रत्याशियों की तादाद भी अच्छी खासी है.
सभी समुदायों को साधने की कोशिश
ऐसे में बड़ी जातियों के वोटर भ्रम की स्थिति में है कि किसे गले लगायें और किससे किनारा करें. बस माहौल किसके पक्ष में बन रहा है, इसी बात पर पैनी नजर रखी जा रही है. बड़ी जाति के साथ दूसरी जातियों के वोटर जिस उम्मीदवार ने साध लिए, उसकी जीत पक्की मानी जा रही है इसलिए दिखावे के तौर पर ही सही चुनाव प्रचार के दौरान हर जाति के लोगों को साथ रखा जा रहा है, ताकि संदेश यही जाए कि ये उम्मीदवार 'छत्तीस कौम का चहेता है.'
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जाति और गोत्र तक पहुंची चुनावी जंग
प्रत्याशी की चुनावी शोर में जाति का दबदबा हर जगह दिखाई पड़ रहा है लेकिन वर्चस्व की लड़ाई बड़ी जातियों में आपसी टकराव का कारण भी बन रही है. हालात यह हैं कि चुनावी जंग जातियों से लेकर गोत्रों तक पर जा पहुंची है. ऐसे में कई जगह गांवों में भाईचारा दांव पर है, चुनावों में उपजी कटुता गांव के शांति सद्भाव को नजर न लगा दे. इसका सभी को ध्यान रखना होगा.