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दलेर मेहंदी का पता नहीं, लेकिन मंत्री जी सौ फीसदी नशे में थे; खुद स्वास्थ्य मंत्री हैं, पर राज्य में 65% विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली

सीनियर सिंगर दलेर मेहदी का भरे मंच पर अपमान करने वाले मंत्री जी शायद नहीं जानते कि उत्तराखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 65 प्रतिशत पद खाली हैं, जबकि 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 86 प्रतिशत पद रिक्त हैं. अगर कोई यह बात मंच से बोल देगा तो बुरा मान जाएंगे.

दलेर मेहंदी का पता नहीं, लेकिन मंत्री जी सौ फीसदी नशे में थे; खुद स्वास्थ्य मंत्री हैं, पर राज्य में 65% विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली
Image Credit: मंच पर मौजूद दलेर मेहंदी और उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल

आयुर्वेद में दो तरह के रोगों की व्याख्या है. एक आधि और दूसरा व्याधि, लेकिन एक तीसरी बीमारी भी होती है और वो है उपाधि. मतलब किसी पद की बीमारी. उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल भी इसी बीमारी से पीड़ित हैं. उपाधि उन पर इतना हावी है कि वो देश के एक सम्मानित सिंगर को सिंगर नहीं समझते. दलेर मेहंदी जैसे प्रसिद्ध गायक, उनके लिए तुच्छ जैसे ही हैं. अगर ऐसा नहीं होता, तो हजारों लोगों के सामने, भरे मंच पर उनकी बेइज्जती नहीं करते. जिस तरह का व्यवहार मंत्री ने दलेर मेहंदी के साथ किया है, उससे पूरे बॉलीवुड में आक्रोश है. कई बड़े अभिनेता दलेर मेहंदी मंत्री के विरोध में आवाज उठा रहे हैं. ये आवाज भी हम आपको सुनाएंगे लेकिन पहले पूरा मामला समझिए.

हुआ ये कि उत्तराखंड में टिहरी-गढ़वाल जिले के नरेंद्रनगर में कुंजापुरी मेले का आयोजन किया गया था. उसमें दलेर मेहंदी को भी प्रस्तुति देने के लिए बुलाया गया था. दलेर मेहंदी मंच पर प्रस्तुति दे रहे थे और नीचे VIP गैलरी में कुंजापुरी मेले के संरक्षक और मंत्री सुबोध उनियाल बैठे हुए थे. कार्यक्रम शुरू होने के ठीक पांच मिनट बाद मंत्री जी अपनी कुर्सी से उठे और मंच पर पहुंच गए. श्रेष्ठता के भाव से भरे हुए सुबोध उनियाल साबह ने हाथ में माइक लेकर सिंगर दलेर मेहंदी की जमकर फटकार लगाई. मंत्री जी का कहना था कि गाना-गाने की बजाय वो लिप-सिंक क्यों कर रहे हैं? लिप-सिंक मतबल पीछे से गाने का ऑडियो आ रहा है और दलेर मेहंदी सिर्फ होंठ हिला रहे हैं. उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी ठीक से बोल तक नहीं पा रहे हैं. सबसे पहले हम आपको मंच पर हुआ ये सार्वजनिक संवाद सुनाना चाहेंगे.

किस तरह 59 साल के दलेर मेहंदी को मंत्री जी ने फटकार लगाई. इस तरह अपमानित होने के बाद भी दलेर मेहंदी ने गाना गाया और सामने बैठकर सुबोध उनियाल ने गाना सुना भी. सुबोध उनियाल का कहना है कि उन्हें इस बात से आपत्ति थी कि दलेर मेहंदी ठीक से गा नहीं रहे थे और लिप-सिंक कर रहे थे. ये सच है तो भी भरे मंच पर सबके सामने इस तरह बोलने की क्या जरूरत थी? हाथ में माइक लेकर इस तरह का तमाशा करने की क्या आवश्यकता थी? उन्होंने ही तो दलेर मेहंदी को आमंत्रित किया था.

अहंकार में अपमान कर गए सुबोध उनियाल

उन्हें चाहिए था कि वो स्टेज के पीछे बुलाते और पूछते कि दिक्कत क्या है? वो क्यों इस तरह से परफॉर्म कर रहे हैं? माइक ऑफ करके पूछते कि क्यों ठीक से नहीं गा रहे हैं? उन्हें बताते कि आप जिस तरह गा रहे हैं, उससे दर्शक कनेक्ट नहीं पा रहे हैं. आप ठीक से गाइए, लेकिन उत्तराखंड के पांच-पांच विभागों के मंत्री और पांच-पांच बार विधायक रह चुके सुबोध उनियाल साहब ने ऐसा करना बिल्कुल उचित नहीं समझा. वरिष्ठता और प्रतिष्ठा के अहंकार से ग्रस्त सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी का अपमान किया और इससे भी बड़ा दुर्भाग्य ये है कि इतने वरिष्ठ मंत्री जी को यह अहसास ही नहीं है कि उन्होंने जो किया, वो नहीं करना चाहिए था.

35 लाख देकर सम्मान नहीं खरीद लिए थे मंत्री जी

मंत्री जी कह रहे हैं कि दलेर मेहंदी नशे में थे. मित्रो, दलेर मेहंदी नशे में थे या नहीं, ये पता नहीं, लेकिन सुबोध उनियाल साहब शत-प्रतिशत नशे में थे. वो सत्ता के नशे में चूर थे. अगर नशे में चूर नहीं होते तो 59 साल के एक सीनियर कलाकार से इस तरह बदसलूकी नहीं करते और मंत्री जी कह रहे हैं कि गाने के लिए उन्हें 35 लाख रुपये दिए थे. अच्छी बात है कि 35 लाख रुपये दिए थे, लेकिन इसका मतलब ये थोड़े ही है कि आप उनके साथ दुर्व्यवहार करेंगे. आप उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाएंगे? अपनी मर्जी से मंच पर चढ़ेंगे और सबके सामने किसी कलाकार के सम्मान का चीरहरण करेंगे?

पहले से ही पता था, तो रोका क्यों नहीं?

आचार्य चाणक्य का मानना था कि 'जिस प्रकार फल आने पर वृक्ष झुक जाते हैं, उसी प्रकार शक्ति और पद मिलने पर श्रेष्ठ नेताओं को विनम्र हो जाना चाहए', लेकिन दुर्भाग्य ये है कि हमारे देश में कुछ ऐसे नेता हैं, जो पद-प्रतिष्ठा मिलने के बाद सबसे पहले नम्रता को ही तिलांजलि दे देते हैं. कुंजापुरी मेले के अध्यक्ष राज विक्रम सिंह पंवार अपने मंत्री जी के अहंकार को बौद्धिक संरक्षण देते हुए कह रहे हैं कि जब दलेर मेहंदी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, तभी उनके हाव-भाव ठीक नहीं थे. उनका कहना है कि उनके शुरुआती व्यवहार को देखकर ही कुछ असहजता महसूस होने लगी थी. इनका दावा है कि दलेर मेहंदी नशा करके ही कार्यक्रम में आए थे. अगर यह सच है, तब तो कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही उन्हें रोकना और टोकना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. क्यों नहीं किया गया? और जब कार्यक्रम शुरू हुआ, तो मंच पर चढ़कर दलेर मेहंदी से बदतमीजी करके लोगों को क्या दिखाने की कोशिश हुई?

नशे में थे, तो कई घंटे परफॉर्मेंस कैसे दी

मित्रो, जो नशे में होता है ना, वो ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाता है. लड़खड़ाता है, खोया-खोया रहता है. उसकी आंखों की मूवमेंट बताती है कि वो नशे में है, लेकिन दलेर मेहंदी ने इस घटना के बाद कई घंटे तक परफॉर्मेंस दी और सामने बैठकर मंत्री जी ने भी उन्हें देखा और सुना. इसलिए बॉलीवुड वाले भी कह रहे हैं कि नशा करने का आरोप गलत है. ये दावा किया जा रहा है कि दलेर मेहंदी ने शराब पी ही नहीं है. हम आपको सुनाते हैं कि जो लोग उन्हें दशकों से जानते हैं, उनका क्या कहना है.

कई बार दवा का असर भी होता है. इसलिए अगर दलेर मेहंदी बीमार थे, दवा खाकर परफॉर्म करने वाली स्थिति थी, तो उनको भी किसी बड़े कार्यक्रम में परफॉर्म करने से बचना चाहिए था. हालांकि, मंत्री जी ये दावा कर रहे हैं कि वो नशे थे. हम फिर से कह रहे हैं कि दलेर मेहंदी नशे में थे या नहीं, ये अलग विषय है, लेकिन जिस तरह उत्तराखंड के वरिष्ठ मंत्री ने भरे मंच पर एक सीनियर कलाकार के साथ बदतमीजी की है, उसे कैसे जस्टिफाई किया जा सकता है? जो मंत्री जी दलेर मेहंदी से खफा हैं, उन्हीं से उनके इलाके की जनता भी दुखी हो सकती है ना.

57 प्रतिशत विधायक निधि खर्च कर चुके हैं मंत्री जी

उत्तराखंड में लगभग चार महीने बाद चुनाव होना है, लेकिन सुबोध उनियाल ने अब तक केवल 57 प्रतिशत विधायक निधि ही खर्च की है. सोचिए, दलेर मेहंदी पर 35 लाख रुपये खर्च करके क्रोधित होने वाले नेताजी खुद विकास के नाम पर सरकार से मिले आधा फंड ही खर्च कर पाए. सुबोध उनियाल विधायक निधि खर्च करने के मामले में कैबिनेट मंत्रियों में 9वें नंबर पर हैं. अब बताइए कि उनके क्षेत्र के लोग उनसे कितने दुखी होंगे. जिस तरह उन्होंने 35 लाख रुपये खर्च करके दलेह मेहंदी को बुलाया था उसी तरह जनता ने भी तो उन्हें विकास करने के लिए चुना था.

उत्तराखंड स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल

इतना ही नहीं सुबोध उनियाल साहब स्वास्थ्य मंत्री हैं और उत्तराखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 65 प्रतिशत पद खाली हैं. राज्य के 80 CHC में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग 86 प्रतिशत पद खाली हैं. सुबोध उनियाल के स्वास्थ्य मंत्री रहते चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए. अब इसके लिए कहीं किसी मंच पर चढ़कर कोई मंत्री जी को दो-चार बातें सुना दे, तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा? क्योंकि समय पर डॉक्टर नहीं मिलने से जो दुख होता है, वो किसी कार्यक्रम में सिंगर के ठीक से नहीं गाने से होने वाले दुख से कहीं बड़ा होता है. इसलिए सुबोध उनियाल जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता को ऐसी हरकत करने से बचना चाहिए था.

महात्मा गांधी दशकों पहले कह गए थे कि 'विनम्रता के बिना कोई भी सेवा संभव नहीं है. जो लोग सत्ता या पद के नशे में रहते हैं, वे कभी जनता के सच्चे सेवक नहीं बन सकते.'

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About the Author

Tahir Kamran

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Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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