जनता दल यूनाइटेड नहीं, जनता दल नीतीश: बख्तियारपुर के बाद पार्टी के नाम पर सियासत, संजय झा ने कहा, पार्टी का नाम बदलना चाहिए
1994 में नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नांडीज के साथ मिलकर समता पार्टी बनाई थी. 2003 में जब शरद यादव भी साथ आ गए तो जनता दल यूनाइटेड नाम दिया गया था. अब अगर संजय कुमार झा की मांग मान ली जाती है तो पार्टी का नाम जनता दल नीतीश हो सकता है.
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे और सम्राट चौधरी सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने बख्तियारपुर का नाम बदलकर नीतीश नगर करने की मांग क्या की, प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया. राजनीतिक दलों की ओर से तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. कांग्रेस की ओर से कुछ ज्यादा ही तीखी प्रतिक्रिया आई. अब जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने एक कदम आगे जाकर पार्टी का ही नाम बदलने की मांग कर दी है. उनकी मांग है कि जनता दल यूनाइटेड का नाम बदलकर जनता दल नीतीश कर दिया जाना चाहिए.
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बिहार के खगड़िया में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय कुमार झा ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा से यह आग्रह किया. संजय झा ने कहा,
अब जनता दल यूनाइटेड का नाम बदलकर जनता दल नीतीश कर देना चाहिए, क्योंकि पूरे देश में पार्टी की पहचान केवल नीतीश कुमार जी के नाम और काम से है. जब पार्टी का अस्तित्व और पहचान ही नीतीश कुमार जी हैं तो फिर इसका नाम भी जनता दल नीतीश होना चाहिए.
संजय कुमार झा के इस प्रस्ताव का मंच पर मौजूद नेताओं और सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया. यह चर्चा नीतीश नगर या फिर नीतीशपुर से शुरू हुई थी और अब यह जनता दल नीतीश तक पहुंच चुकी है. हाल ही में जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं ने बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर नीतीशपुर या नीतीश नगर करने की मांग की थी. मंत्री संतोष कुमार सुमन ने इस प्रस्ताव का समर्थन भी किया था. अभी यह चर्चा थमी भी नहीं थी कि संजय कुमार झा के बयान ने बिहार का सियासी पारा और बढ़ा दिया है.
वरिष्ठ पत्रकार और जी बिहार के स्थानीय संपादक स्वप्निल सोनल का कहना है कि चूंकि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री नहीं हैं और धीरे धीरे सम्राट चौधरी सरकार के मुखिया के तौर पर प्रभावी हो रहे हैं, ऐसे में नीतीश कुमार के कामों को बिहार की जनता के सामने प्रासंगिक रखने के लिए ये सब दांवपेच चले जा रहे हैं. पार्टी नहीं चाहती कि नीतीश कुमार के कामों को जनता भूल पाए.
राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है. कांग्रेस ने तो इसे पार्टी के भीतर व्यक्ति पूजा और अंध चापलूसी की पराकाष्ठा करार दिया है. दोनों विपक्षी दलों का कहना है कि जनता दल यूनाइटेड अपने मूल सिद्धांतों को भूलकर एक चेहरे तक सिमट चुकी है.