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मुंबई में दीवाली पर पटाखे न जलाने के आह्वान से जुड़ा एक्ट्रेस दीया मिर्जा के वीडियो का मामला तूल पकड़े हुए है. असल में एक्ट्रेस ने यह वीडियो बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के कहने पर बनाया था, जिस पर बीजेपी का शासन है. लेकिन वीडियो पोस्ट होने के बाद बीजेपी नेता अमीत सातम ने इसे हिंदू विरोधी बताते हुए अपनी आपत्ति जता दी. जिसके बाद BMC ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल से हटा लिया था. अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने हटाए गए दीया मिर्जा के वीडियो को फिर से बीएमसी के एक्स हैंडल पर अपलोड करने का निर्देश दिया है. कोर्ट का यह आदेश आने के बाद NCP (शरद पवार गुट) ने सत्तारुढ़ बीजेपी पर धावा बोल दिया है.
शरद पवार के पोते और पार्टी विधायक रोहित पवार ने कहा, 'बॉम्बे हाई कोर्ट ने बहुत ही उचित आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि दीया मिर्जा वाला वह वीडियो, जिसे BMC ने हटा दिया था, उसे फिर से अपलोड किया जाना चाहिए. हमारी आपत्ति अमीत सातम को लेकर है. उन्होंने ही दीया मिर्जा के बयान पर आपत्ति जताई थी.'
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On Bombay HC directing BMC to re-upload Dia Mirza's Diwali firecracker awareness video, NCP-SP MLA Rohit Pawar says, "The Bombay High Court has issued a very sound order. The Bombay High Court has stated that the video featuring Dia Mirza—which the BMC had deleted—should be uploaded. Our objection is directed at Ameet Satam; it was he who raised an objection to Dia Mirza’s statement. If you examine the statements—made by Dia Mirza, Madhuri Dixit, and a cricketer—you will see they are essentially the same, with one version in Marathi and another in Hindi. They convey a message about the environment; what could possibly be wrong with that? Ameet Satam, however, twisted the statement—purely for the sake of politics, and specifically, religion-based politics—to object to Dia Mirza. That is wrong. When the Chief Minister was asked about this, he merely remarked that it was a matter for the Municipal Corporation..."
— ANI (@ANI) November 3, 2026
रोहित पवार ने आगे कहा, 'अगर आप दीया मिर्जा, माधुरी दीक्षित और एक क्रिकेटर के बयानों को देखें, तो पाएंगे कि वे मूल रूप से एक जैसे ही हैं. बस एक मराठी में है और दूसरा हिंदी में. वे पर्यावरण के बारे में एक संदेश देते हैं तो इसमें गलत क्या है? लेकिन अमीत सातम ने सिर्फ राजनीति और खास तौर पर धर्म-आधारित राजनीति करने के लिए इस बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और दीया मिर्जा पर आपत्ति जताई. यह गलत है.'
इस पूरे विवाद पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर भी रोहित पवार ने असंतोष जताया. उन्होंने कहा कि जब इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने केवल यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह पूरी तरह से BMC का मामला है. रोहित ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सरकार के नेतृत्व को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, न कि मामले को टालना चाहिए.
बताते चलें कि दीया मिर्जा का वीडियो BMC के एक्स हैंडल से हटाए जाने के बाद यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया था. कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए महानगरपालिका के एक्शन को गलत बताया था. कोर्ट ने कहा कि यह वीडियो दीवाली के दौरान पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और पटाखों के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से बनाया गया था. अदालत ने आदेश दिया इस वीडियो को बीएमसी अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फिर से अपलोड करे.