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क्या बिहार NDA में सब ठीक है? आरक्षण पर मांझी-चिराग में जंग, अब फरक्का जल संधि के बहाने BJP को आंख दिखा रही JDU

बिहार एमएलसी चुनाव से पहले एनडीए के भीतर घमासान देखने को मिल रहा है. आरक्षण के मुद्दे पर HAM और LJPR में जुबानी जंग चल रही है. तो वहीं, 'फरक्का जल संधि' के मुद्दे पर जेडीयू और बीजेपी के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है.

क्या बिहार NDA में सब ठीक है? आरक्षण पर मांझी-चिराग में जंग, अब फरक्का जल संधि के बहाने BJP को आंख दिखा रही JDU
Image Credit: क्या बिहार NDA में सब ठीक है? (File Photo- Zee Media)

बिहार एनडीए में इन दिनों काफी खींचतान देखने को मिल रही है. सत्ता में सहयोगी होने के बावजूद एनडीए में शामिल दल एक-दूसरे पर हमला करने में जुटे हुए हैं. आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच मचे घमासान मचा हुआ है, तो वहीं 'फरक्का जल संधि' के मुद्दे पर जेडीयू ने बीजेपी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. जेडीयू तो इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच उतर चुकी है और ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के जरिए इस जल संधि को बिहार के खिलाफ बता रही है. पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार से इस समझौते पर पुनर्विचार करते हुए इसे आगे नहीं बढ़ाने की अपील की है. JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने साफ कहा है कि बिहार के हित तय किए बिना संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए.

दरभंगा में नीतीश संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय झा ने कहा कि पिछले 30 वर्षों में बिहार के साथ इस मामले में अन्याय हुआ है. गंगा से बांग्लादेश जाने वाले पानी में बिहार की हिस्सेदारी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है. बेगूसराय में उन्होंने यहां तक कह डाला कि सरकार रहे या जाए, पर फरक्का जल संधि हमारी पार्टी का स्पष्ट स्टैंड है कि इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए. 

नीतीश कुमार ने केंद्र से बार-बार फरक्का बैराज को हटाने की मांग की है, क्योंकि इसके कारण भारी मात्रा में गाद जमा होती है और बाढ़ आती है. फरक्का पर नीतीश कुमार के रुख को विस्तार से बताने वाले कई वीडियो भाषण उपलब्ध हैं.- संजय झा, कार्यकारी अध्यक्ष, जेडीयू

अगर नई संधि होती है, तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए. वर्तमान संधि से बिहार में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है. 1996 में केंद्र की कांग्रेस सरकार और बिहार की लालू यादव वाली सरकार ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी थी. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. उन्होंने कहा है कि फरक्का बराज से राज्य को भारी नुकसान हो रहा है.- ईंजी. अजीत कुमार, जेडीयू विधायक

फरक्का बैराज के खिलाफ है जेडीयू

जेडीयू नेताओं की बयानबाजी से लगता है कि पार्टी की ओर से केंद्र सरकार पर फरक्का बैराज को हटाने का दबाव बनाया जा रहा है. संजय झा ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार ने केंद्र से बार-बार फरक्का बैराज को हटाने की मांग की है, क्योंकि इसके कारण भारी मात्रा में गाद जमा होती है और बाढ़ आती है. इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि हम इसके नवीनीकरण के पूरी तरह खिलाफ हैं, क्योंकि यह हमारे हितों की पूर्ति नहीं करता, बल्कि यह बिहार में विनाशकारी बाढ़ के प्रमुख कारणों में से एक बना हुआ है.

क्या केंद्र सरकार पर दबाव डाल रही है JDU?

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बिहार में एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है. इस चुनाव में बीजेपी से बराबर की सीटें लेना संजय झा के लिए बड़ी चुनौती है. अगर वह ऐसा करने में नाकाम रहते हैं, तो नीतीश कुमार की नाराजगी का शिकार हो सकते हैं. यही वजह है कि उनकी तरफ से फरक्का जल संधि के बहाने बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है. राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार की लोकप्रियता में भी कोई कमी नहीं आई है, इसलिए उनके ही नाम से इस अभियान को चलाकर पार्टी अपनी लोकप्रियता बढ़ाना चाह रही है.

जेडीयू के रुख से BJP खेमे भी हलचल

उधर, फरक्का जलसंधि पर JDU के लगातार तल्ख तेवरों से बीजेपी खेमे में भी हलचल देखने को मिल रही है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों को पटना में रहने के निर्देश दिए हैं. जो मंत्री बिहार या पटना से बाहर हैं, उन्हें तत्काल वापस लौटने के आदेश दिए गए हैं. सीएम सम्राट शुक्रवार (11 सितंबर) को ही भाजपा मंत्रियों के साथ बैठक करने वाले थे, लेकिन अंतिम समय में इस बैठक को रद्द कर दिया गया. बैठक का आधिकारिक एजेंडा भले ही पीएम नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों पर आधारित हो, लेकिन इसकी टाइमिंग ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया.

चिराग-मांझी में भी घमासान जारी

वहीं, एनडीए के साथी चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण को लेकर सियासी घमासान जारी है. दोनों दलों के नेता अब व्यक्तिगत हमलों पर उतर आए हैं. दो दिन पहले HAM विधायक प्रफुल्ल मांझी की ओर से LJPR सांसद अरुण भारती के पिता को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद विवाद और ज्यादा गहरा गया है. लोजपा-आर के कार्यकर्ताओं ने विधायक प्रफुल्ल मांझी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वे सुबह के नाश्ते में चाय, गांजा और शराब का सेवन करते हैं.  इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने एक महिला को भगाकर शादी की है. इस तरह की बयानबाजी से गठबंधन की मर्यादा टूट रही है.

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About the Author

K. Raj Mishra

K. Raj Mishra

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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