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Karnal News: हरियाणा के करनाल जिले की बहू नेहा ने एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई है. सोनीपत की रहने वाली नेहा गोयल की शादी करनाल निवासी सुनील से साल 2024 में तय हुई थी. उन्होंने ससुराल वालों से खेल के लिए दो साल का समय मांगा था. कहा था कि इन दो सालों में वह को खुद साबित कर दिखाएंगी. देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना उनका सपना है और उन्होंने अपनेआप को साबित कर दिखाया.
नेहा की सफलता से प्रफुल्लित ससुर रामस्वरूप ने कहा कि जब नेहा बैठे सुनील से शादी करके आई थी तो हमें लगा था कि वह घर संभालेगी. उनकी खेल के प्रति लगन को देखते हुए तीन साल का समय दिया. नेहा ने कहा था कि वह इस बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम जरूर करेंगी. और उन्होंने कर दिखाया. ससुर बोले कि आज हम बहुत खुश हैं. पदक जीतने के बाद नेहा ने फोन पर बात की. उन्होंने कहा कि नेहा ने छठी कक्षा से हॉकी खेलना शुरू किया.
नेहा के जेठ अजय यादव ने बताया कि आठ अक्टूबर को नेहा अपने ससुराल वापस आएगी. अजय ने कहा कि 44 साल बाद भारतीय महिला हॉकी टीम ने देश के लिए पदक जीता है. पूरे परिवार ने मैच देखा. साढ़े चार बजे से पूरा परिवार टीवी के आगे बैठ गया था और मैच खत्म होने के बाद ही सब टीवी के आगे से उठे. नेहा के पति सुनील भी हॉकी के खिलाड़ी हैं. हमने उनको पूरा समर्थन दिया. नेहा ने जापान रवाना होने से पहले कहा था कि एशियाई खेलों में कांस्य और रजत पदक जीत चुकी हूं, अब सोने की बारी है.
नेहा की जेठानी कांता यादव ने कहा कि नेहा बहुत मेहनती है और उसने घर संभालने के साथ-साथ खेल में भी अच्छा काम किया है. उसकी जीत की खबर सुनकर हम सब बहुत खुश हैं और लगातार हमारे घर में बधाइयों का सिलसिला जारी है. उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं को इसी तरह आगे बढ़ना चाहिए, यही उनकी इच्छा है.
गौरतलब है कि नेहा भारतीय रेलवे की टीम ओर से साल 2016 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता खेलने गई थीं. अच्छे प्रदर्शन के कारण भारतीय महिला टीम में चयन हुआ. तब से वह टीम का हिस्सा हैं. 2024 ओलंपिक में भी टीम का हिस्सा थीं. नेहा की विशेषज्ञता शानदार मिडफील्ड और फॉरवर्ड गेम है.
नेहा ने बेहद मुश्किल परिस्थितियों में हॉकी का सफर शुरू किया. आर्थिक तंगी के कारण उन्हें कई बार फटे जूतों में अभ्यास करना पड़ा. अभ्यास के लिए वह करीब 10 किलोमीटर तक चलकर जाती थीं और कई बार खाली पेट भी मैदान में पसीना बहाया. मां सावित्री दूसरों के घरों और कारखाने में काम कर बेटी के खेल का खर्च उठाती थीं.
(करनाल से कमरजीत सिंह की रिपोर्ट)