)
मुंबई की सड़कों पर एक बार फिर 90 के दशक का अंडरवर्ल्ड वाला खौफ लौट आया है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि जुहू जैसे पॉश इलाके में बॉलीवुड के एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ पर दिनदहाड़े तीन हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. गनीमत रही कि टाइगर वक्त रहते झुक गए और उनकी जान बाल-बाल बची. हमले की जिम्मेदारी अमेरिका में बैठे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे अनिल पंडित ने ली है, जिसने इसे सलमान खान से नजदीकी का बदला बताया. वारदात के चंद घंटों के भीतर राजस्थान के कोटा से तीनों शूटर गिरफ्तार कर लिए गए, लेकिन इस दुस्साहस ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री और कानून व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है.
इस घटना के दूसरे दिन भी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ट्रेंड कर रहा है. इसकी वजह ये है कि कल मुंबई में अंडरवर्ल्ड की एक Real पिक्चर रिलीज हुई. इस पिक्चर में एक रियल लाइफ विलेन अंडरवर्ल्ड के बॉक्स ऑफिस पर लॉन्च हुआ, जिसने अपने शूटर्स से बॉलीवुड के हीरो पर गोलियां चलवाईं. उस विलेन का नाम अनिल पंडित है और हीरो टाइगर श्रॉफ हैं. यानी ये एक ऐसी Real पिक्चर है, जिसमें एक तरफ रील लाइफ हीरो है और दूसरी ओर रियल लाइफ विलेन, लेकिन ये पिक्चर बेहद खौफनाक है.
बॉलीवुड के लिए ये खौफनाक इसलिए भी है, क्योंकि टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग शाम के समय हुई. भीड़भाड़ वाले पॉश इलाके जुहू में हुई. पब्लिक के सामने हुई. दिखने में दुबले-पतले तीन शूटर्स ने उन्हें घेरा और फायरिंग शुरू हो गई. एक लड़का तो दोनों हाथों से गोली चला रहा था. अब सोचिए, जब टाइगर श्रॉफ जैसे फिट और पावरफुल स्टार पर खुलेआम अटैक हो सकता है तो आम लोगों का क्या होगा? लोग कानून को सलाम करेंगे या डर के मारे इन गैंगस्टर्स को सलामी ठोकने के लिए मजबूर हो जाएंगे, जो कहते हैं कि उनके पास 70 हजार शूटर्स की फौज है, जो बेखौफ हैं. किसी पर भी और कभी भी हमला करते हैं या हमला करवाते हैं?
आज आपको जानना चाहिए, ये अनिल पंडित कौन है? जिसने ऑडियो जारी कर और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली है. ये अनिल पंडित लॉरेंस बिश्नोई को अपना बड़ा भाई क्यों बता रहा है? और इसका इरादा टाइगर श्रॉफ को मारना था या सिर्फ डराना था?
मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे राकेश मारिया ने अपनी किताब 'Let Me Say It Now' में लिखा है कि, "फिल्म स्टूडियो के अंदर जो चकाचौंध दिखती है उसके पीछे अंडरवर्ल्ड के खौफ का एक ऐसा काला सच है, जिसे बॉलीवुड स्टार रोज जीते हैं." पूर्व IPS राकेश मारिया ने 90 के दशक वाले अंडरवर्ल्ड की व्याख्या करते हुए जो लिखा है, वही डर आज भी दिख रहा है.
मुंबई के सबसे महंगे और पॉश इलाकों में से एक जुहू में एक्टर टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग हुई. तीन शूटर्स ने उन्हें टारगेट करके कार पर फायरिंग की थी, जिसमें टाइगर के कंधे, छाती और दाहिने हाथ पर मामूली चोटें आई हैं. उनका ड्राइवर घायल हुआ है. पुलिस ने फायरिंग करने वाले तीनों शूटरों को आज राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया. तीनों को गिरफ्तार करके राजस्थान पुलिस ने उन्हें मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया. तीनों शूटर्स को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है. सबसे पहले जानिए कि इन तीनों शूटर्स की गिरफ्तारी कैसे हुई?
कल फायरिंग करने के बाद तीनों शूटर्स ने मुंबई के अंधेरी इलाके में अपनी बाइक छोड़ी और ट्रेन पकड़ ली. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से उनका रूट ट्रैक किया. मुंबई पुलिस को इनपुट मिला कि आरोपी पुणे-जयपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में सवार हैं. मुंबई पुलिस ने तुरंत राजस्थान पुलिस और कोटा सिटी के एसपी से संपर्क साधा. ट्रेन आज सुबह करीब सवा दस बजे जैसे ही कोटा स्टेशन पहुंची, पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का दावा है कि ये तीनों नेपाल भागने की फिराक में थे.
जब 90 के दशक में बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का खौफ चरम पर था और बॉलीवुड के तमाम एक्टर-डायरेक्टर खौफ में रहते थे, तब भी टाइगर श्रॉफ के पिता एक्टर जैकी श्रॉफ बेखौफ रहते थे. कहते हैं कि स्टार बनने से पहले वे अपने इलाके में एक लोकल दादा के रूप में जाने जाते थे. अंडरवर्ल्ड के लोग भी जैकी श्रॉफ का अलग तरह से सम्मान करते थे.
लेकिन वक्त और अंडरवर्ल्ड की पहचान बदली, तो आज जैकी श्रॉफ के बेटे टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग हो रही है. कल जिस समय उन पर हमला हुआ, तब वे फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे. जांच में पता चला कि शूटर्स पिछले 20 दिनों से मुंबई में रह रहे थे. शूटरों ने वारदात से पहले टाइगर श्रॉफ की दिनचर्या की रेकी की थी. उन्हें पता था कि टाइगर हर रविवार को जुहू के फुटबॉल ग्राउंड आते हैं. पिछले रविवार को तीनों वहां जाकर देख चुके थे कि टाइगर कैसे आते हैं, कितनी देर रहते हैं और कब निकलते हैं. कल पूरी तैयारी के साथ तीनों शूटर्स दो बाइकों पर सवार होकर आए थे. पुष्पा पार्क के पास करीब 15 से 20 मिनट तक रुककर टाइगर के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे.
जैसे ही टाइगर की गाड़ी ग्राउंड से बाहर निकली, वैसे ही उन पर फायरिंग कर दी. इस हमले के अलग-अलग वीडियोज में साफ दिखता है कि कैसे पहले से घात लगाकर बैठे हमलावरों ने टाइगर को टारगेट किया.
रेहान सिर्फ इसी मकसद से सोनीपत से मुंबई गया था. रेहान के साथ फूल सिंह भी हरियाणा से मुंबई गया था, जबकि तीसरा आरोपी ऋतिक मुंबई में ही रहता था. ये तीनों टाइगर श्रॉफ के फैंस की भीड़ में शामिल थे. ये वहीं इंतजार कर रहे थे, जहां टाइगर के फैंस मौजूद थे. इनकी उम्र 18 से 22 साल के बीच है. यानी हमलावर युवा हैं. इनकी उम्र पढ़ने-लिखने की है, लेकिन ये शूटर बन गए. कोई शक भी नहीं कर सकता था कि ये टाइगर पर फायरिंग कर सकते हैं, लेकिन इन्होंने गोली चला दी. फायरिंग करने वाला एक शख्स दोनों हाथों से गोलियां चला रहा है. आप कई सालों से लिख रहे हैं, लेकिन दोनों हाथों से एक साथ कलम नहीं चला सकते. लेकिन 18 से 22 साल के ये लड़के दोनों हाथों से एक साथ पिस्टल चला रहे हैं. ऐसा लग रहा है, जैसे खिलौनों से खेल रहे हों. समझिए कि ये कितना खतरनाक है.
जिस टाइगर श्रॉफ पर इन शूटर्स ने फायरिंग की है, उन्हें ताइक्वांडो में 5वीं डिग्री ब्लैक बेल्ट से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान दुनिया भर में बहुत कम लोगों को मिलता है. टाइगर सिर्फ 4 साल की उम्र से ही ताइक्वांडो और चीनी मार्शल आर्ट वुशु जैसी विधाओं की कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं. उनकी बॉडी फ्लेक्सिबिलिटी, किक्स और जिम्नास्टिक्स में दक्षता के कारण उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्शल आर्ट्स एक्सपर्ट का दर्जा हासिल है.
टाइगर श्रॉफ की फिल्में देखकर इन शूटर्स को भी अंदाजा होगा कि उनकी ताकत क्या है. फिर भी इन्होंने भीड़ के बीच उन पर फायरिंग कर दी. ये दुस्साहस है. ये इन शूटर्स के बेखौफ होने का सबूत है. ये इस बात का प्रमाण है कि इन्हें किसी से डर नहीं लगता. इन्हें पुलिस-कानून किसी का खौफ नहीं है. ये लोग पब्लिक में, बॉलीवुड में और सिस्टम में ही खौफ पैदा करना चाहते हैं. अगर ये टाइगर श्रॉफ पर इस तरह गोली चला सकते हैं, तो आम लोगों पर भी चला सकते हैं. कभी भी, कहीं भी और किसी पर भी.
जिस तरह हमला हुआ है उसके बाद सवाल ये भी है कि क्या शूटर टाइगर को जान से मारना चाहते थे या सिर्फ उन्हें डराना चाहते थे? क्योंकि जिस गाड़ी में टाइगर सवार थे, वो बुलेटप्रूफ नहीं थी. टाइगर के साथ कोई सिक्योरिटी भी नहीं थी. शूटर्स टाइगर श्रॉफ की धीमी गति से चल रही कार के पास तक आ गए थे. शूटर ने उन्हें 'पॉइंट-ब्लैंक रेंज' में गोली मारने की कोशिश की थी. शूटर ने 5 गोलियां चलाईं. जैसे ही फायरिंग शुरू हुई, टाइगर श्रॉफ नीचे की तरफ झुक गए जिससे उनकी जान बच गई.
इस फायरिंग में लॉरेंस गैंग का एक पैटर्न दिखा है. ये पैटर्न है कम उम्र और नाबालिगों से फायरिंग करवाने का. गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने बहुत ही शातिराना अंदाज में कम उम्र के अपराधियों से फायरिंग करवानी शुरू की है. कई बार तो नाबालिग शूटर्स शामिल होते हैं. यह गैंगस्टरों की रणनीति में एक खतरनाक बदलाव है. पुलिस इसे 'डिस्पोजेबल शूटर मॉडल' भी कहती है.
इन्हें फायरिंग करने के लिए पैसे भी मिल जाते हैं और एक तरह की ठसक भी होती है कि इन्होंने टाइगर श्रॉफ पर असल में गोली चलाई. दोस्तों-साथियों को बता सकें कि हमने तो टाइगर श्रॉफ को गोली मारी है. ये पुलिस के लिए बहुत बड़ी चुनौती है.
ग्लैमर के चक्कर में ही कम उम्र के शूटर लॉरेंस जैसे गैंगस्टरों के हथियार बनते जा रहे हैं और ऐसे एक-दो नहीं हैं. खुद लॉरेंस के गुर्गे अनिल पंडित ने दावा किया है कि उसके पास ऐसे 70 हजार शूटर्स हैं. इन शूटर्स की भर्ती कैसे की जाती है, लॉरेंस ने अपना अपराधलोक कितना बड़ा कर लिया है, ये हम आपको बताएंगे, लेकिन पहले जानिए कि अंडरवर्ल्ड की इस साजिश का असली विलेन अनिल पंडित कौन है?
32 साल का अनिल पंडित मूल रूप से हरियाणा के पानीपत जिले के राय कलां गांव का रहने वाला है. वह 2023 में वैध पासपोर्ट पर भारत से कनाडा गया था. उसी साल वह गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुआ और वहीं पर लॉरेंस गैंग के संपर्क में आया. वह अमेरिका में बैठकर डिजिटल माध्यमों से भारत में गैंग के नेटवर्क को चला रहा है. वह सीधे लॉरेंस बिश्नोई के संपर्क में नहीं है. वह अमेरिका में बैठे 'हैरी बॉक्सर' और रणदीप मलिक जैसे लॉरेंस के खास करीबियों के इशारे पर काम करता है.
जैसे ही कल टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग हुई, वैसे ही अनिल पंडित नाम के बदमाश ने इस हमले की जिम्मेदारी ली. अनिल पंडित ने खुद को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का गुर्गा बताया. पहले उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी और फिर उसका ऑडियो भी शेयर हुआ.
अमेरिका के मशहूर लेखक एच. पी. लवक्राफ्ट का मानना है कि, "भय इंसानी दिमाग की सबसे पुरानी और सबसे मजबूत भावना है. इसलिए किसी के दिल में डर की चिंगारी सुलगाना दुनिया का सबसे सरल काम है." जितने भी गैंगस्टर हैं, वे इसे अच्छी तरह से समझते हैं और हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं.
टाइगर श्रॉफ के लिए भी उन्होंने इसी हथियार का इस्तेमाल किया था. खुद को लॉरेंस गैंग का गुर्गा बताने वाला अनिल पंडित जो दावा कर रहा है, उसे अगर संक्षेप में कहें, तो वह टाइगर को सबक सिखाना चाहता था. अनिल पंडित ने टाइगर पर हमले के लिए उनकी सलमान खान से दोस्ती को जिम्मेदार बताया है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या इस हमले के पीछे गुजरात की जेल में बैठा गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ही है या उसके नाम पर अलग-अलग अपराधी अपना सिंडिकेट चला रहे हैं? अगर इसके पीछे सच में लॉरेंस ही है, तो यह कितने ताज्जुब की बात है कि जेल में बैठा एक गैंगस्टर बाहर बैठे अपने गुर्गों के जरिए अपराध करवा रहा है और पुलिस क्यों नहीं कुछ कर पा रही है?
सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि लॉरेंस बिश्नोई आज अपराध की दुनिया में एक 'खौफनाक ब्रांड' बन चुका है. देश के कई छोटे-मोटे स्थानीय अपराधी और वसूली करने वाले बदमाश केवल दहशत फैलाने के लिए बिश्नोई गैंग का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, एक दूसरी सच्चाई यह भी है कि लॉरेंस बिश्नोई का गैंग नेटवर्क की तरह काम करता है.
लॉरेंस सीधे किसी शूटर या छोटे अपराधी को फोन नहीं करता. लॉरेंस केवल अपने सबसे भरोसेमंद इंटरनेशनल हैंडलर्स से ही संपर्क करता है. वह जेल के भीतर तस्करी से पहुंचे मोबाइल फोन, हाई-एंड वीपीएन और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करता है. विदेशी हैंडलर पूरी प्लानिंग शुरू करते हैं. ये लोग सीधे भारत में मौजूद अपराधियों से संपर्क नहीं करते, बल्कि भारत में सक्रिय अपने 'स्टेट हेड्स' या 'लॉजिस्टिक्स मैनेजर' से बात करते हैं. जब विदेश से किसी टारगेट को हिट करने का मैसेज आता है, तो अलग-अलग शहरों में बैठे इनके मैनेजर एक्टिव होते हैं और हथियार पहुंचाने का काम करते हैं. विदेश में बैठा हैंडलर सोशल मीडिया या अपने लोकल रिक्रूटर्स के जरिए शूटर्स को ढूंढता है. शूटर्स सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए ही हैंडलर्स से बात कर पाते हैं.
हमले के ठीक एक या दो दिन पहले, लॉजिस्टिक्स मैनेजर इन शूटरों को किसी अनजान जगह पर हथियार और रेकी टीम की जुटाई गई लोकेशन की जानकारी सौंप देता है. शूटर बिना सोचे-समझे गोली चला देते हैं. जब टाइगर श्रॉफ पर गोली चली, तो पुलिस भी कह रही है कि ये शूटर लॉरेंस गैंग का गुर्गा है. मतलब, यह भी ऐसे ही नेटवर्क के जरिए लॉरेंस गैंग से जुड़ा है.
कहते हैं अंडरवर्ल्ड की आधी ताकत उसकी बंदूकों में नहीं, बल्कि उसके नाम से पैदा होने वाले मनोवैज्ञानिक आतंक में होती है. गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसका गैंग भी यही कर रहा है. राजस्थान पुलिस का दावा है कि टाइगर पर गोली चलाने वाले शूटर भी लॉरेंस गैंग से जुड़े हुए हैं. सोचिए, इन शूटर्स ने लॉरेंस का सिर्फ नाम सुना है, लेकिन उसके नाम पर गोली चलाने के लिए तैयार हो गए. वो भी कुछ हजार रुपये और ग्लैमर के कारण. जैसा कि हमने आपको बताया कि लॉरेंस बिश्नोई कम उम्र के लड़कों को अपराधी बनाने के लिए ग्लैमर का इस्तेमाल करता है.
दावा किया जाता है कि इस समय लॉरेंस गैंग में 700 से 800 पूरी तरह प्रशिक्षित शूटर हैं. इनमें से अकेले पंजाब में 300 से ज्यादा शूटर हैं. लॉरेंस गैंग के शूटर पंजाब के अलावा हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, यूपी, राजस्थान और अब महाराष्ट्र तक फैल चुके हैं. लॉरेंस गैंग में शूटरों की भर्ती प्रक्रिया बेहद शातिर और कॉर्पोरेट जैसी होती है. गैंग का एक 'सोशल मीडिया विंग' होता है. इसके सदस्य गैंगस्टर संस्कृति, ग्लैमर, हथियारों के प्रदर्शन वाले वीडियो और कट्टरपंथी भावनाओं से जुड़ी रील्स पोस्ट करते हैं. इससे 15 से 20 साल तक के युवा आसानी से आकर्षित होते हैं. इन्हें भारी-भरकम पैसे देने के साथ-साथ अपराध करने के बाद फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश भेजने का वादा किया जाता है. समाज और सोशल मीडिया पर 'रौब' और दबदबा बनाने के झूठे ग्लैमर में फंसकर यूपी, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के गरीब और छोटे-छोटे लड़के इनके जाल में फंस जाते हैं और फिर इनके जरिए अलग-अलग जगहों पर गोली चलवाई जाती है. पकड़े जाने पर वकीलों का खर्च भी यही गैंग उठाता है.
एक तरह से क्राइम फ्रेंचाइजी की तरह काम करने वाला यह गैंग 10 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. खुद को लॉरेंस का छोटा भाई बताने वाला अनिल पंडित गीदड़भभकी दे रहा है कि उसके पास 70 हजार शूटर्स हैं. उसके पास कितने शूटर्स हैं, इससे ज्यादा अहम यह है कि उसके इशारे पर भीड़ के बीच टाइगर श्रॉफ पर कैसे गोलियां चलाई गईं? क्या इन गैंगस्टर्स को अब फिर से सलाम ठोकना होगा? क्या पुलिस की बजाय बॉलीवुड को, लोगों को फिर इन अपराधियों की शरण में जाना होगा? क्योंकि एक समय ऐसा भी था, जब बॉलीवुड की कई हस्तियां अंडरवर्ल्ड की शरण में थीं. कई लोग समाधान के लिए पुलिस के पास नहीं, डॉन के पास पहुंचते थे.
कहते हैं, जब आप अपने नाम के चारों ओर आतंक का एक घेरा बना लेते हैं, तो आपको हर बार बंदूक चलाने की जरूरत नहीं पड़ती. आपका नाम ही आपका काम कर देता है. 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी भी यही करती थी. मुंबई के अंडरवर्ल्ड ने फिल्म इंडस्ट्री को अपने लिए वसूली का बड़ा जरिया बना लिया था.
90 के दशक के आखिरी वर्षों और नई सदी की शुरुआत में बॉलीवुड पूरी तरह गैंगस्टर्स और माफिया के चंगुल में था. फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले लोग हर दिन वसूली के साए में जीते थे. दाऊद गैंग से जुड़े लोगों का फिल्मों की फाइनेंसिंग में दखल होता था, वो फिल्मों के ओवरसीज राइट्स मांगते थे. आरोप ये भी है कि फिल्मों में कलाकारों के चयन में भी उनका हस्तक्षेप होता था और जब उनके मन-मुताबिक काम नहीं होता था, तो वो गोली चलाने से भी पीछे नहीं हटते थे.
उस दौर में अंडरवर्ल्ड का आतंक इतना ज्यादा था कि फिल्मी हस्तियों ने मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर से मिलकर सुरक्षा की मांग की थी. तब मकोका जैसा कानून लाकर अंडरवर्ल्ड के असर को खत्म किया गया था. अब लगभग दो दशक के बाद एक बार फिर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर शूटर्स बॉलीवुड में अपने पैर पसार रहे हैं और उसने फिल्म इंडस्ट्री में अपने नाम का खौफ फैलाने की वजह सलमान खान को बनाया है.
अब ये हमला टाइगर श्रॉफ पर हुआ है. इसकी वजह सलमान खान से उनकी नजदीकी बताई गई है. मित्रो, सलमान खान को लेकर बिश्नोई समाज में नाराजगी है. काला हिरण कांड को लेकर आज भी बिश्नोई समाज का कहना है कि सलमान को माफी मांगनी चाहिए. लॉरेंस बिश्नोई ने इसी हिरण कांड को बहाना बनाकर सलमान को टारगेट करना शुरू किया और अब वह बॉलीवुड के लिए आतंक बन चुका है.
टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद सलमान खान के घर की सुरक्षा फिर से बढ़ा दी गई है. जाहिर है कि एक के बाद एक, जिस तरह लॉरेंस गैंग बॉलीवुड को टारगेट कर रहा है और चुनौती देकर फायरिंग करवा रहा है, वह डरावना है. इस डर को खत्म करने के लिए पुलिस को फिर से उसी तरह काम करना होगा, जिस तरह डी-कंपनी के खौफ को खत्म करने के लिए पुलिस ने उसके खिलाफ ऑपरेशन चलाया था.