लद्दाख-कच्छ में चीन- PAK की हेकड़ी निकालेगा भारत! बना लिया पानी में तैरने और दलदल में दौड़ने वाला'सुपर व्हीकल', जानिए क्या हैं खासियतें?
भारतीय सेना के बेड़े में 'BvS10 सिंधु' नाम का सुपर व्हीकल शामिल होने जा रहा है. यह व्हीकल -50°C की बर्फीली ठंड से लेकर 55°C की गर्मी, दलदल और पानी में भी आसानी से दौड़ सकता है. इस व्हीकल के आने से से लद्दाख और कच्छ में चीन-पाकिस्तान की रणनीतिक बढ़त खत्म होने जा रही है.
लद्दाख की जमा देने वाली ठंड से लेकर कच्छ की तपा देने वाली गर्मी तक भारतीय सेना के लिए भूगोल हमेशा से एक बड़ा चैलेंज रहा है. हिमालय क्षेत्र में जहां बर्फीली चोटियां हैं, वहीं कच्छ के इलाके में झुलसाता हुआ दलदली-रेगिस्तानी इलाका. ये ऐसी जगहें हैं, जहां पर पारंपरिक सैन्य वाहन अक्सर नाकाम हो जाते हैं. इस खामी को दूर करने के लिए अब भारतीय सेना अपने बेड़े में आर्टिकुलेटेड ऑल-टेरेन व्हीकल (ATV) यानी BvS10 'सिंधु' को शामिल करने जा रही है.
अपने नाम के अनुरूप ये व्हीकल किसी भी तरह के मौसम और इलाके में आसानी से ऑपरेट हो सकते हैं. इन्हें माइनस 50 डिग्री तापमान और 55 डिग्री झुलसाने वाली गर्मी में भी आसानी से ऑपरेट किया जा सकता है. इन व्हीकल्स को देश की लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और BAE सिस्टम्स मिलकर बना रही हैं. 'मेक इन इंडिया' के तहत बन रहे इन वाहनों का गुजरात के हजीरा में निर्माण शुरू हो चुका है. इन वाहनों में अधिकांश स्वदेशी सामग्री का उपयोग हो रहा है.
भारतीय सेना ने शुरुआती तौर पर कंपनी को 18 व्हीकल्स का ऑर्डर भी दे दिया है. इस तरह के व्हीकल्स दुनिया की कई आधुनिक सेनाएं पहले से इस्तेमाल करती आ रही हैं. लेकिन भारत में बन रहे BvS10 सिंधु को भारत की जरूरत के अनुरूप ढालते हुए बनाया जा रहा है. इनमें कई खूबियां तो ऐसी हैं, जो दुनिया के दूसरे देशों के वाहनों में भी नहीं हैं.
क्या होता है आर्टिकुलेटेड ऑल-टेरेन व्हीकल?
आर्टिकुलेटेड ऑल-टेरेन व्हीकल में टैंक और ट्रक का मिला-जुला संस्करण हैं. यह दो भागों में बंटा हुआ आर्टिकुलेटेड ट्रैक्ड वाहन होता है, जिसमें अगले हिस्से में ड्राइवर समेत 4-5 हथियारबंद सैनिक बैठ सकते हैं. वहीं पिछले हिस्से में भी 12 सैनिकों के बैठने की जगह होती है.
इस वाहन का ऊपरी हिस्सा कवच युक्त ट्रक की तरह होता है, जबकि निचले हिस्से में पहियों के बजाय टैंक जैसी चेन लगी होती है. जिसके चलते यह व्हीकल बर्फ, कीचड़, दलदल, पथरीले पहाड़ों और पानी में आसानी से आवाजाही कर सकता है. इन वाहनों में शक्तिशाली डीजल इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन लगा होता है, जिसकी वजह से यह कुछ ही देर में तेज स्पीड में दौड़ सकता है.
पानी में तैर भी सकते हैं ये व्हीकल
यह व्हीकल जमीन पर तेज रफ्तार से चलने के साथ-साथ पानी में तैरने की एम्फीबियस क्षमता भी रखता है. ग्राउंड प्रेशर बेहद कम होने की वजह से यह कीचड़ या बर्फ में धंसता नहीं है और हथियारों-रसद से लैस सैनिकों की टुकड़ी या भारी लॉजिस्टिक्स को ले जाने में सक्षम होता है.
इन विशेष वाहनों को एम्बुलेंस, कमांड पोस्ट या रसद ले जाने के काम में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. दुश्मन को गोलियों और हल्के बमों से सुरक्षा देने के लिए इनमें मजबूत आर्मर लगाया जाता है.
लद्दाख में चीन के खिलाफ भारत को मिलेगी बढ़त
चीनी सेना के पास इस तरह के ATV काफी पहले से मौजूद हैं, जिसने भारत से लगती सीमाओं पर तिब्बत में तैनात कर रखा है. इसी वजह से पेट्रोलिंग के मामले में उसे कुछ बढ़त हासिल थी. लेकिन अब भारतीय सेनाओं को भी ये वाहन मिलने से उसकी ये सामरिक बढ़त पूरी तरह खत्म हो जाएगी.
भारतीय सेना के बेड़े में ATV यानी BvS10 'सिंधु' आने के बाद लद्दाख में चीन के खिलाफ भारत की स्थिति मजबूत होगी. इसकी वजह ये है कि लद्दाख में मौसम की परिस्थितियां बेहद मुश्किल हैं. सर्दियों में होने वाली बर्फबारी, ग्लेशियर, और बेहद पतली हवा की वजह से पारंपरिक भारी टैंक या बख्तरबंद गाड़ियां अक्सर काम करना बंद कर देती हैं. जिससे एलएसी पर तैनात जवानों को राशन, ईंधन और गोला-बारूद की सप्लाई निर्बाध रखना मुश्किल हो जाता है.
माइनस 50 से 50 डिग्री सेल्सियम में करेंगे काम
लेकिन अब ये स्पेशल व्हीकल आने के बाद भारत माइनस 50 डिग्री तापमान में भी अपने जवानों को हथियार और रसद आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेगा. जंग की स्थिति में वह अपने जवानों को इन वाहनों में बिठाकर तुरंत मोर्चे की ओर भेज सकेगा. ये वाहन दुर्गम ढलानों और जमी हुई नदियों को भी आसानी से पार कर सकते हैं. इसके सात ही घायलों को सुरक्षित निकालने में भी बेहद कारगर हैं. ऐसे में किसी भी तरह की विषम परिस्थिति में सेना की ओर प्रतिक्रिया का समय काफी तेज हो जाएगा.
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लद्दाख की तरह गुजरात में कच्छ का इलाका भी भारतीय सेना के लिए चुनौती भरा रहा है. इसकी वजह ये है कि कच्छ और सर क्रीक क्षेत्र में नमक के मैदान, दलदल और रेगिस्तान हैं. इसके साथ ही, मौसमी बाढ़ भी जब-तब सैनिकों की परीक्षा लेती रहती है. वहां पर गर्मियों में तापमान 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. जिसके चलते पेट्रोलिंग करना बेहद मुश्किल हो जाता है. तेज गर्मी पड़ने पर वहां सेना की सामान्य गाड़ियों के पहिए कीचड़ और रेत में धंस जाते हैं.
कच्छ में घुसपैठ की कोशिशों पर लगेगी लगाम
लेकिन BvS10 सिंधु अपनी एम्फीबियस क्षमता और विशेष ट्रैक्स की वजह से इन सब चुनौतियों को खत्म कर देगा. उसके अंदर ऐसा कूलिंग सिस्टम लगा है, जो बाहर के गर्मी को अंदर नहीं आने देगा और सैनिकों को कूल माहौल देगा. ये वाहन रेत, दलदल और पानी भरे इलाकों में आसानी से गश्त कर सकते हैं. पाकिस्तान सीमा के पास इन वाहनों की तैनाती से सेना को तेज गश्त और मजबूत निगरानी में मदद मिलेगी. इससे पाकिस्तान की ओर से होने वाली किसी भी संभावित घुसपैठ को समय रहते रोका जा सकेगा.
इस इलाके में पाकिस्तान के पास भी इस तरह के कुछ वाहन मौजूद हैं, जो उसने दूसरे देशों से खरीदे थे. लेकिन उनकी क्षमता और तकनीक पुरानी मानी जाती है. जबकि भारत में बनने वाले ये व्हीकल आधुनिक तकनीक और जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं. डिफेंस एक्सपर्टों का अनुमान है कि सेना ने भले ही अभी 18 वाहनों का ऑर्डर किया हो, लेकिन इन्हें एक बार परखने के बाद और ज्यादा संख्या में ऑर्डर दिए जा सकते हैं.
जंग की स्थिति में मिलेगा भारत को फायदा
सबसे बड़ी बात ये है कि स्पेशल व्हीकल भारत में ही बन रहे हैं. इसलिए जंग जैसी स्थिति बनने पर भारत इनका तेजी से उत्पादन करके मोर्चे पर तैनात कर सकता है. इन वाहनों के आने से भारतीय सेना को किसी भी तरह के मौसम और क्षेत्र वाले इलाकों में ऑपरेशन करने की वह क्षमता मिलने जा रही है, जिससे चीन और पाकिस्तान के रणनीतिकार निश्चित रूप से परेशानी महसूस कर रहे होंगे.