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देश के पूर्वी समुद्र तटीय हिस्सो में बुधवार को दिनभर तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान 'अर्नब' अब कमजोर हो गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि यह चक्रवात अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ना जारी रखेगा. बुधवार रात में इसके गहरे अवदाब में बदलने और फिर धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है.
मौसम विभाग ने कहा कि अगले 24 घंटों के दौरान तूफान के उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ना जारी रखने की संभावना है. बुधवार आधी रात तक इसके गहरे अवदाव में बदलने और उसके बाद धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है. IMD ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करके लिखा, चक्रवाती तूफान 'अर्नब'पिछले 6 घंटों के दौरान 8 किमी प्रति घंटे की गति से धीरे-धीरे उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा. इसके बाद यह कमजोर होकर चक्रवाती तूफान में तब्दील हुआ. फिर शाम 17:30 बजे यह आंध्र प्रदेश के नरसपुर से लगभग 60 किमी उत्तर, पुडुचेरी के यनम से 60 किमी पश्चिम-उत्तर-पश्चिम और ककीनाडा से 60 किमी दूर स्थित था.
NDRF के डीआईजी (ऑपरेशन्स) एस. एस. सूडान ने बताया कि चक्रवात से पहले आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों और तटीय क्षेत्रों से 55 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया. जबकि, तीन लोगों की मौत की खबर है. उन्होंने बताया कि तूफान से निपटने के लिए NDRF की 39 टीमों को तैनात किया गया है. जिसमें राहत कार्यों में सहायता के लिए मंगलवार को एयरलिफ्ट की गई चार टीमें भी शामिल हैं.
उधर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात से प्रभावित लोगों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि वे नुकसान का आकलन करने के लिए गुरुवार दोपहर को कोणसीमा और पश्चिम गोदावरी जिलों का दौरा करेंगे.
राहत उपायों का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के घरों में पानी भर गया है, उन्हें 25 किलो चावल दिया जाएगा. बुनकरों और मछुआरों को 50 किलो चावल के साथ एक-एक किलो प्याज, खाना पकाने का तेल और अरहर की दाल दी जाएगी. प्रति व्यक्ति 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता और मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा. फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को अलग से सहायता दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि जिलों में आर्थिक सहायता बांटने की शुरुआत गुरुवार से होगी. फसलों के नुकसान का मुआवजा आकलन पूरा होने के बाद दिया जाएगा. राहत पैकेज पर अंतिम फैसला गुरुवार को होने वाली कैबिनेट की वर्चुअल बैठक में लिया जाएगा. प्रभावित क्षेत्रों में पीने के पानी और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक ने आपदा प्रबंधन का तरीका बदल दिया है. पहले पूरे तटीय क्षेत्र में अलर्ट रहना पड़ता था, लेकिन अब सटीक पता लगाया जा सकता है कि चक्रवात कहां टकराएगा. उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली को 'पूर्वानुमान, सटीकता और जमीनी तैयारी' बताया. नहरों में रुकावटें कम होने से कई जगह जलभराव की समस्या भी कम हुई है.
उन्होंने पिछले तीन दिनों से लगातार काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को धन्यवाद दिया और कहा कि सरकार का उद्देश्य समय पर सेवाएं पहुंचाना और लोगों में भरोसा जगाना है. उन्होंने यह भी बताया कि चक्रवात 'अर्नब' के बाद हुई बारिश से राज्य में औसत बारिश की कमी 39 प्रतिशत से घटकर 27 प्रतिशत रह गई है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राजनीतिक कारणों से आरटीजीएस सेंटर की अनदेखी की थी.
उन्होंने कहा कि चक्रवात से संबंधित नुकसान में सहायता मांगने के लिए उन्होंने केंद्र को पत्र लिखा है. साथ ही, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चक्रवात की तीव्रता और आंध्र प्रदेश पर पड़े असर के बारे में जानकारी दी है.
चक्रवात की वजह से 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक कम से कम 22 एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन सेवा रद्द हैं. इनमें विशाखापट्टनम-किरंदुल और राउरकेला-जगदलपुर सेवाएं शामिल हैं. हावड़ा-जगदलपुर समलेश्वरी एक्सप्रेस जैसी अन्य ट्रेनों की प्रस्थान तिथियों में बदलाव किया गया है.
इसी तरह, भुवनेश्वर-जगदलपुर हीराखंड एक्सप्रेस 27 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक रायगड़ा में समाप्त होगी. वहीं, जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक जगदलपुर के बजाय रायगड़ा से शुरू होगी. ये दोनों अस्थायी बदलाव हैं.
(एजेंसी आईएएनएस)