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जब आपको घर में पैसे की जरूरत होती है या इमरजेंसी के समय भारतीयों का सबसे पहला भरोसा उनकी अलमारी में रखे गोल्ड पर होता है. 'सोना गिरवी रखो और तुरंत कैश ले जाओ' यह सुविधा आज करीब-करीब हर बैंक में मिल रही है. यह स्कीम आसान होने के साथ ही सबसे सुरक्षित भी है. लेकिन क्या आपको पता है जिस गोल्ड लोन को सबसे सुरक्षित माना जाता था, अब उसी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. देश की प्रमुख क्रेडिट इंफारमेशन कंपनी ट्रांसयूनियन सीआईबीएल (TransUnion CIBIL) की हालिया रिपोर्ट 'Lending Unlocked: Gold Loans' की तरफ से चौंकाने वाला खुलाया किया गया है. पिछले पांच महीने के दौरान गोल्ड लोन नहीं चुका पाने वालों की तादाद करीब दोगुनी हो चुकी है.
कुल गोल्ड लोन का आंकड़ा 22.5 लाख करोड़ रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है. दूसरी तरफ लोन चुकाने में काफी लोगों के पसीने छूट रहे हैं. आखिर क्यों गोल्ड लोन का पूरा सिनेरियो बदल रहा है? गोल्ड लोन बाजार में आई तेजी का कारण आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं. अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार 90 दिन से ज्यादा समय से पेंडिंग लोन का बकाया का आंकड़ा कुल पोर्टफोलियो का 0.3% हो गया है. आपको यह आंकड़ा छोटा लग सकता है लेकिन आपको बता दें मार्च 2026 में यही आंकड़ा महज 0.2% था. इससे साफ है 5 महीने के अंदर डिफॉल्ट रेट करीब 50% से ज्यादा उछल गया. इस तरह डिफॉल्ट बढ़ना बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के लिए खतरे की बड़ी घंटी माना जाता है.
यदि गोल्ड लोन के ओवरऑल मार्केट साइज की बात करें तो इसमें पिछले तीन साल के दौरान रिकॉर्ड तोड़ इजाफा देखा गया. अगस्त 2023 से लेकर अगस्त 2026 के बीच देश का कुल गोल्ड लोन आउटस्टैंडिंग तीन गुना बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया. लोग पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने की बजाय गोल्ड लोन पर फोकस कर रहे हैं. बैंकों और NBFC की तरफ से भी जमकर गोल्ड लोन बांटे जा रहे हैं. जिस रफ्तार से लोन बांटे गए उसी रफ्तार से अब रीपेमेंट का इश्यू भी सामने आ रहा है.
रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि लोन लेने वाले लोगों का तरीका बदल गया है. जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के तीन महीने के दौरान बांटे गए कुल गोल्ड लोन की वैल्यू 12% बढ़कर 8.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. लेकिन हैरान करने वाला आंकड़ा यह है कि इस दौरान दिये कुल लोन की संख्या में 15% की गिरावट आई है. इस दौरान करीब 3.7 करोड़ गोल्ड लोन बांटे गए, जबकि लोन लेने वाले यूनीक बॉरोअर्स की संख्या 2.4 करोड़ पर बनी रही. इसका मतलब है भले ही लोन लेने वाले नए लोग कम आए हो लेकिन जो लोन ले रहे हैं, वे अब छोटी रकम के बजाय बड़ा लोन ले रहे हैं.
गोल्ड लोन के बढ़ते चलन के बीच Gen Z (1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले) पर बढ़ रहा है. Cibil के एमडी और CEO भावेश जैन के अनुसार पिछले 5 महीने के दौरान गोल्ड लोन लेने वाले Gen Z की संख्या 19% बढ़ गई है. आज का यूथ स्टार्टअप्स, फ्रीलांसिंग, गैजेट्स, लाइफस्टाइल और पढ़ाई के लिए जल्दी फंड जुटाने के रास्ते तलाश रहा है. क्रेडिट स्कोर खराब होने या सैलरी स्लिप नहीं होने पर युवा अपना सोना बैंक में रखकर पैसा ले रहा है.
जब कोई उधार लेने वाला अपनी ईएमआई या ब्याज नहीं चुका पाता और लोन का 90 दिन से ऊपर ओवरड्यू हो जाता है तो बैंक उसे NPA घोषित कर देता है. इसके बाद बैंक अपना पैसा वसूलने के लिए गिरवी रखे गए सोने की नीलामी करते हैं. गोल्ड के रेट फिलहाल इंटरनेशनल और डोमेस्टिक मार्केट में काफी ऊंचे लेवल पर बने हुए हैं. यही कारण है कि बैंकों को अपना पैसा वसूलने में ज्यादा परेशानी नहीं आती.