Nagaur News: राजस्थान के नागौर जिले की नौ निकायों के चुनाव नतीजे आने के बाद सियासत पूरी तरह से गर्मा गई है. हालांकि कई निकायों में भाजपा तो कई निकायों में कांग्रेस तो की में निर्दलीय ने बाजी मारी है. वहीं, बात हम नागौर नगरपरिषद की करें तो यहां 60 वार्डो में आज मतगणना हुई, जिसमें 21 में भाजपा ने ,23 पर निर्दलीय ,15 पर कांग्रेस तो एक पर रालोपा ने बाजी मारी है.
वहीं, नागौर में निर्दलीयों ने भाजपा को पछाड़ते हुए 23 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है. नागौर में इस बार कई बड़े चेहरों को भी हार का सामना करना, जिसमें वार्ड नंबर 7 से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामनिवास सांखला तो वार्ड 15 से दो पूर्व सभापति मीतू बोथरा और नीतू तोलावत को भी हार का सामना करना पड़ा. वहीं, वार्ड नंबर 42 से भी भाजपा की जिला महामंत्री कमलेश चौधरी भी तीसरे स्थान पर रही. अब नागौर नगरपरिषद में भाजपा या कांग्रेस को बोर्ड बनाना होगा तो निर्दलीयो के उपर दांव खेलना होगा.
भाजपा की ओर से सभापति के लिए सबसे मजबूत चेहरा संतोष टाक
नागौर में 60 वार्डो में हुई मतगणना के बाद भाजपा ने 21 वार्डो में जीत हासिल की है. वहीं, भाजपा की और से वार्ड 33 से संतोष टाक जो अभी की स्थिति में सभापति की दौड़ में सबसे आगे और मजबूत चेहरा है. भाजपा संतोष टाक को अपना सभापति के लिए प्रत्याशी घोषित कर सकती है.
कांग्रेस भी सभापति के लिए युवा चेहरा दीपक सैनी पर खेल सकती है अपना दांव
नागौर नगरपरिषद में कांग्रेस को 15 सीटें मिलने के साथ ही अब निर्दलीय जीते हुए पार्षदों को अपनी और खींचने में लगी हुई है. वहीं, कांग्रेस इस बार युवा चेहरा पर अपना सभापति का दांव खेल सकती है, जिसमें कांग्रेस के दीपक सैनी वार्ड नं 39 से जीत हासिल की है और अभी कांग्रेस की और से सभापति की दौड़ में सबसे मजबूत चेहरा माना जा रहा है.कांग्रेस सभापति के लिए युवा चेहरा दीपक सैनी पर अपना दांव खेल सकती है.
हालांकि नागौर नगरपरिषद में अब किसकी सरकार बनती है ये तो निर्दलीय पार्षद ही तय करेंगे की निर्दलीय पार्षदो का बड़ा खेमा किसकी और जाता है और किसको अपना सभापति चुनता है. फिल्हाल भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां नागौर नगरपरिषद में अपना अपना बोर्ड बनाने के दावे कर रही हैं.
नागौर नगर परिषद के चुनाव परिणामों ने आगामी बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं. निर्दलीय पार्षदों की संख्या दोनों प्रमुख दलों के लिए अहम हो गई है. ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधने की कोशिश कर सकती हैं. सभापति पद को लेकर भी पार्टी स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में निर्दलीय पार्षदों के रुख से बोर्ड गठन की तस्वीर साफ होगी. दोनों दल अपने-अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट रखने के साथ ही बहुमत जुटाने की कवायद में जुट गए हैं.
Report- Damodar Inaniya