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100 साल बाद कान्हा में लौटे जंगली भैंसे: काजीरंगा से 2,220 KM का सफर और 'दूब घास' का कनेक्शन... जानिए क्यों चुना गया MP का कान्हा टाइगर रिजर्व?

Kanha Tiger Reserve: 10 साल बाद कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसे वापस आ गए हैं. मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने 11 अक्टूबर को काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसों को सुपखार रेंज में बने एक बड़े बाड़े में शिफ्ट किया. आइए जानते हैं कि इस पहल के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व को ही क्यों चुना गया.

100 साल बाद कान्हा में लौटे जंगली भैंसे: काजीरंगा से 2,220 KM का सफर और 'दूब घास' का कनेक्शन... जानिए क्यों चुना गया MP का कान्हा टाइगर रिजर्व?
Image Credit: 100 साल बाद कान्हा में लौटे जंगली भैंसे- (Photo Ai)

मध्य प्रदेश के जंगलों में 100 साल बाद फिर से जंगली भैंसों की दहाड़ गूंजेगी.  शिकार और घटते जंगलों की वजह से राज्य से गायब हो चुका यह ताकतवर जानवर अब कान्हा टाइगर रिजर्व में वापस आ गया है. असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से कान्हा तक 2,220 किलोमीटर की लंबी यात्रा के बाद आठ जंगली भैंसों को यहां लाया गया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद उन्हें सुपखार रेंज में बने एक खास बाड़े में छोड़ा.   यह सिर्फ 8 भैंसों की शिफ्टिंग नहीं है, बल्कि अगले तीन सालों में कान्हा में 50 जंगली भैंसों की आबादी बसाने के एक बड़े मिशन की शुरुआत है. सवाल यह उठता है कि देश में कई टाइगर रिजर्व होने के बावजूद कान्हा को ही क्यों चुना गया? और इस पूरे प्रोजेक्ट का 'दूब घास' से क्या कनेक्शन है?

100 साल बाद कान्हा में लौटे जंगली भैंसे
20वीं सदी की शुरुआत तक मध्य प्रदेश और मध्य भारत के घने जंगलों में जंगली भैंसों के बड़े-बड़े झुंड घूमते थे. लेकिन अंधाधुंध शिकार, जंगलों की कटाई और इंसानी दखल की वजह से 1920 के आसपास वे मध्य प्रदेश से पूरी तरह खत्म हो गए. बीते 100 सालों से मध्य भारत में इस प्रजाति को विलुप्त माना जा रहा था. अब, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर 2026 में इनकी वापसी के साथ एक नए दौर की शुरुआत हुई है.

क्यों चुना गया कान्हा टाइगर रिजर्व?
जंगली भैंसों को असम के काजीरंगा से 2,220 किलोमीटर दूर कान्हा लाने का फैसला वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की गहन रिसर्च पर आधारित है. कान्हा के घास के मैदानों में अच्छी क्वालिटी की 'दूब घास' होती है, जो जंगली भैंसों का पसंदीदा भोजन है. कान्हा का सुपखार इलाका साल भर नमी और दलदली स्थिति बनाए रखता है, जो जंगली भैंसों के शरीर का तापमान बनाए रखने और उनके जीवन-चक्र के लिए बहुत जरूरी है. स्टडी में पाया गया है कि जंगली भैंसा लंबी घास को काटता है. जब यह लंबी घास कट जाती है, तो जमीन से ताजी और मुलायम घास उगती है. इससे हिरण की छोटी प्रजातियों को चारा मिलता है और घास का मैदान स्वस्थ रहता है. इसलिए, इस पहल को सिर्फ भैंसों की वापसी के तौर पर नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम की बहाली के तौर पर देखा जा रहा है.

खाद्य श्रृंखला प्राकृतिक रूप से संतुलित रहेगी
कान्हा मुख्य रूप से बाघों का गढ़ है. विशाल जंगली भैंसों की मौजूदगी जंगल की जैव-विविधता को और समृद्ध करेगी, जिससे खाद्य श्रृंखला प्राकृतिक रूप से संतुलित बनी रहेगी.

कान्हा नेशनल पार्क के बारे में
कान्हा नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट जिले में स्थित है. यह लगभग 940 वर्ग किलोमीटर के कुल क्षेत्र में फैला हुआ है. यह रॉयल बंगाल टाइगर, तेंदुए और खासकर बारहसिंगा के संरक्षण के लिए दुनिया भर में मशहूर है. वहीं अब जंगली भैंसों की दहाड़ भी यहां सुनाई देगी.
 

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Ranjana Kahar

Ranjana Kahar

रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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