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जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों ने नाका चेकिंग के दौरान दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. उनके पास से चीन में बनी एक पिस्तौल, मैगजीन, 9 एमएम की दो गोलियां और दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए हैं. दोनों संदिग्ध नाके पर सुरक्षा बलों को देखकर भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जवानों ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों के संपर्क किन लोगों से थे और उनके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था.
यह कार्रवाई रविवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के पानीवाह इलाके में हुई. जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम इलाके में नियमित नाका चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान दो लोग एक बाग और खेती वाले इलाके से कुलगाम शहर की तरफ आते दिखाई दिए.
सुरक्षा बलों ने जब उन्हें नाके पर रुकने का इशारा किया तो दोनों ने भागने की कोशिश की. जवानों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें घेर लिया और पकड़ लिया. पूछताछ में उनकी पहचान ताहिर बिलाल और मुनीब यासीन के रूप में हुई है.
सुरक्षा बलों ने दोनों की तलाशी ली तो उनके पास से चीन में बनी एक पिस्तौल, एक मैगजीन, 9 एमएम की दो गोलियां और दो चीनी हैंड ग्रेनेड मिले. हथियार और विस्फोटक बरामद होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उन्हें हथियार कहां से मिले थे और वे इन्हें किस तक पहुंचाने वाले थे. इसके अलावा उनके स्थानीय और दूसरे संपर्कों की भी जांच की जा रही है.
जांच एजेंसियों को शक है कि दोनों का संबंध आतंकियों के ओवर-ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क से हो सकता है. OGW ऐसे लोग होते हैं, जो सीधे आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हुए बिना सक्रिय आतंकियों की मदद करते हैं. ये उन्हें हथियार और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने, सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों की सटीक भूमिका अभी जांच के दायरे में है. पुलिस उनके संपर्कों और संभावित हैंडलर के बारे में जानकारी जुटा रही है.
कुलगाम में सुरक्षा बलों की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब करीब एक हफ्ते पहले भी जिले में पांच संदिग्ध आतंकियों और उनके सहयोगियों को पकड़ा गया था. उस कार्रवाई में भी पिस्तौल और ग्रेनेड बरामद किए गए थे. लगातार हो रही ऐसी गिरफ्तारियों से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बनी हुई है. घाटी में सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या में कमी आने के बावजूद OGW नेटवर्क, विदेशी आतंकियों और हथियारों की सप्लाई से जुड़ी गतिविधियों पर सुरक्षा बलों की नजर है.
ताजा गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों संदिग्धों को हथियार किसने उपलब्ध कराए और उनका इस्तेमाल कहां किया जाना था. उनके मोबाइल फोन, संपर्कों और दूसरे संभावित सहयोगियों की भी जांच की जा सकती है. सुरक्षा एजेंसियों का मकसद हथियारों की सप्लाई और आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क का पता लगाना है, ताकि किसी संभावित वारदात को समय रहते रोका जा सके. फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच के आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं.