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टाइगर श्रॉफ केस: क्या होता है डेड लेटर बॉक्स, जहां से उठाए गए हथियार; सिंडिकेट का भंडाफोड़

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हमला मामले में हथियारों की सप्लाई सिंडिकेट का खुलासा हुआ है. हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार डेड लेटर बॉक्स के जरिए हासिल किए गए थे. हथियार सप्लाई मामले में पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 21, 2026, 11:52 AM IST | Updated: Oct 21, 2026, 11:57 AM IST
Image Credit: डेड लेटर बॉक्स से हथियारों की सप्लाई का पर्दाफाश. (फोटो- एआई)
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बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हमला मामले में पुलिस की जांच लगातार जारी है. इस प्रकरण में 3 शूटर्स समेत 7 लोगों की गिरफ्तारी अभी तक हुई है, जिसमें 2 महिलाएं भी शामिल हैं. पुलिस की जांच के दौरान एक बड़ा और अहम खुलासा हुआ है. ये खुलासा हमले में इस्तेमाल हुए हथियारों की सप्लाई के सिंडिकेट्स से जुड़ा हुआ है.

बताया जाता है कि आरोपियों को हथियार पंजाब के अमृतसर से सप्लाई किए गए थे. पुलिस सूत्रों का दावा है कि आरोपियों ने डेड लेटर बॉक्स के जरिए ये हथियार हासिल किए थे. ऐसे में सवाल है कि आखिर 'डेड लेटर बॉक्स' क्या होता है और मुंबई तक हथियार कैसे पहुंचे?

पहले जानिए क्या है डेड लेटर बॉक्स

जांच में पाया गया कि हमले में इस्तेमाल किए जाने वाले हथियर 'डेड लेटर बॉक्स' के जरिए हासिल किए गए. बता दें कि डेड लेटर बॉक्स पहले से तय की गई एक जगह होती है, जहां पर कोई शख्स पहले हथियार छिपाकर रख देता है. इसके बाद यहां पर दूसरा कोई शख्स पहुंचता है और हथियार उठा लेता है.

इस पूरी प्रकिया में केवल जगह के बारे में जानकारी होती है, एक-दूसरे को जो हथियार देते हैं उनकी खबर नहीं होती है. बताया गया कि एक्टर पर किए गए हमले में इस्तेमाल हुए हथियार अमृतसर की एक जगह पर रखे गए थे.

2 महिलाएं समेत 4 गिरफ्तार  

पुलिस ने मंगलवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें दो महिलाएं शामिल हैं. इनकी पहचान कुणाल-सुमित हरियाणा के निवासी तथा राधा-बबीता उत्तर प्रदेश के तौर पर हुई है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इनको गिरफ्तार किया है.

दिल्ली से गिरफ्तार किए गए इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने हथियार का इंतजाम करने और उन्हें पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. आरोप है कि कुणाल और सुमित ने हथियारों का इंतजाम किया और राधा-बबीता मुंबई के दादर गईं, जहां पर शूटर्स को बंदूकें सौंप दीं.  

अनिल पंडित ने दी हथियारों की जानकारी

गौरतलब है कि हथियार किस जगह पर रखें, इसकी जानकारी अनिल पंडित ने दी थी. हालांकि, कुणाल और सुमित को ये नहीं पता था कि आखिर हथियार रखे किसने थे. इस काम के लिए दोनों को 70 से 80 हजार रुपये मिले थे. इन्हीं पैसों से करीब 10,000 से 12,000 उन्होंने दो महिलाओं (बबीता और राधा) को दिए, जिन्होंने ये हथियार मुंबई तक पहुंचाए थे.

कैसे अनिल पंडित और कुणाल की मुलाकात हुई?

पुलिस सूत्रों ने कहा कि कुणाल इसी साल जुलाई के महीने में जेल से बाहर आया था. बताया जाता है कि उसके एक दोस्त ने अनिल पंडित से उसकी जान पहचान कराई. इसी पहचान के बाद से दोनों इंक्रिप्टेड ऐप जरिए संपर्क में रहे. लगभग दो हफ्ते पहले ही अनिल पंडित की ओर से कुणाल को अमृतसर से हथियार उठाकर फिर मुंबई पहुंचाने का टास्क मिला. बाद में कुणाल ने हथियार पहुंचाने के लिए कुरियर के तौर पर अपनी प्रेमिका का इस्तेमाल किया.

चारों आरोपी दिल्ली से हुए गिरफ्तार

गौरतलब है कि स्पेशल सेल की एनडीआर टीम ने कुणाल, सुमित राधा और बबीता को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बीएनएसएस (BNSS) की धारा 35(1)(b) के तहत कलंदरा बनाकर कोर्ट में पेश किया.इसको कोर्ट ने मंजूर कर लिया. बाद में मुंबई पुलिस ने आरोपियों की तीन दिन ट्रांजिट रिमांड मांगी थी, जिसको कोर्ट ने ग्रांट कर दिया.

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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