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बिहार विधान परिषद चुनाव में मिली अप्रत्याशित सफलता से उत्साहित तेजस्वी यादव ने चुपके से भूमिहार कार्ड खेलना शुरू किया है. सबसे पहले राष्ट्रीय जनता दल के एक्स हैंडल से विधान परिषद सदस्यों की जाति के बारे में डेटा जारी किया, जिसमें सर्वाधिक संख्या भूमिहारों की है. अब तेजस्वी यादव की ओर से नीरज कुमार पर निशाना साधा गया है. हालांकि, भूमिहार कार्ड खेलते हुए तेजस्वी यादव भूल गए कि नीरज कुमार भी एक भूमिहार हैं. खैर, तेजस्वी यादव ने कहा कि जब अनंत सिंह उनकी पार्टी में थे, तब नीरज कुमार चुप क्यों थे? अब अपने हित के लिए वे अनंत सिंह को जेल भेजने में लगे हैं.
विधान परिषद में राष्ट्रीय जनता दल के 4 भूमिहार पार्षद हैं और यह किसी भी जाति के पार्षदों की तुलना में सबसे अधिक है. यहां तक कि राष्ट्रीय जनता दल के कोर वोटर यादव और मुसलमानों की अलग-अलग संख्या से भी ज्यादा है. राजद के विधान परिषद में 3 मुसलमान और 3 यादव पार्षद हैं. 2 ब्राह्मण और इतने ही राजपूत पार्षद हैं. एक पार्षद अनुसूचित जाति का, एक अति पिछड़ा और एक वैश्य है.
बिहार विधानपरिषद में राजद से MLC:- 4 भूमिहार 3 मुस्लिम 3 यादव 2 ब्राह्मण 2 राजपूत 1 अनुसूचित जाति 1 अतिपिछड़ा 1 वैश्य (ओबीसी) कुल विधान पार्षद में राजद ने सभी जातियों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। हमारे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री तेजस्वी यादव जी लगातार A टू Z की बात कर सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने में प्रयासरत हैं। विधानसभा चुनाव में बेईमानी नहीं होती और अगर हमारी सरकार होती तो सबकी और अधिक हिस्सेदारी होती। आपको सनद रहे कि आदरणीय श्री लालू प्रसाद जी की सरकार में सबसे अधिक मंत्री सवर्ण, मुस्लिम, अतिपिछड़ा और अनुसूचित जाति से होते थे। पिछड़ा में सबसे अधिक कुशवाहा जाति से मंत्री थे। उनके बाद कभी भी मंत्रियों की वह संख्या नहीं रही। जय समाजवाद, जय राजद।
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) October 30, 2026
राष्ट्रीय जनता दल की ओर से किए गए पोस्ट में कहा गया है कि कुल विधान पार्षद में राजद ने सभी जातियों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है. हमारे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव जी लगातार A टू Z की बात कर सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं. विधानसभा चुनाव में बेईमानी नहीं होती और अगर हमारी सरकार होती तो सबकी और अधिक हिस्सेदारी होती.
पोस्ट में यह भी कहा गया है कि लालू प्रसाद जी की सरकार में सबसे अधिक मंत्री सवर्ण, मुस्लिम, अति पिछड़ा और अनुसूचित जाति से होते थे. पिछड़ा में सबसे अधिक कुशवाहा जाति से मंत्री थे. उनके बाद कभी भी मंत्रियों की वह संख्या नहीं रही.
पार्टी की ओर से किए गए पोस्ट से जाहिर होता है कि राष्ट्रीय जनता दल मुसलमानों और यादवों की पार्टी के ठप्पे से बाहर निकलना चाहती है. वह बाकी दलों की बात करने लगी है. राष्ट्रीय जनता दल को इस बात का अहसास हो चुका है कि जब तक वह केवल मुसलमान और यादव वोटों के सहारे रहेगी, सत्ता से दूर रहेगी. अपने माय समीकरण में जब तक वह किसी दूसरी जाति को नहीं जोड़ेगी, सत्ता उसके साथ नहीं आने वाली है.
पटना शिक्षक निर्वाचन सीट से डॉ. संजीव की जीत से राष्ट्रीय जनता दल उत्साहित है और उससे पहले बांकीपुर में भूमिहार मतदाता भारतीय जनता पार्टी से छिटकते दिखे. इसलिए लगता है कि तेजस्वी यादव ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अनंत सिंह के जख्मों पर आंशिक रूप से मरहम लगाने की कोशिश की है. इसलिए, राजद की ओर से विधान पार्षदों की जो सूची जारी की गई है, उसमें भूमिहार जाति को सबसे आगे लिखा गया है.
भूमिहार को ही क्यों चुना गया? इसका जवाब यह है कि पार्टी की ओर से लंबे समय से कोइरी जाति को आकर्षित करने की कोशिश की जाती रही, लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं हुआ. अब कोइरी जाति से सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन गए हैं, तो वह किसी और दल के प्रति क्यों आकर्षित होगा? इसलिए सवर्णों में सबसे प्रभावशाली भूमिहार जाति को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है.