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आज पूरे देश में दिवाली की धूम. कश्मीर घाटी भी इस जश्न में पूरी तरह डूबी हुई है. इस बार श्रीनगर के मशहूर लाल चौक पर जो नजारा देखने को मिला, कुछ साल पहले तक कोई इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था. जहां कभी अलगाववाद और पत्थरबाजी की खबरें आती थीं, वहां आज रात राष्ट्रीय गौरव और भाईचारे की रोशनी जगमगा रही है.
#WATCH | J&K: A large number of people gather at Ghanta Ghar at Lal Chowk in Srinagar, which is beautifully illuminated and decorated, to join in #Diwali celebrations here. https://t.co/n0UBuD4F7q
— ANI (@ANI) November 8, 2026
श्रीनगर के सबसे चर्चित लाल चौक के बीचों-बीच आज 11,000 मिट्टी के दीये जलाए गए हैं. इन दीयों को कुछ इस तरह सजाया गया है कि इनसे 'भारत विश्व गुरु' का संदेश उभरकर सामने आ रहा है.

#WATCH | J&K: A large number of people gather at Ghanta Ghar at Lal Chowk in Srinagar which is beautifully illuminated and decorated, to join in #Diwali celebrations here. https://t.co/qhXBWejiwO
— ANI (@ANI) November 8, 2026
एक वक्त था जब यही लाल चौक अलगाववादी रैलियों और तनाव का अड्डा माना जाता था, लेकिन आज यहां सिर्फ खुशियां और सांस्कृतिक आत्मविश्वास नजर आ रहा है. लाल चौक पर लौटी यह रौनक बस एक दिन की सजावट भर नहीं है, बल्कि यह बदलते हुए कश्मीर की नई कहानी बयां कर रही है.

दिवाली के मौके पर ऐतिहासिक क्लॉक टावर के पास स्थानीय लोग, पर्यटक, कश्मीरी पंडित और युवा छात्र एक साथ खड़े होकर इस पल के गवाह बने. हवा में घी के दीयों की खुशबू के साथ भजनों की गूंज और 'जय श्री राम' के नारे सुनाई दिए. पास ही एक सजा हुआ 'राम रथ' भी खड़ा था. शाम को भव्य आरती भी हुई. इस दौरान बीच-बीच में हुई आतिशबाजी ने पूरे आसमान को रोशन कर दिया.
#WATCH | J&K: Ghanta Ghar at Lal Chowk in Srinagar beautifully illuminated and decorated for #Diwali celebrations. https://t.co/GG1JiSPi29
— ANI (@ANI) November 8, 2026
इस बदलाव को देखकर हर कोई हैरान है, क्योंकि दशकों तक लाल चौक अलगाववादी सोच का केंद्र रहा, जहां काले झंडे लहराए जाते थे और नफरत भरे जुलूस निकलते थे. लेकिन आज रात इस जगह पर भक्ति का माहौल है.

दिवाली के मौके पर सुरक्षा बल तैनात रहे, लेकिन माहौल में जरा भी तनाव नहीं था. हर तरफ त्योहार की रौनक दिखी. लोग बिना किसी डर के बाहर निकले और बच्चे दीयों की कतारों के बीच खेलते दिखे. पारंपरिक कश्मीरी पोशाक 'फेरन' पहने बुजुर्ग महिलाओं ने भगवान राम की मूर्तियों पर फूल चढ़ाए.