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बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. राजद पार्टी ने 8 सीटों में से 6 के लिए अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. पहली लिस्ट में तीन ऐसे नेता हैं, जिन्होंने शुक्रवार (11 सितंबर) को ही पार्टी ज्वाइन की थी. पीके की साथी रहीं डॉ. रश्मि विनायक ने शुक्रवार को जन सुराज का साथ छोड़कर राजद ज्वाइन की और तेजस्वी यादव ने उन्हें तुरंत टिकट भी दे दिया. इसी तरह से कांग्रेस से आए दिलीप कुमार और वामदल से आए जयराम यादव को भी तुरंत टिकट मिल गया. जेडीयू छोड़कर राजद ज्वाइन करने वाले डॉ. संजीव कुमार सिंह को टिकट दिया गया है.
पहली लिस्ट में बाहरी नेता रहे हावी
राजद ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है. वहीं, दिलीप कुमार को पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से टिकट मिला है. सारण शिक्षक सीट से प्रो. जयराम यादव को मैदान में उतारा गया है. इसी तरह से तिरहुत स्नातक सीट से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को उम्मीदवार बनाया गया है. इसके अलावा कोसी स्नातक सीट से नितेश कुमार और दरभंगा स्नातक सीट से अनिल कुमार झा को टिकट मिला है. पार्टी ने अभी दो सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं.
रोहिणी ने तेजस्वी की नीति पर उठाए सवाल
उम्मीदवारों के नाम का एलान होते ही लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अवसरवादी चेहरे को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है. रोहिणी ने एक्स पर एक पोस्ट करके कहा कि वैचारिक निष्ठा और लंबे संघर्ष को दरकिनार कर चुनाव से ठीक पहले आए अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं का अनादर है. उन्होंने इसे निष्ठावान लालूवादियों के साथ वादाखिलाफी भी बताया. रोहिणी ने कहा कि इस तरह के फैसलों से संगठन की मजबूती को नुकसान पहुंच सकता है.
रोहिणी के ट्वीट पर जेडीयू ने राजद को घेरा
जेडीयू प्रवक्ता चंदन सिंह ने रोहिणी आचार्य के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज स्थिति ये है कि तेजस्वी प्रसाद यादव के साथ उनके गठबंधन के सहयोगी भी पूरी मजबूती से खड़े नहीं दिख रहे हैं और खुद तेजस्वी यादव के पास भी अपने दम पर पर्याप्त प्रत्याशी नहीं हैं. यही वजह है कि सहयोगी दलों के नेताओं को तोड़कर अपना प्रत्याशी बनाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि राष्ट्रीय जनता दल में टिकट को लेकर लेन-देन का जो खेल है, वह अब चरम पर पहुंच चुका है. खुद आरजेडी के कार्यकर्ता लंबे समय से टिकट वितरण को लेकर सवाल और आरोप लगाते रहे हैं और आज जिस तरह की परिस्थितियां सामने आ रही हैं, उससे जनता के सामने आरजेडी की असल राजनीति और उसकी कथित विचारधारा पूरी तरह उजागर हो रही है.
मृत्युंजय तिवारी ने भी कसा तंज
भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने इस विषय पर कहा कि रोहणी जी ने जो सवाल खड़े किए हैं, वो मूल रूप से राष्ट्रीय जनता दल और उसके परिवार का आंतरिक मामला है. उन्होंने कहा कि आरजेडी आज अंतरकलह से जूझ रही है. पार्टी के भीतर विद्रोह है और गठबंधन के भीतर भी अनबन व असंतोष दिखाई दे रहा है. राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टी में टिकट किस प्रक्रिया के तहत मिलता है, यह रोहिणी जी जानती हैं और बिहार की जनता भी अच्छी तरह जानती है. इस पूरे मामले पर सफाई देने की जिम्मेदारी भी आरजेडी के नेतृत्व की है. उन्होंने कहा कि हमारी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि जिस तरह पार्टी के भीतर और गठबंधन में संकट खड़ा हुआ है, उससे जनता का भरोसा और विश्वास दोनों टूटे हैं. आज आरजेडी की जो दुर्गति हुई है, वह किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसके अपने लोगों ने सवाल खड़े करके सामने रखी है.
कांग्रेस ने राजद का बचाव किया
वहीं, कांग्रेस ने इस मामले में राजद का बचाव करते हुए कहा कि ये आरजेडी का आंतरिक मामला है और आरजेडी के अंदरखाने इस पर चर्चा करना ज्यादा बेहतर होगा. कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि प्रत्याशियों का चयन पार्टी का आलाकमान करता है. जब आलाकमान ने प्रत्याशियों का चयन कर लिया, तो उसके बाद बहुत ज्यादा टीका-टिप्पणी करना, किसी के लिए भी उचित नहीं माना जाता. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी के फैसले का सम्मान होना चाहिए और अगर कोई आपत्ति है, तो उसे पार्टी के अंदर उचित मंच पर रखा जाना चाहिए.
जेडीयू-बीजेपी पर राजद का पलटवार
उधर, राजद ने इस मामले पर जेडीयू और बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा-जेडीयू के नेताओं को पहले अपने घर में झांककर देखना चाहिए. राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि उनके यहां किस तरह की स्थिति और परिस्थिति बनी हुई है, ये किसी से छिपा नहीं है. अनंत सिंह जिस तरह नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, उससे जेडीयू में जूतम-पैजार की स्थिति है. उन्हें पहले अपना घर संभालना चाहिए. दूसरे के घर में ताक-झांक करने से उन्हें कोई राजनीतिक फायदा नहीं मिलने वाला. राजद प्रवक्ता ने कहा कि बिहार की जनता का विश्वास और समर्थन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में है, खासकर ग्रेजुएट, शिक्षित, छात्र और नौजवान वर्ग में. तेजस्वी यादव ने सत्ता में रहते हुए भी और सत्ता से बाहर रहने के बाद भी लगातार छात्रों, शिक्षकों और बेरोजगार नौजवानों के मुद्दे पर संघर्ष किया है.