SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

धमकी, वसूली और फायरिंग... कितना बदल गया है बॉलीवुड को डराने का तरीका; फिर लौट रहा 90 के दशक के अंडरवर्ल्ड का खौफ?

बॉलीवुड में धमकी, वसूली और फायरिंग की घटनाओं ने एक बार फिर 90 के दशक के अंडरवर्ल्ड की यादें ताजा कर दी हैं. सलमान खान से टाइगर श्रॉफ तक, सितारों को निशाना बनाने का तरीका कितना बदला है और पुलिस जांच क्या कहती है? आइए जानते हैं...

Written By Swati Singh
Published: Oct 19, 2026, 09:31 AM IST | Updated: Oct 19, 2026, 10:48 AM IST
Image Credit: AI, बॉलीवुड में फिर अंडरवर्ल्ड का डर!
Join

मुंबई के जुहू इलाके में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर गोली चलाई गई, लेकिन वे बाल-बाल बच गए. इस घटना से बॉलीवुड हस्तियों पर हुए गोलीबारी के हमलों और धमकियों का पुराना दौर याद आ जाता है. खासकर 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में जब संगठित अपराध गिरोह फिल्मों की फाइनेंसिंग, कास्टिंग के फैसलों और डिस्ट्रीब्यूशन अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश करते थे.

मुंबई के अंडरवर्ल्ड और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बीच संबंध 1960 के दशक से हैं, जब हाजी मस्तान जैसे गैंगस्टर फिल्म हस्तियों के साथ उठते-बैठते थे और फिल्मों के लिए फाइनेंस जुटाने का एक वैकल्पिक जरिया बन गए थे. 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक तक आते-आते यह रिश्ता और भी जबरदस्ती भरा हो गया. उस समय आपराधिक गिरोह फिल्मों में पैसा लगाने लगे, विदेशों में फिल्म दिखाने के अधिकार (ओवरसीज राइट्स) मांगने लगे और कास्टिंग के फैसलों में भी अपनी मर्जी थोपने की कोशिश करने लगे. अब लगभग तीन दशक बाद बॉलीवुड एक बार फिर ऐसे ही सवालों से घिरा है. जहां पहले सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग, रोहित शेट्टी के घर पर गोलीबारी और अब टाइगर श्रॉफ की कार पर हमला हुआ. इन हमलों ने अब फिल्म इंडस्ट्री की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

साथ ही ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का खौफ दौर रहा है.  घटना एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़ी है, जिनकी कार पर मुंबई के जुहू इलाके में गोलियां चलाई गईं. एक्टर तो सुरक्षित बच गए. लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को चोटें आईं. बिश्नोई गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और बॉलीवुड हस्तियों को सलमान खान के साथ काम न करने की चेतावनी दी है.  मुंबई पुलिस मामले की जांच कर रही है. यह हमला फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई गोलीबारी और अभिनेता रणवीर सिंह को मिली रंगदारी की धमकी के आठ महीने बाद हुआ है. लेकिन इस पूरे मामले की जड़ें और भी गहरी हैं, जिसके केंद्र में सलमान खान हैं.

थम नहीं रहा सलमान खान और धमकियों का सिलसिला

सलमान खान को कई सालों से लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ी धमकियां मिल रही हैं. यह दुश्मनी 1998 के काले हिरण के शिकार मामले से शुरू हुई थी. अप्रैल 2024 में मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने बांद्रा स्थित उनके घर के बाहर फायरिंग की. उनके पिता स्क्रिप्टराइटर सलीम खान को भी धमकियां मिली हैं, जिससे परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.

धमकियों का दायरा खान के करीबी लोगों तक भी फैल गया है. नवंबर 2023 में कनाडा में पंजाबी एक्टर और सिंगर गिप्पी ग्रेवाल के घर के बाहर गोलियां चलाई गईं. बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का दावा करने वाले एक संदेश में इस हमले की वजह गिप्पी ग्रेवाल का खान के साथ जुड़ाव बताया गया. हालांकि, बाद में अभिनेता ने खान के साथ अपनी करीबी होने की बात से इनकार कर दिया.

बाबा सिद्दीकी की हत्या ने सब बदल दिया

12 अक्टूबर 2024 को महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और सलमान खान के करीबी दोस्त बाबा सिद्दीकी की मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई. बिश्नोई गैंग ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली, और सामने आए संदेश में सिद्दीकी के सलमान खान के साथ संबंधों का जिक्र किया गया. इस हत्या से पूरे बॉलीवुड में हड़कंप मच गया और सुपरस्टार के करीबी लोगों के लिए हिंसा का खतरा एक भयानक हकीकत बन गया.

मुनव्वर फारुकी: अक्टूबर 2024 में इस कॉमेडियन को धमकियां मिलीं, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई. खुफिया जानकारी से यह भी पता चला था कि दिल्ली में उन्हें निशाना बनाने की साजिश रची जा रही थी.

कपिल शर्मा: 2025 में उनके कैनेडियन कैफे को तीन बार गोलीबारी की घटनाओं में निशाना बनाया गया. बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का दावा करने वाले संदेशों में इन हमलों को सलमान खान के उस कैफे के उद्घाटन समारोह में शामिल होने से जोड़ा गया.

आमिर खान: जुलाई 2026 में इस अभिनेता को सोशल मीडिया और ऑडियो संदेशों के जरिए धमकियां मिलीं. संदेश भेजने वालों ने दावा किया कि वे बिश्नोई गैंग से जुड़े हैं. पुलिस ने इन संदेशों की जांच की, जिनमें अभिनेता की निजी जिंदगी को लेकर भी आरोप लगाए गए थे.

रणवीर सिंह: फरवरी 2026 में, इस अभिनेता को एक वॉयस मैसेज मिला जिसमें 10 करोड़ रुपये की मांग की गई थी. साथ ही उन्हें और उनके स्टाफ को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई.

आयुष शर्मा: सलमान खान के बहनोई को फरवरी 2026 में एक धमकी भरा ईमेल मिला. ईमेल भेजने वाले ने क्रिप्टोकरेंसी में फिरौती की मांग की और खुद को बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया.

90 के दशक में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता कैसा था?

90 के दौर में बॉलीवुड में दाऊद इब्राहिम के डी-कंपनी नेटवर्क, छोटा राजन और छोटा शकील जैसे नाम संगठित अपराध की चर्चाओं में प्रमुखता से सामने आते थे. साथ ही कई अंडरवर्ल्ड डॉन का नाम कथित तौर पर फिल्म की फंडिंग, कलाकारों की कास्टिंग और विदेशी वितरण अधिकारों को लेकर दबाव बनाए जाने की खबरें भी थी.

एक इंटरव्यू में अप्रैल 2026 में फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने एक इंटरव्यू में 1990 के दशक के उस दौर को याद किया. उन्होंने बताया कि अपराधियों के लिए हिंसा केवल पैसे वसूलने का जरिया नहीं थी. लेकिन इसका इस्तेमाल अपनी ताकत दिखाने और दूसरों को डराने के लिए भी किया जाता था. वहीं, राम गोपाल वर्मा ने गुलशन कुमार की हत्या और राकेश रोशन पर हुए हमले को लेकर बताया कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाकर कई अन्य लोगों के मन में डर पैदा किया जा सकता था.

फिर भी बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के बीच एक अजीब सा रिश्ता था. आज ज्यादातर फिल्मों को बड़े स्टूडियो से फंड मिलता है. लेकिन कुछ दशक पहले ऐसा नहीं था. उस समय ऐसे निवेशकों की कमी थी जो फिल्मों में 'साफ-सुथरा' पैसा लगा सकें. अंडरवर्ल्ड गिरोहों ने इस कमी का फायदा उठाया और इसे अपने काले धन को व्हाइट मनी में बदलने का जरिया बना लिया. ये गिरोह अपने अवैध धंधों से जो भी पैसा कमाते थे, उसे फिल्मों में लगा देते थे. बदले में वे फ़िल्म की कमाई में अपना हिस्सा और फिल्म के इंटरनेशनल राइट्स मांगते थे. फिल्म 'चोरी-चोरी चुपके-चुपके' से जुड़े 2001 के मामले ने उनके काम करने के इस तरीके को सबके सामने ला दिया.

फिल्म इंडस्ट्री पर माफिया का इतना दबदबा था कि वे अक्सर स्टार-कास्ट और स्क्रीनप्ले तक तय कर देते थे. छोटा शकील और संजय दत्त के बीच हुई बातचीत की एक रिकॉर्डिंग, जो 2002 में लीक हो गई थी, उससे पता चलता है कि शकील को फिल्म निर्माण की गहरी समझ थी और उसने इस इंडस्ट्री में भारी निवेश कर रखा था.

जब बॉलीवुड में फैल गया था डर

1980 और 1990 के दशकों से इसकी समानता को अनदेखा करना मुश्किल है. 1997 में म्यूजिक बैनर गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई थी, उसी साल फिल्म निर्माता मुकेश दुग्गल की गोली मारकर हत्या कर दी गई. 2000 में फिल्म निर्माता राकेश रोशन पर हुए गोलीबारी के हमले में वे बाल-बाल बच गए. ये घटनाएं उस दौर की प्रतीक बन गईं, जब आपराधिक गिरोह फिल्म उद्योग पर अपना प्रभाव जमाने के लिए धमकियों और हिंसा का इस्तेमाल करते थे.

हालांकि, मौजूदा हालात अलग हैं. लेकिन तरीके वही पुराने हैं, जैसे-पैसों की मांग, मशहूर हस्तियों और उनके सहयोगियों को दी जाने वाली धमकियां और ऐसी गोलीबारी जिसका मकसद सिर्फ सीधे निशाने को नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश देना होता है. टाइगर श्रॉफ पर हुआ हमला इस सिलसिले में एक और चिंताजनक अध्याय जोड़ता है.

फायरिंग की घटना से कुछ मिनट पहले क्या कर रहे थे टाइगर श्रॉफ? सामने आया रविवार रात का Video

बॉलीवुड एक बार फिर ऐसे सवाल का सामना कर रहा है, जिसके बारे में उसे लगा था कि वह अब अतीत की बात हो चुका है. जब बॉलीवुड की बड़ी हस्तियां जिनके पास संसाधन, सुरक्षा और रसूख है. खुद को धमकियों और हमलों का सामना करते हुए पाती हैं, तो यह चिंता सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रह जाती. यह कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा करता है. श्रॉफ पर हुआ हमला इस बात की ताजा याद दिलाता है कि अब इस सवाल को और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

आज फिर क्यों चर्चा में है बॉलीवुड और गैंगस्टरों का कनेक्शन?

पिछले रविवार को रोहित शेट्टी के घर पर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है. इस घटना के पीछे का मकसद अभी साफ नहीं है. इसी गैंग ने 2024 में बांद्रा स्थित फिल्म स्टार सलमान खान के घर पर भी इसी तरह से गोलीबारी की थी. सलमान खान, बिश्नोई के निशाने पर हैं क्योंकि उन पर 1998 में काले हिरण (ब्लैक बक) के शिकार का आरोप है. एक ऐसा जानवर जिसे बिश्नोई समुदाय पवित्र मानता है.

कुछ महीने पहले एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में जेल में बंद बिश्नोई ने सलमान को चेतावनी दी थी कि वे माफी मांग लें, वरना उन्हें मार दिया जाएगा. हालांकि, यह गैंगस्टर धर्म का हवाला दे रहा है. लेकिन जानकारों का मानना ​​है कि बिश्नोई का असली मकसद किसी और सेलिब्रिटी को निशाना बनाकर डर पैदा करना है. चार साल पहले पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद यह गैंग चर्चा में आया था.

धमकी, वसूली और फायरिंग का पैटर्न कैसे बदला?

बता दें कि 90 के दशक में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के रिश्तों, वसूली, धमकियों और फिल्म फाइनेंसिंग की खूब चर्चाएं होती थीं. हालांकि, आज के मामलों में सोशल मीडिया पपर पोस्ट शेयर कर जिम्मेदारी लेने का दौर है. आज के समय में गैंगस्टर डिजिटल मैसेज और कथित ऑनलाइन भी जांच का हिस्सा बन रहे हैं. हालांकि, हर मामले का मकसद एक जैसा नहीं होता.

क्या संगठित गिरोहों की भूमिका सामने आई है?

रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग मामले में पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों का संबंध लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े नेटवर्क से था. चार्जशीट में गैंग का दबदबा स्थापित करने की बात कही गई, लेकिन पुलिस ने यह भी कहा कि फायरिंग के पीछे किसी खास वजह को साबित करने वाले पर्याप्त सबूत नहीं मिले.

रोहित शेट्टी केस में Signal ऐप की क्या भूमिका रही?

रोहित शेट्टी केस की जांच में यह भी सामने आया है कि दीपक और गोलू आपस में Signal ऐप के जरिए संपर्क में थे. इस वजह से पुलिस को उनकी बातचीत ट्रैक करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. एन्क्रिप्टेड ऐप के इस्तेमाल ने जांच को जटिल बना दिया, लेकिन तकनीकी विश्लेषण के जरिए पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे.

डिजिटल सुराग पुलिस के लिए कैसे अहम हैं?

- मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा से संदिग्धों की गतिविधियों की कड़ियां जोड़ी जा सकती हैं.
- CCTV फुटेज से आने-जाने के रास्तों और वाहन की पहचान में मदद मिल सकती है.
- चैट, ऑनलाइन पोस्ट और वित्तीय लेनदेन की जांच से कथित साजिश के बारे में सुराग मिल सकते हैं.

क्या 90 के दशक का अंडरवर्ल्ड लौट रहा है?

90s के खतरनाक गैंगस्टर्स में से कई धीरे-धीरे गायब हो गए हैं. जबकि कई मारे भी जा चुके हैं और कुछ सलाखों के पीछे हैं. वहीं, बॉलीवुड को 'इंडस्ट्री' का दर्जा मिलने से फंडिंग के नए दरवाजे खुले और इंडस्ट्री धीरे-धीरे अंडरवर्ल्ड की काली परछाईं से बाहर निकल आई. हांकी, अब इस ठंडी पड़ती आग को बिश्नोई गैंग ने चिंगारी दे दी है. बॉलीवुड में अब जो हो रहा है, उससे एक बार फिर अंडरवर्ल्ड के खौफनाक साए के लौटने का डर फैलने लगा है.

पानीपत से पाप की दुनिया तक...कौन है लॉरेंस का खास अनिल पंडित, जिसने टाइगर श्रॉफ पर कराया हमला; ऐसी है क्राइम कुंडली
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES