Nagaur Nikay Chunav 2026: नागौर में सभापति की कुर्सी का खेल शुरू! 41 पार्षदों की बाड़ेबंदी
नागौर नगर परिषद चुनाव के मतदान के बाद सभापति पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. संभावित क्रॉस वोटिंग और जोड़-तोड़ से बचने के लिए भाजपा ने करीब 41 पार्षद प्रतिनिधियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है. इन्हें बस और निजी वाहनों से सुरक्षित स्थानों के लिए रवाना किया गया है.
Nagaur Nikay Chunav 2026: नागौर नगर परिषद के निकाय चुनाव का मतदान पूरा होने के बाद अब सभापति पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. संभावित जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए भाजपा ने अपने पार्षद उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है. पार्टी ने करीब 41 पार्षद प्रतिनिधियों को सुरक्षित स्थान के लिए रवाना किया है.
जानकारी के अनुसार, करीब 22 पार्षद प्रतिनिधियों के पहले गुट को देर रात रवाना किया गया, जबकि दूसरा गुट 19 पार्षद प्रतिनिधियों का दोपहर करीब 3 बजे भाजपा कार्यालय से बस और निजी वाहनों के जरिए रवाना हुआ. पार्षदों की रवानगी के दौरान भाजपा कार्यालय परिसर में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही.
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुई रवानगी
बाड़ेबंदी के दौरान भाजपा संगठन के कई पदाधिकारी और स्थानीय नेता पार्टी कार्यालय में मौजूद रहे. नेताओं ने पार्षद प्रतिनिधियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और सभी को एक साथ रहने के निर्देश दिए गए.
पार्टी की कोशिश है कि परिणाम आने तक पार्षद प्रतिनिधियों को राजनीतिक दबाव और दूसरी पार्टियों की संभावित सेंधमारी से दूर रखा जाए. सभापति पद के लिए होने वाली आगे की प्रक्रिया को देखते हुए भाजपा ने इसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना है.
महिला पार्षदों के साथ पति और रिश्तेदार भी रवाना
बाड़ेबंदी की खास बात यह रही कि महिला पार्षद प्रतिनिधियों के साथ उनके पति और अन्य रिश्तेदार भी रवाना हुए. बस और निजी वाहनों से जाते समय पार्टी कार्यालय में काफी गहमागहमी और उत्साह का माहौल नजर आया.
कहां रखे जाएंगे, अभी तस्वीर साफ नहीं?
पार्षद प्रतिनिधियों को पुष्कर, जयपुर, पाली या गुजरात बॉर्डर के आसपास स्थित किसी रिजॉर्ट में ठहराए जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं. हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक उनके ठहरने की आधिकारिक जगह की पुष्टि नहीं की गई है.
14 सितंबर को खुलेगा ईवीएम से भाग्य का पिटारा
नागौर नगर परिषद चुनाव के परिणाम 14 सितंबर को घोषित होंगे. इसी दिन ईवीएम खुलने के साथ पार्षद उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा. परिणाम के बाद सभापति पद को लेकर राजनीतिक समीकरण और ज्यादा स्पष्ट होने की उम्मीद है. निकाय चुनाव के बाद अब असली सियासी मुकाबला सभापति की कुर्सी को लेकर माना जा रहा है. ऐसे में भाजपा की ओर से की गई यह बाड़ेबंदी क्रॉस वोटिंग और संभावित राजनीतिक जोड़-तोड़ को रोकने की रणनीति के तौर पर देखी जा रही है.
बता दें कि राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में पहले चरण का मतदान पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 11 सितंबर को होगी.14 सितंबर को मतगणना के बाद नगर निकायों में बोर्ड गठन और मेयर-सभापति की कुर्सी को लेकर सियासी तस्वीर साफ होगी. मतदान के बाद कई जगहों पर संभावित जोड़तोड़ और क्रॉस वोटिंग को लेकर पार्टियों ने अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है.
Report- Damodar Inaniya