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चुपके से 'भूमिहार कार्ड' खेल रहे तेजस्वी, पहले अपनी सभी MLC की जाति का डेटा दिया और अब अनंत सिंह के लिए सॉफ्ट कॉर्नर

तेजस्वी यादव के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल प्रशांत किशोर पेश करने वाले हैं. अब वे विधानसभा पहुंच गए हैं. उनकी पार्टी के एक सदस्य विधान परिषद में भी एंट्री कर चुके हैं. जाहिर है कि प्रशांत किशोर जैसा मुखर एक ही विधायक या विधान पार्षद सत्तापक्ष या नेता विपक्ष की नींद हराम कर सकता है.

चुपके से 'भूमिहार कार्ड' खेल रहे तेजस्वी, पहले अपनी सभी MLC की जाति का डेटा दिया और अब अनंत सिंह के लिए सॉफ्ट कॉर्नर
Image Credit: राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव (File Photo)

बिहार विधान परिषद चुनाव में मिली अप्रत्याशित सफलता से उत्साहित तेजस्वी यादव ने चुपके से भूमिहार कार्ड खेलना शुरू किया है. सबसे पहले राष्ट्रीय जनता दल के एक्स हैंडल से विधान परिषद सदस्यों की जाति के बारे में डेटा जारी किया, जिसमें सर्वाधिक संख्या भूमिहारों की है. अब तेजस्वी यादव की ओर से नीरज कुमार पर निशाना साधा गया है. हालांकि, भूमिहार कार्ड खेलते हुए तेजस्वी यादव भूल गए कि नीरज कुमार भी एक भूमिहार हैं. खैर, तेजस्वी यादव ने कहा कि जब अनंत सिंह उनकी पार्टी में थे, तब नीरज कुमार चुप क्यों थे? अब अपने हित के लिए वे अनंत सिंह को जेल भेजने में लगे हैं.

विधान परिषद में राष्ट्रीय जनता दल के 4 भूमिहार पार्षद हैं और यह किसी भी जाति के पार्षदों की तुलना में सबसे अधिक है. यहां तक कि राष्ट्रीय जनता दल के कोर वोटर यादव और मुसलमानों की अलग-अलग संख्या से भी ज्यादा है. राजद के विधान परिषद में 3 मुसलमान और 3 यादव पार्षद हैं. 2 ब्राह्मण और इतने ही राजपूत पार्षद हैं. एक पार्षद अनुसूचित जाति का, एक अति पिछड़ा और एक वैश्य है.

राष्ट्रीय जनता दल की ओर से किए गए पोस्ट में कहा गया है कि कुल विधान पार्षद में राजद ने सभी जातियों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है. हमारे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव जी लगातार A टू Z की बात कर सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं. विधानसभा चुनाव में बेईमानी नहीं होती और अगर हमारी सरकार होती तो सबकी और अधिक हिस्सेदारी होती.

पोस्ट में यह भी कहा गया है कि लालू प्रसाद जी की सरकार में सबसे अधिक मंत्री सवर्ण, मुस्लिम, अति पिछड़ा और अनुसूचित जाति से होते थे. पिछड़ा में सबसे अधिक कुशवाहा जाति से मंत्री थे. उनके बाद कभी भी मंत्रियों की वह संख्या नहीं रही.

पार्टी की ओर से किए गए पोस्ट से जाहिर होता है कि राष्ट्रीय जनता दल मुसलमानों और यादवों की पार्टी के ठप्पे से बाहर निकलना चाहती है. वह बाकी दलों की बात करने लगी है. राष्ट्रीय जनता दल को इस बात का अहसास हो चुका है कि जब तक वह केवल मुसलमान और यादव वोटों के सहारे रहेगी, सत्ता से दूर रहेगी. अपने माय समीकरण में जब तक वह किसी दूसरी जाति को नहीं जोड़ेगी, सत्ता उसके साथ नहीं आने वाली है.

पटना शिक्षक निर्वाचन सीट से डॉ. संजीव की जीत से राष्ट्रीय जनता दल उत्साहित है और उससे पहले बांकीपुर में भूमिहार मतदाता भारतीय जनता पार्टी से छिटकते दिखे. इसलिए लगता है कि तेजस्वी यादव ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अनंत सिंह के जख्मों पर आंशिक रूप से मरहम लगाने की कोशिश की है. इसलिए, राजद की ओर से विधान पार्षदों की जो सूची जारी की गई है, उसमें भूमिहार जाति को सबसे आगे लिखा गया है.

भूमिहार को ही क्यों चुना गया? इसका जवाब यह है कि पार्टी की ओर से लंबे समय से कोइरी जाति को आकर्षित करने की कोशिश की जाती रही, लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं हुआ. अब कोइरी जाति से सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन गए हैं, तो वह किसी और दल के प्रति क्यों आकर्षित होगा? इसलिए सवर्णों में सबसे प्रभावशाली भूमिहार जाति को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है.

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About the Author

Sunil Mishra

Sunil Mishra

इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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