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बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश जा रहा: फरक्का जल संधि पर फिर भड़की जेडीयू, डिप्टी सीएम ने कही ये बात

फरक्का जलसंधि को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता में रहते हुए भी आवाज बुलंद की थी और अब चूंकि वे पद पर नहीं हैं तो उनकी बातों को जनता के बीच पहुंचाया जा रहा है. इसलिए इस कार्यक्रम का नाम नीतीश संवाद रखा गया है.

Edited By Sunil Mishra
Published: Oct 08, 2026, 06:06 PM IST | Updated: Oct 08, 2026, 06:17 PM IST
Image Credit: समस्तीपुर में गुरुवार को नीतीश संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. (Video Grab)
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फरक्का जल संधि को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड फिर से भड़क गई है. बिहार के डि​प्टी सीएम और जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने इस संधि पर पुनर्विचार की मांग की है. उन्होंने समस्तीपुर में आयोजित नीतीश संवाद 2.0 कार्यक्रम में तीन पीरियड में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ने की बाध्यता को खत्म करने की वकालत की. उन्होंने दोटूक कहा कि फरक्का जलसंधि बिहार के हित में नहीं है. इस दौरान जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि बिहार अपने हिस्से का पानी बांग्लादेश को दे रहा है.

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राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जलसंधि को लेकर यदि भविष्य में कोई समझौता होता है तो उसमें 2050 तक बिहार की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि फरक्का जलसंधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. गर्मी के मौसम में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जाता है. इससे राज्य में जल संकट की स्थिति पैदा होती है.

संजय झा ने कहा कि संधि के समय बिहार के हितों का ध्यान नहीं रखा गया. इसका असर किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल और अन्य जल जरूरतों पर पड़ रहा है. लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य भी इससे प्रभावित हो सकता है. बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि जदयू के अभियान का असर अब दिखाई दे रहा है, जो राजनीतिक दल फरक्का जलसंधि के समय इस मुद्दे पर चुप थे, वे भी अब इसके विरोध में आवाज उठा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए बिहार को तीन पीरियड में 1,500 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ता है. इससे राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनती है. उन्होंने कहा कि बिहार से तीन पीरियड में पानी छोड़ने की बाध्यता समाप्त की जानी चाहिए. इस पानी का उपयोग बिहार में औद्योगिक विकास और सिंचाई जैसी जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है.

रिपोर्ट: मंटून कुमार रॉय

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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