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कानून के शिकंजे में श्रद्धा, फिर भी VIP वाली अकड़! आखिर किसकी शह पर चढ़ा ये गुरूर?

लखनऊ के शिवा शर्मा हत्याकांड की आरोपी श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी के बाद पुलिसकर्मी के साथ उसकी बातचीत वायरल हो गई है. बातचीत में पुलिसकर्मी के बर्ताव और श्रद्धा को VIP ट्रीटमेंट मिलने पर सवाल उठ रहे हैं.

कानून के शिकंजे में श्रद्धा, फिर भी VIP वाली अकड़! आखिर किसकी शह पर चढ़ा ये गुरूर?

कई बार आपने ये सवाल जरूर सुना होगा कि आखिर पुलिस हाईप्रोफाइल केस में ही अति सक्रिय क्यों होती है. क्यों पुलिस कथित रसूखदारों के सामने नतमस्तक हो जाती है. ये सवाल आज फिर चर्चा में है. इसकी वजह ये है कि लखनऊ के शिवा शर्मा की हत्या के केस में 11 दिन फरार रहने के बाद गिरफ्तार हुई आरोपी श्रद्धा दुबे के साथ पुलिस का एक संवाद वायरल हो रहा है.

श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी कल नागपुर में हुई. यूपी पुलिस को आज नागपुर सेशन कोर्ट से श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश की 72 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिल गई. यूपी पुलिस सड़क के रास्ते तीनों को लेकर नागपुर से लखनऊ रवाना हो गई है. एक दिन पहले गिरफ्तारी के बाद पुलिस जब श्रद्धा, रश्मि और दानिश को गाड़ी में बैठाकर ले जाने की तैयारी कर रही थी, तभी श्रद्धा और पुलिस के बीच की एक बातचीत वायरल है. संवाद महज 40 सेकंड का है. लेकिन इस 40 सेकंड के वार्तालाप ने पुलिस के बर्ताव और श्रद्धा की हनक को लेकर बड़े सवाल खड़े किए हैं.

पुलिसकर्मी को श्रद्धा के अपराध से नहीं, मीडिया से शिकायत?

विलियम शेक्सपियर ने लिखा है कि कानून मकड़ी के जाले की तरह होता है, जिसमें छोटी मक्खियां और कमजोर कीट तो फंस जाते हैं, लेकिन बड़ी और ताकतवर मक्खियां उस जाल को चीरकर निकल जाती हैं.

शिवा हत्याकांड की आरोपी श्रद्धा दुबे और पुलिसकर्मियों के इस संवाद का सार यही है. सोचिए जिस पर एक नौजवान की हत्या का आरोप है, उससे पुलिसकर्मी क्या कह रहा है. कह रहा है- मीडिया तो कुछ भी दिखाती है. मीडिया ने ही तो तुम्हारी भद्द पीट दी. तुमने जो किया वो ठीक है.

ये साधारण संवाद नहीं है. थोड़ा ठहरिए और सोचिए. भाषा और सोच पर ध्यान दीजिए. इस पुलिसकर्मी की मानसिकता कैसी है. मतलब इसे श्रद्धा के अपराध से जैसे कोई शिकायत नहीं है. शिकायत किससे है. मीडिया से. और क्यों शिकायत है.

क्योंकि मीडिया ने पुलिस से चुभने वाले सवाल पूछे. मीडिया ने पूछा कि चंद घंटों में अपराधी का एनकाउंटर करने का दावा करने वाली यूपी पुलिस शिवा हत्याकांड में आरोपी श्रद्धा को क्यों नहीं गिरफ्तार कर पा रही है. यूपी पुलिस की 10 टीम श्रद्धा को 11 दिनों तक तलाशती रही. इन 11 दिनों में श्रद्धा यूपी से नेपाल गई, नेपाल से यूपी होते हुए नागपुर तक पहुंच गई, लेकिन यूपी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई.

इस नाकामी के लिए स्वागत तो किया नहीं जाएगा, सवाल ही पूछे जाएंगे. जो पुलिसवाले को पसंद नहीं आ रहा. आलोचना बर्दाश्त नहीं हो रही. उसके लिए श्रद्धा कानून से ऊपर है और जो कोई श्रद्धा पर सवाल उठाएगा, वो सभी इस पुलिसवाले की नजर में विलेन हैं.

एक मर्डर आरोपी मॉडल की श्रद्धा में डूबे इस पुलिसवाले को आज बताना चाहिए कि उसकी आत्मा देश के कानून के साथ है या श्रद्धा दुबे के साथ है. उसे संविधान के अनुसार कार्रवाई करनी है या श्रद्धा दुबे की सुविधा के अनुसार.

श्रद्धा की श्रद्धा में डूबे पुलिसकर्मी की पहचान होनी चाहिए

हत्या की आरोपी श्रद्धा की श्रद्धा में डूबे ऐसे पुलिसवाले की पहचान होनी चाहिए. चेहरा नहीं दिखे तो आवाज से पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए. इसे ये समझाना चाहिए कि हत्या पर सवाल उठाना मीडिया का अपराध नहीं है. हत्या में आरोपी होना श्रद्धा का अपराध है. और श्रद्धा के अनुराग में डूबना इसका अपराध है.

पुलिसवाले और श्रद्धा दुबे के बीच संवाद का एक हिस्सा इसलिए भी सुनना जरूरी है क्योंकि इससे आसानी से समझा जा सकता है कि श्रद्धा जैसे कथित रसूखदारों का अहम आसमान पर कैसे पहुंच जाता है.

गिरफ्तारी के बाद भी फ्रंट सीट पर बैठने की चाह

श्रद्धा हत्या की आरोपी है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है. लेकिन यहां भी उसे फ्रंट सीट चाहिए. जैसे रील में हमेशा वो कैमरे के सामने रहती होगी, जैसे फैशन शो में हमेशा कैमरे का फोकस उस पर रहता होगा. पुलिस की गिरफ्त में भी उसे वही सुविधा चाहिए. वो VIP की तरह गाड़ी की फ्रंट सीट पर बैठना चाहती थी. वो चाहती थी कि जैसे कई कार्यक्रमों में पुलिसवाले उसके पीछे-पीछे हाथ बांधे घूमते थे, वैसे ही यहां भी वो फ्रंट सीट पर बैठे और पुलिस उसके पीछे दिखे.

श्रद्धा जैसे कथित सेलिब्रिटीज को किस बात का भ्रम?

अंग्रेजी में एक शब्द है इल्यूजन. हिंदी में इसका अर्थ है भ्रम, भ्रांति, मृगमरीचिका, दृष्टिभ्रम.

श्रद्धा जैसी कथित सेलिब्रिटीज को कितना इल्यूजन होता है. मतलब हत्या के आरोप में गिरफ्तारी के बाद भी इन्हें फ्रंट लाइन वाला ट्रीटमेंट ही चाहिए. इनके अंदर पश्चाताप की भावना नहीं. इन्हें कानूनी कार्रवाई का डर भी नहीं.

सोचिए एक आम आदमी को पुलिस सामान्य पूछताछ के लिए भी थाने बुला ले तो वो कितना डरा होता है. डर की वजह से मन के अंदर तरह-तरह के भाव आते हैं. यहां हत्या के आरोप में गिरफ्तारी हुई है. लेकिन भ्रम अब भी कथित सेलिब्रिटी होने का ही है. ये भाव उनके मन में क्यों आता है. क्योंकि एक पुलिसवाला उससे अपराधी की तरह नहीं बल्कि कथित सेलिब्रिटी की तरह पेश आता है.

श्रद्धा दुबे के अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की भी चर्चा

जिस श्रद्धा दुबे की श्रद्धा में कुछ पुलिसवाले डूबे हुए नजर आ रहे हैं, उसके अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की जानकारी भी सामने आई है. एक वीडियो में श्रद्धा जुल्फिकार नाम के संदिग्ध के साथ दिख रही है. 5 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपी जुल्फिकार अंडरवर्ल्ड सरगना अबू सलेम का करीबी होने का दावा करता है. आरोप है कि जुल्फिकार अबू सलेम के नाम पर लोगों को डरा धमका कर वसूली करता है.

आज पुलिस ने श्रद्धा दुबे के एक और मददगार आमिर को भी पकड़ा है. आरोप है कि 9 अक्टूबर को शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद श्रद्धा आमिर के साथ ही फरार हुई थी. आरोप है कि आमिर ने ही श्रद्धा, रश्मि और दानिश को नेपाल बॉर्डर तक छोड़ा था. आमिर ने एक फर्जी आईडी पर खरीदा गया सिमकार्ड भी श्रद्धा को दिया था.

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About the Author

Tahir Kamran

Tahir Kamran

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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