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Indian Navy submarines: नौसेना की सामरिक ताकत में जल्द ही बड़ा इजाफा करने की तैयारी है. दुश्मनों पर काल बनकर टूटने वाली इंडियन नेवी की ताकत बढ़ाने के लिए तीन और कलवरी क्लास सबमरीन बनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. दरअसल भारत सरकार नेवी की पारंपरिक सबमरीन पावर को बढ़ाने के लिए तीन अतिरिक्त कलवरी-क्लास पनडुब्बियों के निर्माण के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. इन पनडुब्बियों का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में होगा.
भारतीय नौसेना को मिलने जा रही ये खुशखबरी का पार्टनर और गवाह फ्रांस हो सकता है, क्योंकि इन पनडुब्बियों का निर्माण फ्रांस के नेवल ग्रुप के सहयोग से किए जाने का प्रस्ताव है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 33,000 करोड़ रुपये हो सकती है. इसका उद्देश्य पुरानी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की जगह नई पनडुब्बियां शामिल करके नौसेना की समंदर के अंदर ऑपरेशनल क्षमता बरकरार रखना है.
दुश्मनों से निपटने के लिए नौसेना समंदर के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना चुकी है. भारतीय नौसेना का ये दांव इतना सटीक है कि हिंद महासागार से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक किसी भी बड़ी चुनौतियों से पार पाने में कारगर साबित हो सकता है. आपको बताते चलें भारत पहले ही अपने Project 75 के तहत छह कलवरी-क्लास पनडुब्बियां बना चुका है, जिनमें INS वाघशीर इस सीरीज की छठी पनडुब्बी है. भारतीय नौसेना के बेड़े में 20-21 घातक पनडुब्बियां पहले से मौजूद हैं. नई सबमरीन के जरिए नेवी की ताकत को नई धार देने की तैयारी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेवी के पास जो सबमरीन का बेड़ा है, उसमें 17 डीजल पॉवर्ड अटैकिंग सबमरीन हैं. वहीं कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड एडवांस बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां भारत के पास पहले से मौजूद हैं.
वहीं, भारत ने एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ले रखी है. इसके अलावा भारत के पास कुछ छोटी सबमरीन भी हैं. भारत की सैन्य तैयारियों को लेकर आई रिपोर्ट के मुताबिक अगले कुछ सालों में भारतीय नौसेना का बेड़ा 200 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों, 350 नौसैनिक विमानों और हेलीकॉप्टरों तक बढ़ाने की योजना पर काम हो रहा है.
हालांकि अभी इस प्रोजेक्ट की तैयारियां शुरुआती चरण में है. लेकिन अगर फ्रांस के सहयोग से नई सबमरीन बनाने का फैसला परवान चढ़ा तो नौसेना को बूस्टर डोज देने के लिए उठाया गया ये कदम मास्टर स्ट्रोक बन सकता है. दरअसल फ्रेंच नेवी दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में से एक है. फ्रेंच नेवी की कोर पावर उसके न्यूक्लियर एनर्जी पावर्ड युद्धपोतों का बेड़ा और वर्ल्ड क्लास सबमरीन हैं. उसके पास विमानवाहक पोत यानी एयरक्राफ्ट कैरियर का मजबूत बेड़ा है.
इससे पहले भारत ने अमेरिका से महंगे फाइटर जेट खरीदने के बजाए फ्रांस के राफेल को अपने बेड़े में शामिल किया था. राफेल की पर्टिकुलर खेब अपनी सीरीज़ में वर्ल्ड क्लास है. रक्षा मंत्रालय ने कुछ राफेल नौसेना के लिए भी खरीदे थे.