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Jhajjar के पहलवान अमन सहरावत ने Asian Games में जीता Gold, बचपन में उठ गया था माता-पिता का साया

झज्जर के बिरोहड़ गांव के अमन सहरावत ने बचपन में माता-पिता को खोने के बाद दादा-चाचा के सहारे कुश्ती का सफर शुरू किया और अब एशियन गेम्स में 57 किलो वर्ग का गोल्ड जीतकर देश-गांव का नाम रोशन किया.

Jhajjar के पहलवान अमन सहरावत ने Asian Games में जीता Gold, बचपन में उठ गया था माता-पिता का साया
Image Credit: United World Wrestling 'X'

Jhajjar News: हरियाणा के झज्जर जिले के गांव बिरोहड़ की मिट्टी में पला-बढ़ा पहलवान अमन सहरावत अब एशियन गेम्स का चैंपियन बन गया है. शनिवार को अमन ने पुरुषों के 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती वर्ग के फाइनल में उत्तर कोरिया के मौजूदा विश्व चैंपियन हान चोंग सोंग को 11-7 से हराकर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता. मुकाबले में एक समय 6-7 से पीछे चल रहे अमन ने जोरदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया. वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अमन सहरावत को शुभकामनाएं दी.

अमन के गोल्ड जीतते ही बिरोहड़ गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. परिवार के लोग, ग्रामीण और अमन के चाहने वाले जश्न में डूब गए. जिस परिवार ने बचपन में अमन को माता-पिता की कमी के बीच संभाला, आज उसी परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला है.

बचपन में उठ गया माता-पिता का साया
अमन का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. उनकी मां कमलेश का 2013 में और पिता सोमवीर सहरावत का 2014 में निधन हो गया था. उस समय अमन बहुत छोटी उम्र के थे. माता-पिता के जाने के बाद उनकी छोटी बहन पूजा के साथ अमन की जिम्मेदारी परिवार पर आ गई.
अमन की परवरिश उनके दादा मांगेराम, ताऊ और चाचा ने मिलकर की. परिवार आज भी गांव से करीब दो किलोमीटर दूर खेतों की ढाणी में रहता है. परिवार के पास खेती की जमीन भी रही है और साधारण किसान परिवार से निकलकर अमन ने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में अपनी पहचान बनाई.

चाचा ने पहचानी प्रतिभा, अखाड़े से छत्रसाल तक पहुंचाया
अमन का कुश्ती से रिश्ता बचपन से रहा. बिरोहड़ के गोधड़ी आश्रम के अखाड़े से उन्होंने कुश्ती के दांव-पेंच सीखने शुरू किए. परिवार में पहले से ही कुश्ती का माहौल था.

बाद में उनके चाचा सुधीर सहरावत ने अमन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया और उन्हें दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम भेजा. वहां कोच ललित कुमार के मार्गदर्शन में अमन ने फ्रीस्टाइल कुश्ती की बारीकियां सीखीं. कम उम्र में माता-पिता को खोने के बाद अमन के लिए परिवार और अखाड़ा ही सहारा बने.

यहीं से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा. अमन ने 2022 एशियन गेम्स में कांस्य, 2023 एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण और 2024 पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई.

पेरिस में दादा ने कहा था- पोते ने लठ गाड़ दिया
अमन के दादा मांगेराम सहरावत का अपने पोते से खास लगाव रहा है. पेरिस ओलंपिक 2024 में अमन के कांस्य पदक जीतने के बाद दादा ने खुशी में कहा था कि “अमन ने पेरिस में लठ गाड़ दिया.” परिवार का कहना था कि अमन ने छोटी उम्र में ही ऐसा नाम बनाया, जिस पर पूरे गांव को गर्व है.

अब एशियन गेम्स में अमन के गले में गोल्ड आने के बाद दादा मांगेराम की खुशी का अंदाजा लगाया जा सकता है. गांव की मिट्टी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय अखाड़े में तिरंगा लहराने वाले पोते की जीत ने परिवार की वर्षों की मेहनत और संघर्ष को नई पहचान दी है.

खेतों में पहुंचते ही दादा ने मनाई खुशी
अमन के गोल्ड जीतने की खबर मिलते ही दादा खेतों की ओर पहुंचे और वहां खुशी मनाई. गांव के लोग भी खेत में पहुंचे और दादा का मुंह मीठा कराया. दादा-दादी, चाचा, ताऊ और ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि परिवार के वर्षों के संघर्ष का फल है.
बिरोहड़ के लोग अमन की हर बड़ी जीत पर एकजुट होते रहे हैं. पेरिस ओलंपिक के दौरान भी गांव में अमन का मुकाबला देखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी और पदक जीतने के बाद पूरा गांव जश्न में डूब गया था.

दादा-दादी, चाचा-ताऊ गांव में ही रहते हैं
अमन का परिवार आज भी अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है. दादा मांगेराम, ताऊ सुधीर और जयवीर तथा चाचा रणवीर, कर्मवीर और वेद प्रकाश समेत परिवार के अन्य सदस्य बिरोहड़ की ढाणी में रहते हैं. जिस परिवार ने अमन को उस समय संभाला, जब उसके सिर से माता-पिता का साया उठ गया था. आज वही परिवार उसके एशियन गेम्स गोल्ड का जश्न मना रहा है.

उपलब्धियों में जुड़ा एक और बड़ा अध्याय
अमन पहले ही पेरिस ओलंपिक का कांस्य पदक जीतकर इतिहास बना चुके हैं. 2026 में उन्होंने बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज में भी 57 किलो वर्ग में स्वर्ण जीता था.
अब एशियन गेम्स 2026 का गोल्ड उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है. 23 वर्षीय अमन ने फाइनल में विश्व चैंपियन को हराकर साबित किया कि बिरोहड़ की मिट्टी से निकला यह पहलवान बड़े से बड़े मंच पर भारत का तिरंगा ऊंचा करने का दम रखता है.

बिरोहड़ के खेतों से छत्रसाल के अखाड़े तक और वहां से एशियन गेम्स के गोल्ड मेडल तक अमन सहरावत की कहानी संघर्ष, परिवार के सहारे और कुश्ती के जुनून की कहानी है

(झज्जर से सुमित कुमार की रिपोर्ट)

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About the Author

Renu Akarniya

Renu Akarniya

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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