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आप जब सोना खरीदने जाते हैं तो इसकी प्योरिटी को लेकर आपके मन में हमेशा सवाल बना रहता है. लेकिन जरा सोचिए, यदि बााजर में ऐसा सोना आ जाए जो दिखने में एकदम असली लगे और वो एसिड टेस्ट और टचस्टोन में भी पास हो जाए. लेकिन पिघलाने पर उसकी असलियत खुले और पता चले कि उसमें अंदर सोने के बजाय कोई और मेटल भरी है. सुनने में यह आपको भले ही अजीब लग रहा है लेकिन ज्वैलरी मार्केट में कुछ इस तरह का खेल शुरू हो गया है. जी हां, इस खेल के सामने आने के बाद बुलियन मार्केट और ज्वैलर्स की नींद उड़ी हुई है.
सोने में मिलावट के इस खेल से प्योरिटी चेक करने वाले भी गच्चा खा रहे हैं. आसान भाषा में समझते हैं कैसे भारी धातुओं के जरिये सोने के वेट और प्योरिटी को लेकर यह खतरनाक खेल खेला जा रहा है? सोने की प्योरिटी को लेकर चल रहे इस खेल से बड़े-बड़े ज्वैलर्स और सर्राफा कारोबारियों के खान खड़े हो गए हैं. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार इस स्कैम में शातिर सोने में हेवी मेटल के बारीक पाउडर को मिला रहे हैं. इससे सोने का वजन बढ़ जाता है, लेकिन असली गोल्ड की प्योरिटी कम हो जाती है. बाजार में इस मिलावट को 'गोल्ड पाउडर' नाम से जाना जा रहा है. हैरानी की बात यह है कि जांच में यह मिलावटी गोल्ड बिल्कुल असली जैसा दिखाई देता है.
गोल्ड की प्योरिटी चेक करने के लिए लंबे समय से एसिड और टचस्टोन (पत्थर पर घिसकर) टेस्ट किया जाता है. लेकिन नए फर्जीवाड़े से सबसे बड़ी मुसीबत यह सामने आ रही है कि सोने को परखने के पुराने तरीके इस मिलावट को पकड़ने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह मिलावटी सोना स्टैंडर्ड एसिड टेस्ट और टचस्टोन एग्जामिनेशन को पूरी तरह पास कर लेता है. इससे किसी को भी यही लगता है कि सोना सही है लेकिन फ्रॉड का पता तब चलता है जब सोने को ज्वैलरी बनाने के लिए भट्टी में पिघलाया जाता है. पिघलाने के बाद जो सोना हाथ में आता है, वो उम्मीद से काफी कम होता है. यानी पिघलाने से पहले वजन ऊपर से पूरा दिखता है, लेकिन अंदर खेल हो चुका होता है.
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब इंदौर सर्राफा बाजार में काम करने वाले कई ज्वैलरी कारीगरों ने स्थानीय कारोबारियों से इसकी शिकायत की. शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इंदौर सिल्वर, गोल्ड एंड ज्वैलरी ट्रेडर्स एसोसिएशन ने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है. इस मीटिंग में एसोसिएशन ने तमाम बुलियन डीलर्स और ब्रोकर्स को निर्देश दिया है कि वे किसी भी तरह का बड़ा लेनदेन करने से पहले सोने की प्योरिटी की बारीकी से जांच कर लें. इस घटना के सामने आने के बाद देश के सर्राफा कारोबारियों ने अपने टेस्टिंग के तरीकों की समीक्षा करना शुरू कर दिया है.
सर्राफा बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से सोने में रूथेनियम (Ruthenium), इरीडियम (Iridium) और ओस्मियम (Osmium) जैसी भारी धातु को मिलाने की शिकायत मिल रही है. इन धातुओं की डेंसिटी गोल्ड से काफी ज्यादा होती है. इसका फायदा उठाकर मिलावट करने वाले कम मात्रा में भी वजन काफी बढ़ा लेते हैं. यही कारण है कि एसिड टेस्ट, टचस्टोन और कैरट-टेस्टिंग मशीन तक इस मिलावट को पकड़ नहीं पातीं. ज्वैलर्स की तरफ से भी इस पर चिंता जताई जा रही है. यह फर्जी गोल्ड पाउडर महाराष्ट्र और वेस्ट बंगाल के जरिये भारतीय बाजार में एंट्री कर रहा है.