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समंदर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े में 8 'नेक्स्ट जनरेशन कॉरवेट्स' (NGCs) को शामिल करने जा रही है. ये कॉरवेट्स स्टील्थ तकनीक से बनाए जाएंगे, जिसके चलते दुश्मन के रडार इन्हें आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे और वे अचानक किसी भी मोर्चे पर पहुंचकर तबाही मचा सकेंगे. पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने 40 हजार करोड़ रुपये रुपये से अधिक की इस अहम परियोजना को मंजूरी दे दी है.
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इन नेक्स्ट जनरेशन कॉरवेट्स' का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स कोलकाता और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड मिलकर करेंगी. आने वाले दिनों में इसके लिए दोनों संस्थाओं में समझौता होने की उम्मीद है. इन 8 में से पहला युद्धपोत वर्ष 2030 तक नौसेना को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, ये भी कोशिश है कि शिपयार्ड में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को अपग्रेड करके यह डिलीवरी तय समय से पहले कर दी जाए.
लगभग 2,000 टन वजन और करीब 30 समुद्री मील (knots) की गति क्षमता वाले ये कॉरवेट्स कई तरह के समुद्री अभियानों के लिए डिजाइन किए जाएंगे. इनमें निगरानी मिशन, एस्कॉर्ट (संरक्षण) संचालन, निवारक (deterrence) कार्यवाई, सरफेस एक्शन ग्रुप (SAG) ऑपरेशन, खोज और हमला मिशन, तथा तटीय रक्षा शामिल हैं.
ये कॉरवेट्स बहुउद्देश्यीय होंगे. नौसेना में इन युद्धपोतों के शामिल होने से उसकी समुद्री निगरानी और उभरती चुनौतियों का जवाब देने की क्षमता बढ़ जाएगी. अपनी जरूरत के अनुसार नौसेना इन युद्धपोतों का अलग-अलग इस्तेमाल कर सकेगी.
करीब 2,000 टन वजन वाले ये युद्धपोत पानी में लगभग 30 समुद्री मील (knots) प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ सकेंगे. इन कॉरवेट्स के जरिए निगरानी, एस्कॉर्ट, दुश्मन के खिलाफ एक्शन, पानी की सतह पर एक्शन, खोज- हमला मिशन और तटीय रक्षा जैसे काम किए जा सकेंगे. शामिल हैं.
नौसेना में कई प्रकार के युद्धपोत होते हैं, जिनमें विमान वाहक एयरक्राफ्ट कैरियर, डेस्ट्रॉयर और 'कॉरवेट' शामिल होते हैं. इनमें 'कॉरवेट' छोटे, तेज और बेहद घातक युद्धपोत माने जाते हैं. वे आकार में 'डेस्ट्रॉयर' या 'फ्रिगेट' से छोटे लेकिन गश्ती नौकाओं से काफी बड़े और शक्तिशाली होते हैं.
अब भारतीय नौसेना जिन 8 'कॉरवेट' को बनाने जा रही है, वे अगली पीढ़ी की तकनीकों से लैस बहुउद्देश्यीय स्टील्थ युद्धपोत होंगे. स्टील्थ डिजाइन होने की वजह से दुश्मन के रडार पर इन्हें आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता.
ये युद्धपोत समंदर में तैरती किलर मशीन की तरह होंगे. इन युद्धपोतों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, वर्टिकल लॉन्च एंटी-एयर मिसाइलों, अत्याधुनिक रडार और पनडुब्बी-रोधी सोनार प्रणाली जैसी घातक हथियार प्रणाली लगी होंगी.
इन 'कॉरवेट' पर ALH ध्रुव या MH-60R सीहॉक जैसे मल्टीरोल हेलीकॉप्टर्स को अपने डेक पर लैंड कराने और संचालित करने के लिए हेलीपोर्ट भी होगा. जिससे बीच समुद्र में हेलीकॉप्टर के जरिए दूर तक रेकी कर ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सकेगा.
असल में भारतीय नौसेना के कोरा क्लास और खुकरी क्लास के मौजूदा कॉरवेट्स अब पुराने हो रहे हैं. ऐसे में आधुनिक सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप नए युद्धपोत शामिल करना जरूरी हो गया है. दूसरी बात ये है कि भारत की लगभग 7,516 किमी लंबी तटरेखा और विशाल 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' है. जिसकी सुरक्षा के लिए लगातार गश्त और निगरानी जरूरी है.
चूंकि, एयरक्राफ्ट कैरियर या फ्रिगेट जैसे बड़े युद्धपोतों से निगरानी या हर छोटे ऑपरेशन के लिए तैनात करना खर्चीला होता है. ऐसे में छोटे आकार वाले NGCs कॉरवेट्स इस रोल में एकदम फिट बैठेंगे. कम खर्च में बनने वाले इन युद्धपोतों से गश्त करना काफी सस्ता और तेज हो जाएगा. जिससे दुश्मन पर बढ़त बनाने में भारतीय नौसेना को मदद मिलेगी.
समंदर में चीन और पाकिस्तान से भारत के खिलाफ खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. चीन लगातार अपनी पनडुब्बियों को हिंद महासागर में लगातार भेज रहा है. ऐसे में भारत अपने स्टील्थ तकनीक और पनडुब्बी रोधी क्षमता वाले नए कॉरवेट्स को मलक्का स्ट्रेट के आसपास तैनात करके उन्हें आसानी से ट्रैक और न्यूट्रलाइज कर सकता है. चीन से आठ नई हंगोर-क्लास पनडुब्बियां खरीद रहे पाकिस्तान को भी भारत अपने इस छोटे लेकिन बेहद घातक युद्धपोत से जलसमाधि दे सकता है.
भारत अपने इन नए कॉरवेट्स को हिंद महासागर के विभिन्न वैश्विक समुद्री मार्गों पर तैनात करके चीन को अपना रवैया नरम बनाए रखने के लिए मजबूर कर सकेगा. इसके साथ ही कराची पोर्ट और मकरान तट के आसपास इन युद्धपोतों को तैनात करके वह जब चाहे, पाकिस्तान की नकेल कस सकेगा. इन युद्धपोतों की मौजूदगी के चलते पाकिस्तान चाहकर भी अपने युद्धपोत और पनडुब्बी को बाहर नहीं निकाल पाएगा और अपने बंदरगाहों में दुबका रहने को मजबूर होगा.
अगर चीन या पाकिस्तान से समंदर में जंग छिड़ती है तो ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस होने की वजह से ये युद्धपोत चीन के बड़े से बड़े जहाजों पर लंबी दूरी से सटीक हमला कर सकते हैं. इसके साथ ही, सर क्रीक जैसे कम गहराई वाले तटीय पानी में तेजी से जाकर सर्जिकल स्ट्राइक या तटीय हमले करके ये दुश्मन के खेमे में तबाही भी मचा सकते हैं.
कुल मिलाकर, नई पीढ़ी के ये कॉरवेट्स भारतीय नौसेना के लिए छोटा पैकेट-बड़ा धमाका साबित होने जा रहे हैं. ये पानी में तैरती ऐसी किलर मशीन होंगे, जिन पर आंख उठाने से पहले दुश्मन को कई बार सोचना होगा. इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा मजबूत होगी. इसके साथ ही, वह पूरे हिंद महासागर में नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर पाएगी.