SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

आंदोलन दबाने को आए 62.52 करोड़: बिहार में सम्राट सरकार की 'वज्र नीति' पर मचा शोर

बिहार में हाल-फिलहाल में काफी धरना-प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें काफी हिंसा भी देखने को मिली. लगातार हो रहे हिंसक प्रदर्शनों में कानून-व्यवस्था को संभालना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है. इस सबके बीच सम्राट चौधरी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने भीड़ नियंत्रण और दंगों से निपटने के लिए 30 वाटर कैनन और 86 एंटी-रायट ‘वज्र’ वाहनों की खरीद को मंजूरी दी है.

Reported By Zee Bihar Network Edited By K. Raj Mishra
Published: Oct 01, 2026, 07:01 AM IST | Updated: Oct 01, 2026, 07:49 AM IST
Image Credit: ₹62.52 करोड़ से 30 नए वाटर कैनन और 86 वज्र वाहन खरीदेगी सम्राट सरकार (Zee Media)
Join

महात्मा गांधी का विचार है कि सत्याग्रह और शांतिपूर्ण विरोध करना, हर नागरिक का जन्मसिद्ध अधिकार है. जब अन्याय कानून बन जाता है, तो विरोध करना कर्तव्य बन जाता है. विरोध की आवाज को सम्मान देना लोकतंत्र का सबसे पहला और जरूरी गुण है. डेमोक्रेसी की पहचान ही यही है कि सरकार की नीतियों से नाराज लोग सही तरीके से सड़क पर उतर कर विरोध कर सकते हैं, लेकिन बिहार सरकार पर आरोप लग रहा है कि वो विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने की तैयारी कर रही है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अब बिहार की नई 'वज्र नीति' लेकर आए हैं. ये वज्र नीति क्या है, इसे समझने के लिए आपको सम्राट कैबिनेट से आई नई जानकारी जानना जरूरी है.

62.52 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बुधवार (30 सितंबर) को कैबिनेट की बैठक हुई. इस बैठक में 86 नए वज्र वाहन और 30 वाटर कैनन खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. एक वॉटर कैनन की कीमत 88 लाख रुपये होगी, यानी इन पर कुल 26.40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. वहीं, एक 'वज्र वाहन' की कीमत 42 लाख रुपये तय की गई है. इस तरह से 86 नए वज्र वाहनों की खरीद पर 36.12 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस तरह से इस योजना पर कुल 62.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे. सरकार का कहना है कि इन नए वज्र वाहनों और वाटर कैनन का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जाएगा.

वज्र वाहन क्या होता है?

वाटर कैनन तो आप आसानी से समझ गए होंगे. वज्र वाहन थोड़ा जटिल शब्द है. इसे सरल तरीके से समझते हैं. वज्र का शाब्दिक अर्थ कठोर और अभेद्य होता है. आपने प्रदर्शन के दौरान पुलिस को एक खास तरह की गाड़ी का इस्तेमाल करते देखा होगा. इसे वज्र वाहन कहा जाता है. ये गाडियां पत्थर की तरह मजबूत होती हैं. गाड़ी चारों तरफ से बेहद मजबूत जाली और बख्तरबंद ढांचे से सुरक्षित होती है. इसकी खिड़कियों पर लोहे की मजबूत जाली लगी होती है ताकि अगर उग्र भीड़ गाड़ी पर पथराव करे या कोई सामान फेंककर मारे, तो अंदर बैठे पुलिसकर्मियों को कोई चोट न पहुंचे. मतलब ये गाड़ियां भीड़ की हिंसा से पुलिस को सुरक्षित रखती है. बिहार सरकार अब ऐसी ही 86 गाडियां पुलिस के लिए खरीद रही है.

आंदोलन की आवाज दबाने की कोशिश?

वैसे तो बिहार को आंदोलन और प्रदर्शन की धरती कहा जाता है. गांधी जी के आंदोलन से लेकर जेपी आंदोलन तक, बिहार में आंदोलन का इतिहास समृद्ध है. लेकिन पिछले कुछ दिनों में प्रदेश में एक के बाद एक करके कई आंदोलन देखने को मिले, जिनमें हिंसा भी देखने को मिली. जुलाई में पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान 13 नागरिक और 91 पुलिसकर्मी घायल हुए थे. इस दौरान सिवान जिले के तीन लोग गोली लगने से घायल हुए थे, जिनमें एक 17 वर्षीय नाबालिग भी शामिल था. बीते 15 सितंबर को ही राजधानी पटना में जोरदार प्रदर्शन हुआ था. दारोगा भर्ती के अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर काफी उग्र प्रदर्शन किया था. इस दौरान पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई थी. प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करने के बाद लाठीचार्ज तक करना पड़ा था, जिसमें कई छात्र घायल हो गए थे.

हिंसक आंदोलन से बिगड़ती है कानून-व्यवस्था

अगस्त के महीने में पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों ने पटना मे प्रदर्शन किया था. 25 अगस्त को TRE-4 शिक्षक भर्ती के लिए युवाओं ने पटना के डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शन किया था. इन्हें रोकने के लिए वज्र वाहन तैनात किए गए थे, वाटर कैनन का प्रयोग किया गया था. अगस्त में ही गर्दनीबाग में लाइब्रेरियन भर्ती और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन हुआ था. मई के महीने में TRE-4 शिक्षक भर्ती के लिए युवाओं ने BPSC घेराव किया था. तब पटना के जेपी गोलंबर पर लाठीचार्ज हुआ था. हर प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सख्ती करनी पड़ी, कहीं लाठी चली तो कहीं वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. सरकार का कहना है कि जब प्रदर्शनकारी उग्र हो जाते हैं तो कानून-व्यवस्था का प्रश्न खड़ा हो जाता है, इसलिए वज्र वाहन और वाटर कैनन की खरीद जरूरी है.

कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दलील

महाभारत में महात्मा विदुर ने कहा है कि राजा या शासन की गलत नीतियों पर पर्दा डालना या डर के मारे चुप रहना राज्य के विनाश का कारण बनता है. प्रजा का विरोध ही वह अंकुश है, जो राजा को निरंकुश होने से रोकता है. वर्ष 1917 में महात्मा गांधी ने चंपारण से नील की खेती के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था. 1929 में स्वामी सहजानंद सरस्वती ने सोनपुर से किसान आंदोलन की शुरुआत की थी. वर्ष 1974 में बिहार की धरती से ही जयप्रकाश नारायण का संपूर्ण क्रांति वाला आंदोलन शुरू हुआ था. ये सभी आंदोलन बड़े राजनीतिक और सामाजिक उद्देश्य को लेकर बहुत अनुशासित तरीके से हुए थे. इन आंदोलन ने देश की राजनीति और समाज को नई दिशा दी. लेकिन पिछले कुछ सालों में आंदोलन के दौरान उपद्रव सामान्य बात हो गई है. आंदोलन की अनुमति तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर ली जाती है, लेकिन सड़क पर उतरते ही कुछ लोग बेकाबू हो जाते हैं. भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवी तोड़फोड़ करते हैं. पुलिस से झड़प होती है और चंद उपद्रवी कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाते हैं. इसलिए बिहार सरकार कह रही है कि कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्रज वाहन और वाटर कैनन खरीदना जरूरी है.

सरकार पर विपक्ष का अटैक

पिछले कुछ दिनों में पटना में जैसे आंदोलन हुए हैं, उसे देखकर सरकार चिंतित है. हालांकि विपक्षी नेता कह रहे हैं कि बहाना चाहे कुछ भी बनाया जाए, असल मंशा विरोध की आवाज को कुचलना है. सत्तापक्ष का आरोप है कि विपक्ष अपनी राजनीतिक लड़ाई को छात्रों के नाम पर आगे बढ़ा रहा है. इसपर हम कुछ नहीं कहेंगे, लेकिन प्रदर्शन से जुड़े संवैधानिक अधिकार की जानकारी जरूर देंगे.

संविधान में क्या लिखा है?

संविधान का अनुच्छेद 19 (1) (A) बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है. इसमें पोस्टर, नारे और प्रदर्शन शामिल हैं. इस अधिकार पर संविधान का अनुच्छेद 19(2) एक शर्त भी लगाता है. अभिव्यक्ति की आजादी देश की संप्रुभता, सुरक्षा, लोक व्यवस्था के खिलाफ नहीं होनी चाहिए. संविधान का अनुच्छेद 19(1) (B) शांतिपूर्ण और बिना हथियार इकट्ठा होने का अधिकार देता है. इस अधिकार पर संविधान के अनुच्छेद 19(3) के मुताबिक, शर्त यह है कि प्रदर्शन देश की संप्रभुता और अखंड़ता के खिलाफ नहीं होना चाहिए. संविधान रचयिता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने तो साफ लिखा है कि देश के हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध का अधिकार देता है, लेकिन शर्त यह है कि प्रदर्शन देश की संप्रभुता, सुरक्षा और लोक व्यवस्था यानी कानून व्यवस्था के लिए खतरा ना हो. ये बहुत महत्वपूर्ण शर्त है.

कानून का डर, सबसे जरूरी पहलू

यहां समझने की बात ये भी है कि बिहार सरकार ने प्रदर्शन पर रोक लगाने की बात नहीं कही है. ये कहा है कि कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. कानून व्यवस्था हर राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है. बिहार सरकार इस मोर्चे पर मजबूत दिखना चाहती है, इसलिए पुलिस के लिए व्रज वाहन और वाटर कैनन खरीदा जा रहा है. हर सरकार ऐसे फैसले करती है. हर पार्टी अपनी राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से ऐसे फैसलों की प्रशंसा और निंदा करती है. ऐसे फैसलों पर राजनीतिक दलों का पक्ष इस बात से तय होता है कि वो सत्ता में हैं या विपक्ष में.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

ZEENEWS TRENDING STORIES