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महिला के ऊपर लेटना और उसका मुंह बंद करना बलात्कार की कोशिश नहीं: पटना हाई कोर्ट

बलात्कार की कोशिश के आरोपी को एक धारा में चार साल और दूसरी में छह महीने की सजा हुई थी, जो साथ चलनी थी. पटना हाई कोर्ट ने आरोपी की सजा बदल दी और जितने दिन वह सजा काट चुकाथा, उतने ही दिन तक सीमित कर दिया.

महिला के ऊपर लेटना और उसका मुंह बंद करना बलात्कार की कोशिश नहीं: पटना हाई कोर्ट
Image Credit: पटना हाई कोर्ट (File Photo)

'किसी महिला के ऊपर लेटना और उसका मुंह बंद कर देना बलात्कार की कोशिश नहीं मानी जा सकती, जब तक कि पेनिट्रेशन जैसा कोई कृत्य शामिल न हो. सबूतों से यह साबित होना चाहिए कि आरोपी अपने गलत मकसद में काफी आगे जा चुका था.' पटना हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान ये बातें कहीं. 'लाइव लॉ' की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने 29 जुलाई, 2013 की दोष सिद्धि के फैसले और 1 अगस्त, 2013 के सजा सुनाने वाले आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही.

रिपोर्ट में अभियोजन पक्ष के हवाले से बताया गया है कि 8 फरवरी, 2010 को सुबह 10 बजे, एक विधवा महिला अपने बच्चों के साथ घर पर सो रही थी. इस बीच एक व्यक्ति कथित तौर पर घर में घुस आया और महिला के ऊपर लेटकर उसका मुंह बंद कर दिया. रिपोर्ट के अनुसार, महिला के चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए और उस व्यक्ति को पकड़ लिया.

आरोपी को IPC की धारा 376/511 के तहत चार साल और IPC की धारा 448 के तहत छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी. ये दोनों सजाएं एक साथ चलनी थीं.

आरोपी पक्ष की दलील थी कि महिला के बयान में विसंगतियां थीं और उनके समर्थन में कोई अन्य सबूत नहीं था. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जिन ग्रामीणों ने कथित तौर पर उस व्यक्ति को पकड़ा था, उनसे पूछताछ नहीं की गई.

कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि क्या सामने आए तथ्य 'बलात्कार की कोशिश' (IPC की धारा 376/511 के तहत दंडनीय) की श्रेणी में आते हैं या फिर ये IPC की धारा 354 के दायरे में आते हैं, जो किसी महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से किए गए हमले या आपराधिक बल प्रयोग से संबंधित है.

कोर्ट ने पाया कि ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं हैं, जिनसे यह कहा जा सके कि उस व्यक्ति ने महिला के साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी.

'लाइव लॉ' के अनुसार, कोर्ट ने 'अमन कुमार' मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा, "अक्सर अभद्र हमलों को बढ़ा-चढ़ाकर 'बलात्कार की कोशिश' के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन ऐसा साबित करने के लिए ठोस सबूत होने चाहिए, जो यह दिखाएं कि आरोपी हर हाल में और महिला के विरोध के बावजूद अपनी कामुक इच्छा को पूरा करने के लिए अडिग था." इसमें आगे कहा गया कि ऐसे सबूत नहीं हैं जिनसे यह साबित हो सके कि आरोपी ने ऐसा कोई काम किया था, जिससे अंततः बलात्कार हो जाता.

कोर्ट ने कहा, "चूंकि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आरोपी ने खुद को या पीड़िता को निर्वस्त्र किया, या शारीरिक संबंध बनाने की दिशा में कोई कदम उठाया, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि वह तैयारी के चरण से आगे बढ़ गया था. उसने ऐसा कोई काम नहीं किया था, जिसे अगर बीच में न रोका जाता, तो वह बलात्कार में बदल जाता."

फरवरी, 2010 की घटना के बाद बीते समय, आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न होने और 13 साल से अधिक समय तक जमानत पर रहने के दौरान उसके अच्छे आचरण (जिसमें उसने अपनी आज़ादी का कोई गलत इस्तेमाल नहीं किया) को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सजा में बदलाव किया और इसे उतनी ही अवधि तक सीमित कर दिया जितनी वह पहले ही काट चुका है.

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About the Author

Sunil Mishra

Sunil Mishra

इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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