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China Export to India: चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. वो कब अपनी बात से पलट जाए, कोई नहीं कह सकता है. पहले सप्लाई चेन बनाकर निर्भरता को बढ़ाना और फिर उसी सप्लाई को रोककर अपनी मनमानी करना चीन की आदत है. रेयर अर्थ पर चीन की मनमर्जी पूरी दुनिया झेल रही है. चीन ने रेयर अर्थ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर अमेरिका जैसे देश को झुकने पर मजबूर कर दिया. अब चीन ऐसा की कुछ अपने 'दैत्यकारी' मशीनों के साथ करने की तैयारी में है.
भारत-चीन के बीच नए ट्रेड वॉर का खतरा
चीन की 5000 टन वाली डिलिंग मशीन भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी है. बुलेट ट्रेन हो या अटल टनल, इन निर्माणों में इस विशाल मशीन की जरूरत पड़ती है, लेकिन चीन अब इन मशीनों को लेकर सख्त नियम बनाकर भारत के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है.
चीन ने क्यों लगाया इन मशीनों पर प्रतिबंध
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने टनल-बोरिंग मशीनों और कुछ खास निर्माण उपकरणों के निर्यात पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है. चीन की सरकार ने ड्यूल-यूज की तरह इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के एक्सपोर्ट पर नियम सख्त कर दिए हैं. इस लिस्ट में हाई-एल्टीट्यूड कंस्ट्रक्शन मशीनें भी शामिल हैं. सिर्फ टनल बोरिंग मशीन की ही बात करें, तो इस मार्केट में चीन की हिस्सेदारी 70 फीसदी की है. इसके बाद अमेरिका और जापान आते हैं. चीन अब इसके निर्यात पर नियमों को सख्त कर रहा है.
चीन की दलील
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक निर्यात पर प्रतिबंध के पीछे चीन की दलील है कि इन मशीनों का इस्तेमाल केवल सड़क और रेलवे बनाने में ही नहीं, बल्कि सैन्य परियोजनाओं में भी हो सकता है. इन मशीनों का इस्तेमाल नागरिकों और सैन्य दोनों ही परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है. जिसकी वजह से इसके लिए सख्त नियम तय किए जा रहे हैं.
भारत क्यों परेशान
चीन के इस फैसले से भारत परेशान है, क्योंकि भारत की इन मशीनों पर अत्यधिक निर्भरता है. इस मशीनों पर भारत की कई निर्माण परियोजनाएं निर्भर है. बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी की एक वजह से TBM मशीन भी रही, जिसे चीन से भारत पहुंचने में काफी वक्त लग गया. इस मशीनों की मदद से मेट्रो, सड़क और रेलवे सुरंगों में बोरिंग का काम किया जाता है. इन मशीनों के निर्यात को रोककर चीन भारत के निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को प्रभावित कर सकता है.
चीन TBM का सबसे बड़ा निर्माता
दुनिया भर में इन मशीनों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक चीन ही है. वहीं भारत सबसे बड़ा उपभोक्ता है. चीन के इन नए प्रतिबंधों से भारत के इंन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को बड़ा झटका लगा सकता है. भारत को दूसरे विकल्प तलाशने में वक्त लग सकता है. जिससे प्रोजेक्ट में और देरी हो सकती है.
सीमा पर भारत की बढ़ती ताकत से डर रहा है चीन
दरअसल भारत अपने सीमावर्ती क्षेत्रों को मजबूत कर रहा है. सीमाओं के करीब तक रेल लाइन, पुल, सुरंग, सड़क मार्ग बनाए जा रहे हैं. इन रास्तों की मदद से सीमा तक पहुंच आसान हो जाएगी, लेकिन चीन के नए निर्यात प्रतिबंध से भारत के इन प्रोजेक्ट को झटका लग सकता है. चीन ने अगर टनल बोरिंग मशीनों या उनके जरूरी पुर्जों की आपूर्ति रोक दी, तो भारत की परेशानी बढ़ जाएगी.