मित्रों, अब हम..हिंसक प्रदर्शन के खिलाफ इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के नए कानून का विश्लेषण करेंगे. एक हफ्ते पहले इटली की जनता अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी थी, लेकिन सरकार विरोधी प्रदर्शन इतने अराजक हो गए कि मेलोनी सरकार को, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाने पड़ गए. आपको याद होगा जिस तरह NRC दंगों के दौरान यूपी में दंगाइयों से जुर्माना वसूला गया था, ठीक उसी दिशा में इटली की सरकार भी आगे बढ़ चुकी है
नए नियमों के मुताबिक अगर नाबालिग प्रदर्शनकारियों ने किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, तो नुकसान की आर्थिक कीमत नाबालिग के माता-पिता को भरनी होगी . यानी जो तोड़फोड़ करेगा, उसका परिवार हर्जाना भरेगा. नाबालिग यानी बच्चों के लिए सख्त प्रावधान लाना साफ-साफ बताता है, कि इटली में कथित प्रदर्शन अब हिंसक और बेकाबू हो गए हैं . इसके साथ ही साथ...अगर कोई प्रदर्शनकारी हिंसक गतिविधियों में शामिल होगा, तो उसके ऊपर तकरीबन 21 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. अगर हिंसक गतिविधियों की वजह से किसी को चोट पहुंचेगी तो जुर्माने के साथ ही साथ, 5 साल की जेल का भी प्रावधान निश्चित किया गया है .
अराजकता और हिंसा करने वाले नाबालिग अपराधियों को भी पुलिस अपनी हिरासत में रख पाएगी . प्रधानमंत्री मेलोनी ने ये साफ कर दिया है, कि अब अराजकता की कीमत आम जनता नहीं भरेगी, कीमत वही भरेगा जो नुकसान करेगा. सख्त प्रावधानों की जानकारी देने के साथ ही साथ, मेलोनी ने एक और अहम बात कही है . अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पीएम मेलोनी ने लिखा है - प्रदर्शन करना एक नागरिक का अधिकार है लेकिन हमारे शहरों को आग लगाना अधिकार की श्रेणी में नहीं आता है . हिंसा और चोरी चकारी, प्रदर्शन नहीं बल्कि अपराध कहे जाते हैं.
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— Zee News (@ZeeNews) October 21, 2026
इतिहास की किताबों में इटली को क्रांति की धरती का नाम दिया गया है . 18वीं सदी से लेकर 20वीं सदी में दूसरे विश्वयुद्ध तक...इटली ने कई राजनीतिक और सामाजिक क्रांतियों को देखा है, लेकिन इस बार कथित क्रांति को अपराध की परिभाषा दी गई है . इसकी वजह है वो असीमित नुकसान, जो हालिया प्रदर्शनों ने इटली में किया है . सिर्फ 6 से 7 दिनों के अंदर प्रदर्शनों की वजह से इटली को कितने जख्म मिले हैं...ये समझने के लिए आपको DNA की वीडियो रिपोर्ट बेहद गौर से देखनी और समझनी चाहिए .
16 अक्टूबर...ये वो तारीख थी जब इटली में खाद्य महंगाई और डीजल के दाम को लेकर प्रदर्शन शुरु हए थे...और महंगाई को लेकर उठाई जा रही है मांग...कब महाभारत में तब्दील हो गई...ये किसी को पता ही नहीं चला...जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ काबू से बाहर हुई...तो सबसे बड़ी कीमत बड़े शहरों में चलने वाले उद्योगों को चुकानी पड़ी. इटली के बड़े शहरों में से एक मिलान में हिंसा और हंगामे की वजह से 10 करोड़ 61 लाख रुपए का नुकसान हुआ . एक और बड़े शहर बोलोग्ना में..प्रदर्शनों की वजह से 11 करोड़ 67 लाख रुपए का नुकसान हुआ है . ट्यूरिन में तकरीबन 17 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.
इन्हीं प्रदर्शनों से वो तस्वीरें भी सामने आईं जिनकी वजह से इसे जनता की मांग नहीं, बल्कि सड़कों पर अराजकता करार दिया गया . मिलान और बोलोग्ना में प्रदर्शनकारियों ने बड़े ब्रांड्स के स्टोर यानी दुकानें लूट लीं . बेकाबू भीड़ कार्फूर, अंडर आर्मर और आर्क टेरिक्स जैसे ब्रांड्स के शो रूम में घुस गई और सामान लूट लिया गया . कुछ रिपोर्ट्स में ये दावा भी किया गया कि...दुकानों से लूटे गए सामान को ब्लैक मार्केट में बेचा भी गया...इसी वजह से इटली की पीएम मेलोनी को, इन प्रदर्शनों को अपराध की संज्ञा देने पर मजबूर होना पड़ा.
इटली के बड़े शहरों में सिर्फ लूटपाट ही नहीं हुई, बल्कि पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने भी आए. इटली की सरकार के मुताबिक 16 तारीख से लेकर अब तक...झड़पों में 240 पुलिसवाले घायल हो चुके हैं, जिनमें से 2 दर्जन गंभीर रूप से घायल हैं . पुलिस ने 271 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया और तकरीबन 15 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं. हालात इतने अस्थिर हो चुके हैं कि मिलान में इटली की सरकार ने फौज को तैनात कर दिया है..जिस इटली को कभी संतों और कवियों की भूमि कहा जाता था,...उस इटली की धरती पर आज अराजकता का दौर अपने पांव पसार चुका है.