पूरी तरह से ऑटोमैटिक युद्धक पोत INS समर्थक के आने से भारतीय नेवी की ताकत काफी बढ़ जाएगी. इस जहाज का इस्तेमाल समंदर की निगरानी के अलावा आपदा राहत अभियानों के वक्त भी किया जा सकता है. यह युद्धपोत पूरी तरह से स्वदेश में निर्मित हुआ है.
हिंद महासागर से लेकर अरब सागर और बंगाल खाड़ी समेत आस-पास के पूरे क्षेत्र में दबदबा बनाए रखने के लिए भारत बहुत जल्द कुछ और कलवरी-क्लास पनडुब्बियां बनाने की तैयारी में है. करीब 33,000 करोड़ के इस प्रस्तावित सबमरीन प्रोजेक्ट से भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बी क्षमता में इजाफा होने के साथ उसे दुश्मनों का खात्मा करने में भी आसानी होगी.
INS मंगरोल को आज नेवी में शामिल किया जाएगा. यह भारत का तीसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है. यह पनडुब्बी से जुड़े खतरों का पता लगाने में माहिर है.