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ना रुका मानसून सत्र, ना थमा सियासी तूफानः रिकॉर्ड 83 दिनों के 'संसद सन्नाटे' से बड़े सियासी तूफान की आशंका

सत्र की आखिरी बैठक के 83 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसकी औपचारिक विदाई अब तक नहीं हुई है. इससे संसद के दरवाजे पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं. इससे पहले 1989 में ऐसा देखने को मिला था. उस वक्त दोनों सदन 53 दिन ऐसी स्थिति में रहे थे.

ना रुका मानसून सत्र, ना थमा सियासी तूफानः रिकॉर्ड 83 दिनों के 'संसद सन्नाटे' से बड़े सियासी तूफान की आशंका
Image Credit: 83 दिन से बाद भी खत्म नहीं हुआ संसद का मानसूत्र

देश में मौसम का मिजाज तो बदल गया है, लेकिन सियासी तापमान में कोई गिरावट नहीं आई है. संसद का 'मानसून सत्र' समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है. 20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू हुआ था और 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था. सत्र की आखिरी बैठक के 83 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसकी औपचारिक विदाई अब तक नहीं हुई है. राष्ट्रपति की ओर से अभी तक 'सत्रावसान' की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, इससे संसद के दरवाजे पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं. इसी के साथ 39 साल पुराना रिकॉर्ड भी ध्वस्त हो गया है. इससे पहले 1989 में ऐसा देखने को मिला था. उस वक्त दोनों सदन 53 दिन ऐसी स्थिति में रहे थे. इस असामान्य घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं छेड़ दी हैं. सियासी गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार विशेष सत्र बुला सकती है.

'सत्रावसान' को लेकर अटकलबाजी जारी

बता दें कि 'सत्रावसान' नहीं होने पर सरकार के पास जरूरत पड़ने पर इसी सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प खुला रहता है. यही वजह है कि सरकार की ओर से विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं. 

Parliament Session Chart

इस सत्र में कितना काम हुआ था?

पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मानसून सत्र नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन की भेंट चढ़ गया था. सत्र के 25 दिनों की अवधि में कुल 19 बैठकें हुई थीं. इस दौरान लोकसभा और राज्यसभा की ओर से कुल 12 विधेयक पारित किए गए. विपक्ष की आपत्ति के बाद विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 (FCRA Amendment Bill 2026) को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के भेज दिया गया था.

विशेष सत्र बुलाए जाने की आशंका

सियासी गलियारों में चर्चा है कि परिसीमन (delimitation) और महिला आरक्षण कानून से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार की ओर से विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है. 

कांग्रेस ने क्या आशंका जताई?

'सत्रावसान' नहीं होने पर कांग्रेस के सांसद जयराम रमेश ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि गृह मंत्री अमित शाह विशेष सत्र के जरिए परिसीमन विधेयक आगे बढ़ाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष को इन प्रस्तावों की जानकारी देनी चाहिए और सर्वदलीय बैठक बुलाकर चर्चा करनी चाहिए.

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About the Author

K. Raj Mishra

K. Raj Mishra

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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