SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

'माफी चाहते हैं, लेकिन एक दिन के लिए इंटरनेट बंद करना जरूरी था...', अवमानना नोटिस पर SC में बोले होम सेक्रेटरी

अवमानना नोटिस के जवाब में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में बिना शर्त माफी मांग ली है. लेकिन सरकार ने कहा कि एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट को बंद करना जरूरी था, ताकि कानून-व्यवस्था को भंग करने से रोका जा सके.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 15, 2026, 07:56 AM IST | Updated: Oct 15, 2026, 08:11 AM IST
Image Credit: SC में मोदी सरकार का हलफनामा
Join

अवमानना ​​नोटिस के जवाब में सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने हलफनामे में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बिना शर्त माफी मांगी है. हालांकि, उन्होंने कहा कि रायसीना हिल्स के 4 किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक, यानी एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद करना जरूरी था, ताकि सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने से रोकी और शांति बनाए रखी जा सके.

बुधवार देर रात दाखिल हलफनामे में गृह सचिव ने कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से मोबाइल इंटरनेट सर्विस बंद करने की गुजारिश स्थिति की गंभीरता और दिल्ली में सार्वजनिक व्यवस्था को बिगड़ने से रोकने की जरूरत को देखते हुए एक सही कदम था.'

11 अक्टूबर को, जब दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों को नाकाम कर दिया, उसके एक दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और DMRC के चेयरमैन को अपने पिछले आदेश के उल्लंघन के लिए अवमानना ​​नोटिस जारी किया था.

अवमानना ​​याचिका पर 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से भेजे गए नोटिस के जवाब में, मोहन ने अपने चार पन्नों के हलफनामे में कहा, 'इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का यह कदम केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं तक ही सीमित था. इसमें वाई-फाई और ब्रॉडबैंड जैसी अन्य इंटरनेट या टेलीकम्युनिकेशन सर्विसेज शामिल नहीं थीं.' 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इंटरनेट सर्विसेज बिना किसी रुकावट के काम करनी चाहिए.'

DMRC ने भी दिया था हलफनामा

इससे पहले, 10 अक्टूबर को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद कर दी थी. हालांकि, डीएमआरसी ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो की सेवाओं में कोई कटौती नहीं की गई और न ही ट्रेनों के फेरों की ही संख्या घटाई गई थी. हलफनामे में डीएमआरसी ने बताया कि 10 अक्टूबर को 271 ट्रेनें चलाई गईं और पूरे नेटवर्क में कुल 4,157 फेरे लगाए गए थे. हालांकि 45 में से 14 इंटरचेंज स्टेशनों पर यात्रियों को मेट्रो चेंज करने की सुविधा दी गई थी.

जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल को लेकर आज सुनवाई

इसके अलावा, दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की लिस्ट से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर लंबे समय से राजधानी में विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है. याचिका पर आज सुनवाई हो सकती है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अगर लोगों को विरोध-प्रदर्शन के लिए शहर से दूर स्थित वैकल्पिक जगहों पर भेजा जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाना और विरोध दर्ज कराना मुश्किल हो सकता है. इससे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाने का खतरा है.

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है. पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थलों की पहचान भी की है.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES