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शादी का सीजन हो या फिर फेस्टिव सीजन की शुरुआत भारतीयों के बीच सोना खरीदन शुभ माना जाता है. भारतीयों के बीच सोना केवल महंगी धातु नहीं बल्कि इमोशन है. लेकिन क्या आपको पता है अब भारतीयों के सोना खरीदने के चलन में काफी गिरावट आई है. जी हां, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की हालिया रिपोर्ट तो यही इशारा कर रही है. साल 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) के बीच देश में सोने की डिमांड 29% तक कम हो गई है. सोने की महंगी कीमत, इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने और पीएम मोदी की अपील के बाद लोग सोना खरीदने से पहले काफी सोच रहे हैं.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की तरफ से तीसरी तिमाही (Q3) की गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स के अनुसार इस साल जुलाई से सितंबर के बीच भारत में 162.5 टन सोने की डिमांड रही. यदि इसकी तुलना पिछले साल (2025) की इसी तिमाही से करें तो उस सयम 229.8 टन सोने की बिक्री हुई थी. यानी कुल मिलाकर डिमांड में 29% की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, 2026 की दूसरी तिमाही से तुलना करें तो इसमें 25% का सुधार जरूर दिखा है. लेकिन साल-दर-साल के आंकड़ों पर गौर करें तो आम जनता सोने में इस समय बहुत सोच-विचारकर पैसा लगा रही है. WGC की तरफ से अनुमान जताया गया कि पूरे साल के दौरान भारत में सोने की डिमांड 625 से 675 टन के बीच सिमट सकती है.
शायद आप भी सोच रहे हो कि जब लोगों ने सोना कम खरीदा तो फिर बाजार में मंदी क्यों नहीं आई? आपको बता दें भले ही वजन के हिसाब से सोने की खरीदारी 29% घट गई हो लेकिन रुपये की वैल्यू में यह 3% बढ़कर 2,41,900 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. कुछ इसी तरह का ट्रेंड 2026 के पहले नौ महीने के दौरान भी देखने को मिला. इस दौरान कुल डिमांड 12% गिरकर 444 टन पर आ गई लेकिन इसका कुल दाम 38% उछलकर 6,688 अरब पर पहुंच गया. इसका सीधा सा मतलब यही है कि सोना इतना महंगा हो गया है कि लोग अपनी जेब से पैसे तो पहले से भी ज्यादा निकाल रहे हैं लेकिन बदले में उन्हें सोना बहुत कम मिल रहा है.
भारतीय परिवार और महिलाओं में सोने की ज्वैलरी को लेकर हमेशा से ही क्रेज रहा है. लेकिन इसकी बढ़ती कीमत के बीच यहां पर भी साफ असर देखने को मिल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार तीसरी तिमाही में ज्वेलरी की कुल डिमांड 20% घटकर 99.9 टन रह गई. पिछले साल इसी समय यह डिमांड 125 टन की थी. लेकिन कीमत बढ़ने का असर यहां भी देखा गया. ज्वैलरी की डिमांड में भले ही 20% की गिरावट आई है लेकिन कीमत के हिसाब से यह 16% बढ़कर 1,48,700 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन का कहना है कि भारतीय ग्राहक अभी भी सोने को पहली पसंद मानते हैं. लेकिन अब वे अपने बजट को ध्यान में रखकर सोने की मात्रा में कटौती कर रहे हैं. इसके साथ ही वह अपने बजट पर भी ध्यान दे रहे हैं.
सोने की महंगाई ने केवल ज्वैलरी की खरीदारी को ही कम नहीं किया बल्कि लोगों ने निवेश से भी दूरी बनाई है. इन्वेस्टमेंट के लिहाज से खरीदी जाने वाली गोल्ड बार और सिक्कों की डिमांड भी नीचे आ गई. जुलाई से सितंबर तिमाही के बीच में बार और कॉइन की डिमांड 40% कम होकर 55 टन पर आ गई. यह आंकड़ा पिछले साल 91.6 टन पर था. इतना ही नहीं डिजिटली गोल्ड इन्वेस्टमेंट यानी गोल्ड ETF में भी लोगों ने रुझान कम दिखाया. गोल्ड ETF की डिमांड 50% घटकर 5.3 टन पर आ गई. इससे यह साफ है कि रिटेल इन्वेस्टर के साथ-साथ बड़े निवेशक भी कीमत बढ़ने के कारण नया निवेश करने से बच रहे हैं.
आमतौर पर आरबीआई (RBI) अपने फॉरेक्स रिजर्व को मजबूत करने के लिए समय-समय पर सोना खरीरता है. लेकिन WGC की रिपोर्ट के अनुसार साल 2026 की तीसरी तिमाही के दौरान RBI ने एक ग्राम सोना भी नहीं खरीदा. पिछले साल इसी तिमाही में केंद्रीय बैंक की तरफ से 0.2 टन सोना खरीदा गया था. दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंकों की बात करें तो चीन की तरफ से लगातार सोने की खरीदारी की जा रही है. लेकिन आरबीआई की तरफ से सोने की खरीदारी नहीं किया जाना इस बात का संकेत देता है कि ग्लोबल लेवल पर सोने के दाम इतने ज्यादा हैं कि केंद्रीय बैंक भी सही समय का इंतजार कर रहा है.
जब सोने का रेट ज्यादा बढ़ जाता है तो लोग नया गोल्ड खरीदने के बजाय पुराना सोना बेचकर या एक्सचेंज करके काम चलाते हैं. लेकिन इस बार गोल्ड रीसाइक्लिंग में भी 12% की गिरावट देखी जा रही है और यह गिरकर 19.2 टन पर आ गई. दूसरी तरफ, देश में सोने के कुल आयात की बात करें तो इसमें 46% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. जुलाई-सितंबर तिमाही में महज 114.1 टन सोने का ही भारत में इम्पोर्ट किया गया. पिछले साल इसी दौरान 211.9 टन सोना बाहर से आया था. इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने और घरेलू बाजार में मांग में आई कमी के कारण व्यापारियों ने आयात काफी कम कर दिया है.
आम आदमी का सबसे बढ़ा सवाल यही रहता है कि आने वाले दिनों में सोना खरीदना चाहिए या नहीं? यह सस्ता होगा या महंगा होगा? जानकारों का मानना है कि ग्लोबल अनिश्चितता और महंगाई के दौर में सोने को हमेशा सुरक्षित विकल्प माना गया है. भारत में भले ही सोने की मांग कम हो गई है लेकिन इसकी वैल्यू में लगातार बढ़ोतरी देखने के लिए मिल रही है. यदि आप शादी या पर्सनल यूज के लिए सोना खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो SIP या डिजिटल गोल्ड के जरिये खरीदारी करना समझदारी भरा फैसला हो सकता है. सर्राफा बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि त्योहारों और शादियों के आने वाले सीजन में मांग सुधर सकती है.
(डिस्क्लेमर: सोने-चांदी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. अगर आप गोल्ड या सिल्वर में निवेश करना चाहते हैं, तो वित्तीय जानकारों की सलाह जरूर लें.)