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जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक मोड़ आ गया, जब श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने संसद की सदस्यता और अपनी अपनी पार्टी 'जम्मू एंड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस' (JKNC) से इस्तीफा देने का एलान कर दिया. उनके इस कदम को JKNC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. पार्टी के 25 विधायक पहले से ही उमर अब्दुल्ला सरकार से नाराज चल रहे हैं. ऐसे में एक सांसद के पार्टी छोड़ देने से बगावत की आग तेज होने की आशंका जताई जा रही है.
आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी पार्टी छोड़ने की घोषणा अपने पिता की 26वीं पुण्यतिथि के मौके पर की. इस मौके पर बडगाम के 'बेहश्त-ए-जहरा पार्क' में बड़ी जनसभा की गई थी, जिसमें आसपास के इलाकों के हजारों लोग जुटे थे. वे उन्हें सुनने और अपना समर्थन देने के लिए वहां आए हुए थे.
JKNC से अपने इस्तीफे का एलान करते हुए आगा रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अपनी विचारधारा और चुनावी वादों से भटक गई है. जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे और अनुच्छेद- 370 और 35ए की बहाली के लिए कोई काम नहीं हो रहा है. जबकि ये पार्टी के कोर मुद्दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा उमर अब्दुल्ला सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है.
बागी हो चुके सांसद मेहदी ने कहा कि जब पार्टी ने अपने कोर मुद्दों को तिलांजलि दे दी हो, तब उससे अलग होने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा था. उन्होंने कहा कि सांसदी और पार्टी छोड़ने के बावजूद वे जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे और राज्य के हक की लड़ाई आखिरी वक्त तक लड़ेंगे.
बताते चलें कि आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के पिता का नाम आगा सैयद मेहदी था. वे जम्मू-कश्मीर के प्रमुख शिया धार्मिक गुरु और वरिष्ठ राजनेता थे. उनकी 3 नवंबर 2000 को एक शक्तिशाली आईईडी ब्लास्ट के जरिए आतंकियों ने हत्या कर दी थी. घटना के वक्त वे बडगाम में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे. इस घटना में उनके पिता समेत कई समर्थकों की मौत हो गई थी.
आगा सैयद मेहदी की मृत्यु के बाद उनके बेटे आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने उनकी राजनीतिक और सामाजिक विरासत को संभाला था. JKNC में शामिल होने के बावजूद कश्मीर घाटी में उनकी अपनी एक हस्ती है. वे घाटी में शिया मुस्लिमों के बड़े नेता माने जाते हैं. उनका युवाओं में एक बड़ा फैन बेस है और उनकी बातों को लोग गंभीरता से सुनते हैं. ऐसे में आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी और संसद की सदस्यता छोड़ना मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए बड़े राजनीतिक संकट का सबब बन सकता है.