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बिहार में विधान परिषद (MLC) की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले राजद और कांग्रेस के मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. 8 में से 6 सीटों पर राजद की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने से कांग्रेस पार्टी काफी नाराज है और अब वह भी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. कांग्रेस के पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा ने तेजस्वी यादव पर गठबंधन धर्म का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है. उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि तेजस्वी यादव पूरी ईमानदारी से भारतीय जनता पार्टी से नहीं लड़ना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि 2025 के चुनाव में नहीं देखा गया, उपचुनाव में भी नहीं दिखा और अभी भी नहीं दिख रहा है. वहीं, राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा से राजद हमेशा लड़ती रही है, इसीलिए लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव पर इतने मुकदमे हैं.
क्या टूट जाएगी राजद-कांग्रेस की दोस्ती?
राजनीति में ना तो कोई परमानेंट दोस्त होता है और ना ही दुश्मन. इसके तमाम उदाहरण देखने को मिलते हैं. बिहार में नीतीश कुमार एक नहीं, बल्कि दो बार बीजेपी से रिश्ता तोड़कर राजद के साथ सरकार बना चुके हैं और बाद में फिर से एनडीए में आ गए. कांग्रेस और राजद के साथ भी कई बार ऐसा हो चुका है. कांग्रेस और RJD ने पहली बार 1998 का लोकसभा चुनाव एक साथ मिलकर लड़ा था. इस चुनाव में लालू यादव ने 54 सीटों में से केवल 8 सीटें कांग्रेस को दी थीं, जिसमें से कांग्रेस सिर्फ 4 सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी. इसके बाद 1999 का लोकसभा चुनाव भी गठबंधन में रहकर लड़ा गया, लेकिन 2000 के विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन टूट गया था. 2000 में सिर्फ सात में नीतीश कुमार की सरकार गिरने के बाद कांग्रेस ने राजद को समर्थन दे दिया और राबड़ी देवी बिहार की सीएम बनीं. 2004 का लोकसभा चुनाव भी कांग्रेस ने राजद के साथ लड़ा, लेकिन 2005 के विधानसभा चुनाव में फिर से गठबंधन टूट गया था. अक्टूबर 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में फिर से राजद और कांग्रेस का मिलन हो गया था. 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस फिर से अकेले लड़ी. 2010 का विधानसभा चुनाव फिर से अलग-अलग लड़ा गया. 2014 के लोकसभा में फिर गठबंधन हो गया, जो अभी तक चल रहा है.
गठबंधन टूटने से क्या नुकसान होगा?
सियासी जानकारों के मुताबिक, अगर राजद-कांग्रेस का गठबंधन टूट गया, तो वोटों में बिखराव देखने को मिल सकता है. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को करीब 23 प्रतिशत वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर BJP को 20.08 प्रतिशत वोट शेयर मिला था. इस चुनाव में कांग्रेस को 8.71% वोट मिला था. 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 9.48 प्रतिशत था. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बिहार में लगभग 9.4% वोट हासिल हुए थे और पार्टी ने 3 सीटें जीती थीं. वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद को 22.14% वोट शेयर मिला था. सियासी जानकारों के मुताबिक, बिहार में कांग्रेस की हालत भले ही खराब हो, लेकिन वह राजद का नुकसान करने की क्षमता जरूर रखती है. दूसरी ओर, राजद और कांग्रेस के बीच कोआर्डिनेशन ना होने का खामियाजा राज्यसभा चुनाव में उठाना पड़ा था. इस चुनाव में राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को कांग्रेस के 3 विधायकों ने वोट नहीं दिया था. लिहाजा, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
विरोधियों ने राजद-कांग्रेस पर निशाना साधा
इस तरह बयानबाजी को देखकर लगता है कि राजद और कांग्रेस के बीच कभी भी दोस्ती टूट सकती है. दोनों दलों के बीच जारी बयानबाजी से विरोधियों को हमला करने का मौका मिल गया है. बीजेपी और जेडीयू ने इसे लेकर महागठबंधन की एकता पर तंज कसा है. जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा ने कहा कि स्वार्थ और अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाओं पर ही यह गठबंधन टिका हुआ है. जो लोग अपनी एकजुटता दिखाकर जनता को भ्रम में डालने की कोशिश कर रहे थे, आज वे अपने अलायंस को नहीं संभाल पा रहे हैं. बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष पवन जायसवाल ने कहा कि महागठबंधन टूटने के कगार पर है. कांग्रेस की मजबूरी है कि अगर वो अपने कैंडिडेट नहीं देगी, तो उसका नाम लेने वाला कोई नहीं रह जाएगा.