जेल में बंद मास्टरमाइंड लॉरेंस, बाहर 'शैडो कैबिनेट' का वायलेंस, कैसे 'कालकोठरी' से चल रहे बिश्नोई के काले खेल?
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई इस समय गुजरात की जेल में बंद है. बावजूद इसके गैंगस्टर का गैंग काम कर रहा है. रविवार को एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद इस संबंध में कई सवाल खड़े हुए. इस बीच आइए आपको बिश्नोई गैंग की 'शैडो कैबिनेट' के बारे में बताते हैं.
रविवार (18 अक्टूबर) को मुंबई में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद एक बार फिर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम चर्चा में आ गया है. टाइगर पर हमला करने की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े गैंगस्टर अनिल पंडित ने ली है. गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई खुद इस समय सलाखों के पीछे है. वह गुजरात की साबरमीत जेल में बंद है, जहां पर उसको एक उच्च स्तरीय सुरक्षा के बीच रखा गया है. इसके बावजूह सवाल है कि उसका गैंग पूरी दुनिया में काम कैसे कर रहा है.
जब भी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आता है, तो सवाल खड़ा होता है कि उसके नेटवर्क को चला कौन रहा है. अब मामले में एक अहम जानकारी सामने आई है. एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि लॉरेंस के कुछ बेहद करीबी गुर्गे इस गैंग को चला रहे हैं. बताया जाता है कि इन गुर्गों ने मिलकर एक शैडो कैबिनेट यानी गुप्ट टीम बना ली है. ये सभी विदेश में छिपे हैं. विदेश की धरती पर बैठकर ही वह अंतरराष्ट्रीय अपराधों को अंजाम दे रहे हैं.
पांच गैंगस्टरों का कोर ग्रुप
टीएआई की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस गैंग का एक मुख्य कोर ग्रुप भी है. इस कोर ग्रुप में कुल पांच लोगों के नाम शामिल हैं. इनमें टायसन बिश्नोई, अनिल पंडित, हैरी बॉक्सर, हरमन संधू और हिमांशु सोनीपत का नाम सामने आता है. बताया गया कि इनका काम भी काफी बंटा हुआ है. ये लोग गैंग में नए लड़कों की भर्ती करते हैं. उनका काम सौंपा जाता है और जरूरी हथियार भी दिए जाते हैं. इसके अलावा सूचनाओं का इस्तेमाल करने के लिए स्क्रीनशॉट का इस्तेमाल किया जाता है.
इस कोर ग्रुप के अलावा एक अन्य ग्रुप भी एक्टिव है, जो लॉरेंस के इशारों पर काम करता है. इस समूह में आरजू बिश्नोई, शुभम लोनकर और रणदीप मलिक शामिल हैं. बताया जाता है कि इस ग्रुप का काम है वारदातों की योजना बनाना और पैसों का इंतजाम करना. इसके अलावा यह ग्रुप तय करता है कि इनका अगला निशाना कौन होगा. गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों भी एक समय में इस ग्रुप का हिस्सा था. वहीं, जब अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने 'ऑपरेशन हार्डबॉल' शुरू किया, जिसके बाद गोल्डी ढिल्लों छिप गया.
इन देशों से चल रहा नेटवर्क
गौरतलब है कि गैंग के सभी कमांडर अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कुछ देशों से अपना नेटवर्क चला रहे हैं. ये लोग डिजिटल तरीके से लोगों को डराते और धमकाते हैं. इसके साथ ही हत्याओं को अंजाम दिलाते हैं. ग्रुप के लिए काम कर रहे स्थानीय गुर्गों को निर्देश या कोई नई जानकारी पहुंचाने के लिए सिग्नल, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे ऐप का इस्तेमाल करते हैं.
वहीं, रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ जैसे पुराने शातिर अभी भी बिश्नोई के ग्रुप के लिए काम कर रहे हैं. जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए उन्होंने एक चाल चली, जिसमें वह दावा करते हैं कि वे लॉरेंस से अलग हो गए हैं. जांचकर्ताओं ने माना की ये बड़े मास्टरमाइंड विदेशों में सुरक्षित जगहों पर बैठे हैं और वहां से गैंग को रणनीति बताते हैं और वित्तीय मदद देते हैं.
अनिल पंडित बना मुख्य चेहरा
इस पूरे गैंग का मुख्य चेहरा या प्रवक्ता इस समय अनिल पंडित बना हुआ है. वह सोशल मीडिया पर गैंग के घोषणापत्र और फिरौती की धमकियां पोस्ट करता है. जानकारी के अनुसार, अनिल पंडित मूल रूप से पानीपत का रहने वाला है. पंजाबी सिंगर सिद्दू मूसेवाला की हत्या के एक साल बाद वह कनाडा चला गया, जहां से अमेरिका पहुंच गया.
इधर, सोनीपत में हरियाणवी गायक दिलेर खर्किया और गैंगस्टर विनोद काना की हत्या की जिम्मेदारी हिमांशु नाम के गुर्गे ने ली थी. इसके साथ ही गैंग के बाकी सदस्यों का काम भी बंटा हुआ है. टायसन नामी हस्तियों को इंटरनेट के जरिए धमकी देने का काम करता है. वहीं, हैरी जमीनी स्तर पर जाकर फिरौती वसूलता है.
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