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देश के मिड सेग्मेंट वाले फेडरल बैंक ने दूसरी तिमाही के दौरान प्रॉफिट के मामले में रिकॉर्ड कायम कर दिया है. सितंबर तिमाही (Q2) के दौरान बैंक के नेट प्रॉफिट (Net Profit) में सालाना बेस पर 45% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके साथ ही बैंक का मुनाफा बढ़कर 1,386 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. बैंक के दमदार प्रदर्शन से निवेशक भी गदगद हैं. सोमवार को फेडरल बैंक के शेयर में तेजी दिखाई देने की उम्मीद है. बैंकिंग सेक्टर पर इस समय फंडिंग की कॉस्ट बढ़ने के कारण दिग्गज बैंकों पर मार्जिन का दबाव है. इसके उलट फेडरल बैंक ने नेट इंटरेस्ट मार्जिन में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है.
आज जिस फेडरल बैंक की पूरी बैंकिंग इंडस्ट्री में चर्चा हो रही है, उसके बारे में आपको शायद ही यह पता हो कि एक समय यह बैंक डूबने की कगार पर पहुंच गया था. फिर कैसे और किस तरह अपने बिजनेस को खड़ा किया. बैंक की इस पूरी कामयाबी के पीछे एक शख्स का हाथ था, उसका नाम है कुलांगरा पाउलो होर्मिस. केपी होर्मिस के नाम से पहचाने जाने वाले डूबते हुए फेडरल बैंक को मार्केट में खास पहचान दिलाई. आज उसकी का नतीजा है कि बैंक का मार्केट कैप बढ़कर 83000 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. होर्मिस का जन्म 18 अक्टूबर 1917 को केरल के मूक्कन्नूर में हुआ था.
उस समय फेडरल बैंक का नाम त्रावणकोर फेडरल बैंक था और इसने प्रॉफिट में आने के लिए खेती और किसानों की तरफ से फोकस किया. लेकिन बैंक को इसमें कामयाबी नहीं मिली. धीरे-धीरे हालात ये हो गए कि बैंक दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया. उस समय पेरुम्बावूर के मुंसिफ कोर्ट में वकील के तौर पर करियर शुरू करने वाले होर्मिस ने 1945 में त्रावणकोर फेडरल बैंक में हिस्सेदारी खरीदी ली. होर्मिस की जड़े गांव से थी तो उन्होंने 1944 में अपनी नौकरी छोड़ दी थी और त्रावणकोर फेडरल बैंक के शेयर खरीदने का फैसला कर लिया था.
होर्मिस की मेहनत का परिणाम रहा कि अगले 34 साल तक उनकी लीडरशिप में फेडरल बैंक की देश में 285 ब्रांच खुल गईं. बाद में 1947 में बैंक का नाम बदलकर 'द फेडरल बैंक लिमिटेड' किया गया. अपने 34 साल के करियर के दौरान होर्मिस ने एक ब्रांच वाले बैंक से इसको 285 ब्रांच वाला बड़ा बैंक बना दिया. होर्मिस ने जिस समय नौकरी छोड़ने का फैसला किया था उस समय बैंक की शेयर कैपिटल 5,000 रुपये से बढ़कर सीधा 71,000 रुपये पर पहुंच गई थी.
बैंक का कंट्रोलिंग स्टेक लेने के बाद होर्मिस ने सबसे पहले नीदमपुरम ब्रांच को शिफ्ट करके अलुवा (केरल) में खोला. इसके बाद लोकेशन और नाम दोनों में बदलाव किया गया. 1945 में बैंक का नाम बदलकर फेडरल बैंक (Federal Bank) कर दिया गया. उस समय केरल के बैंकों में करीज (Kuries) का जबरदस्त चलन था. इसमें बोली लगाने वालों को 50 प्रतिशत का डिस्काउंट देकर चिट-फंड में हिस्सेदारी लेने की परमिशन थी. 1949 में फेडरल बैंक को बैंकिंग लाइसेंस मिला तो होर्मिस ने किसानों के लिए करीज को शुरू कर दिया.
फेडरल बैंक की कामयाबी का सफर जारी रहा और कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं. उस समय बैंक की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की जमा राशि हो गई. इसके बाद बैंक के आईपीओ (IPO) को भी निवेशकों का जबदस्त रिस्पांस मिला.
16 अक्टूबर 2026 को बंद हुए कारोबारी सत्र के दौरान बैंक के शेयर में तेजी देखी गई और यह 337 रुपये पर बंद हुआ. शेयर में तेजी के साथ ही बैंक का मार्केट कैप बढ़कर 83 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गया. बैंक के शेयर का 52 हफ्ते का हाई लेवल 364.95 रुपये और लो लेवल 211.65 रुपये है. बैंक ने 2013 में ई-पासबुक लॉन्च की थी और इसे फेडबुक नाम दिया गया. फेडरल बैंक की आज देशभर के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में करीब 1700 ब्रांच हैं. बैंक के मौजूदा समय में करीब दो करोड़ ग्राहक हैं.
फेडरल बैंक की सितंबर तिमाही की बात करें तो HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank के मार्जिन में गिरावट देखने को मिली है. इन बैंकों को जमा की हायर कॉस्ट और मार्केट कंप्टीशन का सामना करना पड़ा. ऐसे में फेडरल बैंक का 45% का प्रॉफिट जंप और मार्जिन में 26 बेसिस प्वाइंट की बढ़त से यह साफ है कि बैंक की बैलेंस शीट बेहद मजबूत हालत में है.